Haryana IDFC Bank Fraud: हरियाणा में 590 करोड़ रुपए के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी की चल रही जांच से पता चला है कि हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के एक अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) ने कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों और गिरफ्तार किए गए पूर्व बैंक कर्मियों के बीच बिचौलिए का काम किया।
बिचौलिए की अहम भूमिका भी निभाई
जांच में सामने आया है कि उसने न केवल ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ से सीधे धनराशि प्राप्त की, बल्कि कथित रूप से बिचौलिए की अहम भूमिका भी निभाई। एजेंसी का दावा है कि उसने सरकारी खातों से निकाली गई रकम को आगे पहुंचाने में सक्रिय सहयोग किया। आरोपी अधीक्षक नरेश भवानी को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था।
अदालत आरोपी को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए लोगों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि और अभय कुमार शामिल हैं। अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उनके भाई अभिषेक सिंगला भी पुलिस रिमांड पर हैं।
300 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए
जांच से पता चला है कि स्वाति और अभिषेक की कंपनी ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ के खातों में लगभग 300 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने दावा किया कि नरेश भवानी ने सरकारी कर्मचारियों और मामले के सह-आरोपियों के बीच बिचौलिए का रोल निभाया और ऋषि व अभय के लगातार संपर्क में रहा।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि भवानी और दूसरों ने ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स फर्म’ बनाई। उसने 13 नवंबर 2025 से 27 नवंबर 2025 तक 14 दिनों के अंदर फर्म के बैंक खातों से गैर-कानूनी तरीके से 1.25 करोड़ रुपए लिए। इसमें से दस लाख रुपए उसकी बेटी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए, जबकि 25 लाख रुपए कथित तौर पर कार खरीदने के लिए लिए गए।
एजेंसी ने कहा कि रिमांड पर आरोपी से अपराध से कमाए गए पैसे से खरीदी गई अचल संपत्ति की जानकारी ली जाएगी और संबंधित रिकॉर्ड इकट्ठा किया जाएगा।
