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आइजीआइ पुलिस थाना बनेगा बाल मित्र थाना

दिल्ली के आइजीआइ हवाई अड्डे का पुलिस थाना जल्द ही राजधानी का पहला बाल मित्र थाना घोषित किया जाएगा।

Author नई दिल्ली | June 24, 2017 1:11 AM
IGI Airport *** Local Caption *** IGI Airport

दिल्ली के आइजीआइ हवाई अड्डे का पुलिस थाना जल्द ही राजधानी का पहला बाल मित्र थाना घोषित किया जाएगा। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की पहल पर थाने के एक कोने को बच्चों के अनुकूल बनाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। यह एक मॉडल बाल मित्र थाना होगा जो एनसीपीसीआर की ओर से तैयार किए जा रहे राष्ट्रीय दिशा-निर्देश के मुताबिक है और आयोग का लक्ष्य है कि देश के हर जिले में एक बाल-मित्र थाना बनाया जाए। दिशा-निर्देश को अंतिम स्वरूप देने के लिए 27 जून को आयोग ने बैठक बुलाई गई है।

एनसीपीसीआर की सदस्य रूपा कपूर के मुताबिक एक बच्चे और बच्चे के संरक्षण तंत्र के बीच पुलिस प्राय: पहली सपंर्क कड़ी होती है, इसलिए जरूरी है कि पुलिस बच्चों के लिए दोस्ताना व्यवहार रखे। कपूर के मुताबिक दिल्ली पुलिस के साथ आयोग ने इसी महीने एक आॅरियंटेशन कार्यक्रम किया था और उनके सुझाव के आधार पर आइजीआइ हवाई अड्डे के थाने को राजधानी का पहला बाल मित्र थाना बनाया जा रहा है। इसके बाद दिल्ली के शेष 12 जिलों में भी एक बाल मित्र पुलिस थाने तैयार किए जाएंगे जिससे कि बाल अपराधियों और बाल पीड़ितों (संरक्षण, कल्याण और न्याय के जरूरतमंद बच्चों) के साथ पुलिस संवेदनशीलता से पेश आ सके।

आइजीआइ हवाई अड्डे पुलिस थाने में बच्चों के लिए जो कोना तैयार किया जा रहा है, वहां बच्चों के हिसाब से बैठने की व्यवस्था होगी। बाल मित्र थाने में रंग-बिरंगे पोस्टर, किताबें, कॉमिक्स, साफ पीने का पानी, अलग से शौचालय, आराम के लिए बिस्तर की व्यवस्था भी होगी। बच्चियों से बात करने के लिए महिला पुलिसकर्मी होंगी। थाने के बाल मित्र कोने या कमरे की निगरानी सीसीटीवी से की जाएगी ताकि बच्चों के साथ कैसा व्यवहार हो रहा है, उसका पता लग सके। डिस्पले बोर्ड पर बाल कल्याण और संरक्षण के अधिकारियों के नंबर, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के नंबर, बाल कल्याण समितियों के नंबर लिखे होंगे। कानूनी, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सीय सुविधाएं भी बच्चों को मुहैया कराई जाएंगी। इसके साथ ही इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा कि बच्चे, आरोपियों के संपर्क में नहीं आएं।

इसके साथ ही हरेक बाल मित्र थाना में सहायक सब-इंस्पेक्टर या इसके ऊपर के रैंक का एक बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (सीडब्लूपीओ) होगा जिसे बच्चों के साथ कैसे पेश आएं इसका प्रशिक्षण होगा। साथ ही बच्चों से संबंधित कानूनों जैसे जेजे एक्ट, पोक्सो एक्ट, बाल तस्करी रोकथाम कानून, बाल श्रम कानून, बाल विवाह निवारण कानून और अन्य कानूनों के संबंध में सीडब्लूपीओ को नियमित प्रशिक्षण और जानकारी दी जाएगी।

इसके साथ ही एनसीपीसीआर एक राष्ट्रीय दिशा-निर्देश तैयार कर रही है, जिसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इस पर व्यापक मंजूरी के लिए इस महीने की 27 तारीख को आयोग द्वारा एक बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में नौ राज्यों के पुलिस महानिदेशक, केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और दिल्ली सरकार के प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। 27 जून की बैठक में मंजूरी के बाद इन दिशा-निर्देशों को हर राज्य के पास भेजा जाएगा ताकि राज्य अपने यहां हर जिले में एक बाल मित्र थाना तैयार करें। यह पहल बाल अपराधों और अपराध से पीड़ित बच्चों की संख्या में दिनोंदिन हो रही बढ़ोतरी के मद्देनजर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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