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आइसीजे में राजनयिक कवायद में भारी पड़ा भारत

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत ने साबित कर दिया कि कैसे पाकिस्तान एक गैर जवाबदेह राज्य रहा है और उसकी सैन्य अदालतें अंतरराष्ट्रीय संधियों व प्रतिबद्धताओं को तोड़ती रही हैं। पाकिस्तान ने राजनयिक संबंधों को लेकर वियेना सम्मेलन पर दस्तखत किए हैं, फिर भी उन्हीं नियमों को अमान्य कर दिया।

नीदरलैंड के द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने बुधवार को भारत की याचिका में उठाए गए अधिकांश मुद्दों को सही ठहराया और इस मामले में पाकिस्तान को लताड़ भी लगाई है।

भारतीय नागरिक सरबजीत के मामले की खामियों से सबक लेकर भारतीय अधिकारियों ने कुलभूषण जाधव के मामले में फूंक-फूंककर कदम उठाया। अंतरराष्ट्रीय अदालत में वियेना सम्मेलन का तर्क प्रभावशाली ढंग से रखना भारत के पक्ष में गया और नौसेना के पूर्व कमांडर जाधव के मामले में बुधवार को बड़ी राहत मिली। नीदरलैंड के द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने बुधवार को भारत की याचिका में उठाए गए अधिकांश मुद्दों को सही ठहराया और इस मामले में पाकिस्तान को लताड़ भी लगाई है। पूर्व राजनयिक केपी फाबियान ने ‘जनसत्ता’ से कहा, ‘पाकिस्तान की जेल में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में भारत की जबरदस्त राजनयिक जीत और पाकिस्तान की उतनी ही बड़ी हार हुई है।’

दरअसल, इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले जाना और वहां लगातार इसपर फॉलोअप करना भारत के पक्ष में गया।’ अदालत ने माना कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को उनके अधिकारों से अवगत नहीं कराया और ऐसा कर उसने वियेना सम्मेलन के प्रावधानों का उल्लंघन किया। द हेग में बुधवार को दस्तावेजों के साथ विदेश मंत्रालय की पूरी टीम वहां भेजी गई थी। नीदरलैंड के राजदूत वेणु राजामणि और विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव दीपक मित्तल वहां डेरा डाले हुए थे। इस हफ्ते की शुरुआत में ही तैयारियों के लिए संयुक्त सचिव मित्तल को भेज दिया गया था। भारत की ओर से पेश किए गए तर्क और दस्तावेज अकाट्स रहे। फाबियान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत ने साबित कर दिया कि कैसे पाकिस्तान एक गैर जवाबदेह राज्य रहा है और उसकी सैन्य अदालतें अंतरराष्ट्रीय संधियों व प्रतिबद्धताओं को तोड़ती रही हैं। पाकिस्तान ने राजनयिक संबंधों को लेकर वियेना सम्मेलन पर दस्तखत किए हैं, फिर भी उन्हीं नियमों को अमान्य कर दिया।

भारत ने वहां साबित किया कि कैसे पाकिस्तान की सैन्य अदालतें अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की आंखों में धूल झोंकने की कवायद मात्र है। पाक में सैन्य अदालतों की स्थापना 2015 के बाद की गई। इसका एकमात्र मकसद मुकदमों में सेना के दखल सुनिश्चित करना था। पाक की सैन्य अदालतों ने अप्रैल 2017 के बाद से मृत्युदंड की कई सजाएं दीं। भारत ने अदालत को बताया कि कैसे पाकिस्तान ने जाधव को अगवा कर पहले जबरन बयान दिलवाया और फिर इसके आधार पर उन्हें फांसी की सजा सुना दी। उन्हें कानूनी सहायता तक मुहैया नहीं कराने दी गई, जो कि वियना संधि का सीधे-सीधे उल्लंघन है।

जाधव के बाकी पेज 8 पर मामले में पाकिस्तान ने सिर्फ राजनयिक पहुंच से संबंधित तमाम नीतियों को ही धता नहीं बताया, बल्कि मानवाधिकार के सामान्य सिद्धांतों की भी थोड़ी भी परवाह नहीं की। नागरिक व राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध (आइसीसीपीआर) में उचित प्रक्रिया का विस्तृत जिक्र है। इस उचित प्रक्रिया का एक प्रमुख अवयव है- आपराधिक आरोपों के खिलाफ प्रभावी दलील रखने का अधिकार। साथ ही, साफ-सुथरी व निष्पक्ष सुनवाई के लिए आरोपी को अपने पसंद का वकील रखने का अधिकार। आइसीसीपीआर की धारा 14 के जरिए न्यूनतम मानदंड के संदर्भ में उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसका पालन करने के लिए ही धारा 36 के तहत राजनयिक पहुंच का प्रावधान किया गया है।

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