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गंगा नदी में नहाना यानी चिकित्सक के पास जाना!

जिस गंगा में नहाना एक-डेढ़ दशक पहल तक पुण्य माना जाता था आज उसी गंगा का पानी पीने योग्य तो क्या, नहाने लायक भी नहीं रह गया है।
Author कोलकाता | February 7, 2018 03:47 am

शंकर जालान

बचपन से अभिवावक, शिक्षक और चिकित्सकों से यह सुनते आ रहे हैं कि ‘स्वस्थ और निरोग रहना हो तो रोज नहाओ’ लेकिन राज्य में बहने वाली गंगा समेत सवा दर्जन से ज्यादा नदियों के पानी पर हाल में जारी हुई एक रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि सूबे में गंगा समेत तमाम नदियों में स्नान करना यानी नहाना रोग को दूर भगाना नहीं, बल्कि रोग को न्योतना जैसा ही है। जिस गंगा में नहाना एक-डेढ़ दशक पहल तक पुण्य माना जाता था आज उसी गंगा का पानी पीने योग्य तो क्या, नहाने लायक भी नहीं रह गया है।

पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डब्लूूबीपीसीबी) की ओर से जारी रिपोर्ट में यह जानकारी मिली है कि राज्य में बहने वाली 17 नदियों के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा जरूरत से ज्यादा है। डब्लूबीपीसीबी ने लोगों को आगाह किया है कि गंगा समेत राज्य की अनेक नदियों में डुबकी लगाना बीमारी को बुलावा देना है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक नदी के पानी में प्रति एक सौ मिलीलीटर कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की संख्या पांच सौ से अधिक कतई नहीं होनी चाहिए, लेकिन उत्तर चौबीस परगना जिले में दक्षिणेश्वर घाट पर यह 4.10 लाख, हावड़ा जिले के शिवपुर घाट पर 2.80 लाख, महानगर के गार्डनरीच घाट पर 2.40 लाख और मुर्शिदाबाद जिले के बहरमपुरघाट में बहरमपुर में 1.10 लाख है।
इसके अलावा दक्षिण चौबीस परगना, बर्दवान व हुगली के कई घाटों के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा जरूरत से कहीं ज्यादा है। वहीं, दामोदर नदी में 90 हजार, द्वारका में 34 हजार, बराकर व कंसाई में 17 हजार, महानंदा, करोला व कालजनी में 14 हजार और तीस्ता में सात हजार है।

महानगर के बाबू घाट, आर्मेनियम घाट, जगन्नाथ घाट, अहिरीटोला घाट, बिचाली घाट, शोभाबाजार घाट, बाजे कदमतला, जजेज घाट, काशीपुर घाट, हावड़ा के रामकृष्णपुर घाट, तेलकल घाट, बांधा घाट, जेएन मुखर्जी रोड घाट, सोलह कोठी घाट, शिवपुर घाट, उत्तर चौबीस परगना के राम प्रसाद घाट, ईंटखोला घाट, नीचूबासा छठ तालाब घाट, दुर्गा तालाब छठ घाट, हुगली जिले के त्रिवेणी घाट, चुंचुंड़ा घाट, तेलिनीपाड़ा बाबू घाट, इंदिरा मैदान घाट, पलता घाट, लक्खी घाट और रामतीर्थ गंगा घाट पर भी गंदगी को जो आलम है।
डब्लूबीपीसीबी के अधिकारियों की मानें तो नदियों के बढ़ते प्रदूषण का मुख्य कारण उनमें नालों का गंदा पानी, कारखानों के रसायन, मल-मूत्र का मिश्रण, मानव व पशुओं की लाशों के अवशेषों को फेंका जाना है।
कोलकाता के मेयर शोभन चटर्जी ने भी माना कि गंगा की शाखाएं भागीरथी और हुगली में कोलीफॉर्म बैक्टीरयिा की संख्या काफी अधिक है, जो नहाने के लिए उपयुक्त नहीं है।

गंगा : कहां कितने बैक्टीरिया (प्रति 100 मिलीलीटर में)
दक्षिणेश्वर घाट – 4.10 लाख
शिवपुर घाट – 2.80 लाख
गार्डनरीच घाट – 2.40 लाख
बहरमपुर घाट – 1.10 लाख
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राज्य की अन्य बड़ी नदियों में प्रदूषण का स्तर
दामोदर – 90 हजार
द्वारका – 34 हजार
बराकर -17 हजार
कंसाई -17 हजार
महानंदा -14 हजार
करोला -14 हजार
कालजनी -14 हजार
तीस्ता – 07 हजार

पर्यावरणविद् डॉ. मोहित राय के मुताबिक राज्य की नदियों के जल में प्रदूषण चरम पर है। गंगा समेत 17 नदियों के जल में प्रदूषण का आलम यह है कि यह पीने क्या नहाने के लायक भी नहीं है। डॉ. बीपी साहा कहते हैं कि कोलीफार्म बैक्टीरिया मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। भारत में सबसे ज्यादा लोग जलजनित बीमारियों के शिकार होते हैं। पीलिया, पेचिश समेत जलजनित रोगों का मुख्य कारण उसमें पाए जाने वाला कोलीफार्म बैक्टीरिया होता है।

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