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Kashmir: 1996 में 3 परिवार के 7 लोगों का हुआ था मर्डर, 23 साल बाद गिरफ्तार हो पाया पहला आरोपी

कश्मीर के गांदरबाल जिले के कंगन शहर से आरोपी वली मोहम्मद मीर को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। बांदीपोरा के एसपी राहुल मलिक ने बताया कि आरोपी मीर को पकड़ने के लिए एसआईटी गठित की गई थी।

प्रतीकात्मक तस्वीर फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

 

5 अक्टूबर 1996 को जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में 3 परिवारों के 7 लोगों को जान से मार दिया गया था। इस घटना को अंजाम देने का आरोप 3 लोगों पर था। पुलिस ने 23 साल बाद पहले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि तीनों आरोपी इखवान संगठन से ताल्लुक रखते थे, जिसे उस वक्त सरकार समर्थित संगठन माना जाता था और इसका इस्तेमाल आतंकियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने में होता था।

यह है मामला : पुलिस के मुताबिक, अक्टूबर 1996 में इखवान संगठन के तीन सदस्यों ने 3 परिवारों के 7 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके बाद तीनों आरोपी फरार हो गए थे। मंगलवार (7 मई) को इनमें से एक आरोपी वली मोहम्मद मीर को गांदरबल जिले के कंगन शहर से गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल, इस मामले से संबंधित 2 अन्य आरोपी अब्दुल राशिद और मोहम्मद अयूब अब भी फरार हैं।

 

कोर्ट की फटकार के बाद दायर हुई थी चार्जशीट: बता दें कि इस मामले में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की फटकार के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। बांदीपोरा के एसपी राहुल मलिक ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि यह आरोपी इतने साल ठिकाने बदलकर छिपता रहा। हमने उसे गिरफ्तार करने के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई दी। पुलिस ने बताया कि उन्हें मीर के कंगन जिले के बरवाला गांव में होने की खबर मिली थी। इसके बाद एसएचओ के नेतृत्व में सुंबल पुलिस की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘बांदीपोरा के जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा आरोपी मीर के खिलाफ कई अरेस्ट वॉरंट जारी किए, लेकिन वह पुलिस से बचता रहा।

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हमले में 5 लोग हुए थे घायल: इखवान संगठन के सदस्यों ने बांदीपोरा के सदरकूट-बाला गांव में 5 अक्टूबर 1996 को तीन परिवारों के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी। हमलावरों ने पांच अन्य लोगों को भी घायल कर दिया था। गवाहों ने हमलावरों की पहचान अब्दुल राशिद पर्रे उर्फ राशिद बिल्ला, वली मोहम्मद मीर और मोहम्मद अयूब डार के रूप में की थी।

पीड़ितों के परिजनों ने कोर्ट में लगाई थी गुहार: बता दें 2015 में पीड़ितों के परिजनों ने मामले की दोबारा जांच कराने के लिए हाईकोर्ट से अपील की थी। हाई कोर्ट ने पुलिस को तुरंत चार्जशीट दाखिल करने को कहा। ऐसे में सरकार ने कोर्ट को सूचना दी कि आरोपी पर्रे और मीर फरार हैं, जबकि डार प्रशासनिक सेना के साथ काम कर रहा था। इसके बाद कोर्ट ने उसे अपराधी घोषित कर दिया था।

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