पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते राजस्थान के बूंदी और कोटा का चावल उद्योग भारी दबाव में है। निर्यात ठप होने से लगभग 300 करोड़ रुपये मूल्य का बासमती चावल बंदरगाहों और गोदामों में फंसा हुआ है।
मिल मालिकों के अनुसार, अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो उत्पादन रोकना पड़ सकता है, जिससे लगभग 10,000 श्रमिकों के सामने बेरोजगारी का खतरा पैदा हो गया है।
बूंदी जिला लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष रमनदीप शर्मा ने सोमवार को बताया कि बूंदी और कोटा की लगभग 35 इकाइयों में प्रतिदिन 25,000 क्विंटल चावल प्रसंस्कृत किया जाता है। इसका 80 प्रतिशत हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरान और इराक को निर्यात होता है।
15 दिन में करीब 3.75 लाख क्विंटल चावल की खेप अटकी
ईरान-इजरायल युद्ध के कारण पिछले 15 दिन में करीब 3.75 लाख क्विंटल चावल की खेप अटक गई है। पोत परिवहन कंपनियों ने युद्ध के हालात को देखते हुए समुद्री बंदरगाहों से परिवहन के लिए बीमा देने से मना कर दिया है।
इसके अलावा, माल ढुलाई की लागत में 10 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है, जिससे बाजार में चावल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। बूंदी चावल मिल संघ के सचिव गौरव नूवाल ने बताया कि लगभग चार लाख टन चावल वर्तमान में कांडला बंदरगाह पर अटका हुआ है।
मिल मालिकों ने सरकार से ‘कोविड-19’ की तर्ज पर चावल उद्योग के लिए विशेष राहत पैकेज और रियायतों की मांग की है। बूंदी का चावल उद्योग सालाना लगभग 4,000 करोड़ रुपये के कारोबार पर टिका है। बूंदी, कोटा और बारां में हर साल 15 लाख टन बासमती चावल का उत्पादन होता है।
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