सैनिटरी नैपकिन को साफ कर दोबारा किया जा सकेगा इस्तेमाल, IIT के 2 छात्राओं ने बनाया ‘क्लींज राइट’ नाम का उपकरण

आईआईटी की छात्राओं ने सैनिटरी नैपकिन को साफ कर दोबारा इस्तेमाल करने वाले एक उपकरण का आविष्कार किया है। बताया जा रहा है कि इसकी कीमत 1500 रुपए हो सकती है।

Author नई दिल्ली | July 25, 2019 7:56 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की दो छात्राओं ने सैनिटरी नैपकिन को साफ करके उसको दोबारा इस्तेमाल में लाने के लिए एक उपकरण आविष्कार किया है। बताया जा रहा है कि इस उपकरण से बायोमेडिकल कचरे में कमी आएगी। इस उपकरण की खोज से नैपकिन को बार-बार खरीदने की जरुरत भी खत्म हो जाएगी। वहीं बताया जा रहा है कि यह आम नैपकिनों से सस्ता भी होगा।

‘क्लींज राइट’ नाम से पेटेंट होगाः आईआईटी बॉम्बे और गोवा की इन छात्राओं ने सैनिटरी नैपकिन को साफ करके उसके दोबारा इस्तेमाल में लाने वाले उपकरण का नाम ‘क्लींज राइट’ रखा है। बता दें कि इस इपकरण को पेटेंट करवाने के लिए भी भेज दिया गया है। आईआईटी की छात्राओं के मुताबिक यह उपकरण आम महिलाओं तक 1500 रुपए में उपलब्ध हो सकता है।

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नॉन-बायोग्रेडेबल प्लास्टिक पैड से महिलाओं को मिलेगा छुटकाराः आईआईटी-बॉम्बे की इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा ऐश्वर्या ने बताया कि मासिक धर्म के दौरान सफाई को लेकर महिलाओं में जागरूकता बढ़ रही है। इस जागरूकता को देखते हुए ऐसे पैड का आविष्कार किया गया है। छात्राओं का कहना है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अब एक बार प्रयोग करके फेंकने वाला सैनिटरी पैड इस्तेमाल करने लगी हैं। ये पैड नॉन-बायोग्रेडेबल प्लास्टिक से बने होते हैं जो आगे जाकर बायोमेडिकल कचरे में तब्दील होते हैं। वहीं अब इस खोज से नॉन-बायोग्रेडेबल प्लास्टिक पैड से महिलाओं को छुटकारा मिलने की उम्मीद है।

बिना बिजली की साफ होगी पैडः छात्राओं ने यह भी बताया कि एक महिला अपनी जिंदगी में मासिकधर्म के कुल चक्र में करीब 125 किलोग्राम तक नॉन बायोग्रेडेबल कचरा पैदा करती है। वहीं एक सिंथेटिक पैड के घुलने में करीब 500-800 साल लगते हैं। ऐसे में यह उपकरण महिलाओं के लिए काफी लाभदायक साबित होगा। उन लोगों ने यह भी बताया कि इस उपकरण का इस्तेमाल बिना बिजली के भी किया जा सकता है। इसमें बिजली की कोई जरूरत नहीं होती है।

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