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‘बांग्लादेश से आए अवैध हिंदू, मुस्लिम नागरिक वापस भेजे जाएंगे’

एनईएसओ ने बांग्लादेश से अवैध तरीके से असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में घुस आए हिंदू और मुस्लिम नागरिकों को वापस भेजे जाने की मांग उठाई।

Author March 15, 2017 9:33 AM
मांग की गई है कि असम संधि को सच्चे दिल से लागू किया जाना चाहिए (photo source- Indian express)

पूर्वोत्तर में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स यूनियन (एनईएसओ) ने मंगलवार को बांग्लादेश से अवैध तरीके से असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में घुस आए हिंदू और मुस्लिम नागरिकों को वापस भेजे जाने की मांग उठाई। निखिल भारत बंगाली उद्बस्तु समन्वय समिति (एनबीबीयूएसएस) के बैनर तले लोगों के एक समूह द्वारा बांग्लादेशी हिंदुओं को भारतीय नगारिकता दिए जाने की मांग उठाने के बाद छात्र संघ अपनी मांगें रखी हैं।

एनबीबीयूएसएस के सदस्यों ने धेमाजी जिले के सिलपथर में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) के एक कार्यालय में तोड़-फोड़ भी की।

एनईएसओ के चेयरमैन सैमुअल जाइरवा ने कहा, “एनईएसओ बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ मामले पर अपने विचार पर कायम है और बांग्लादेश से अवैध तरीके से असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में घुस आए हिंदुओं और मुस्लिमों को वापस भेजे जाने की अपनी लंबे समय से उठाई जा रही मांग को फिर से उठाता है।”

उन्होंने कहा, “असम संधि को सच्चे दिल से लागू किया जाना चाहिए और एनईएसओ का मानना है कि अवैध घुसपैठ मामले का समाधान असम संधि को पूरी तरह लागू कर ही निकाला जा सकता है।” एएएसयू कार्यालय में तोड़-फोड़ की निंदा करते हुए जाइरवा ने कहा, “अपराधियों को निश्चित तौर पर तत्काल पकड़ा जाना चाहिए और दोषियों को बिना किसी समझौते के सजा दी जानी चाहिए।”

इसी मुद्दे पर कुछ साल पहले कलकत्ता विश्वविद्यालय के लिपी घोष ने कहा था कि भारतीय सीमा में दो तरह के बांग्लादेशी आते हैं। एक तो वे, जो बेहतर ज़िंदगी की उम्मीद में भारतीय शहरों में अवैध रूप से बसने के लिए आते हैं और दूसरे वे जो रोज़गार के लिए हर रोज़ या सप्ताह या किसी मौसम में कई बार सीमा पार कर आते जाते हैं। ये भारतीय शहरों में राजमिस्त्री और अन्य कारीगरी का काम करते हैं।

‘असम संधि’ के अनुसार 1966 से 1971 के बीच बांग्लादेश से आए लोगों को भारत के नागरिक के तौर पर पंजीकृत किए जाने के लिए वक़्त दिया गया था, जबकि साल 1971 के बाद सीमा पार कर भारत आए प्रवासियों का भारत में रहना अवैध तय किया गया था और उन्हें उनके मूल देश वापस भेजा जाना था। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर क्या हो पाता है।

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