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आइबीएलएस के कर्मियों की भूख हड़ताल आठवें दिन भी जारी

इंस्टीट्यूट आॅफ लीवर एंड बिलियरी साइंस (आइबीएलएस) के कर्मचारियों को धरना और भूख हड़ताल जारी है। कर्मचारियों के धरने को 18 और भूख हड़ताल को आठ दिन पूरे हो गए हैं।

इंस्टीट्यूट आॅफ लीवर एंड बिलियरी साइंस (आइबीएलएस) के कर्मचारियों को धरना और भूख हड़ताल जारी है। कर्मचारियों के धरने को 18 और भूख हड़ताल को आठ दिन पूरे हो गए हैं। दरअसल, ये कर्मचारी अपने कुछ साथियों को बिना वजह नौकरी से निकालने का विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इन कर्मचारियों को बिना शर्त नौकरी पर बहाल किया जाए और उन्हें तरह-तरह से परेशान करना तुरंत बंद किया जाए। कर्मचारियों की गुरुवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया कि यदि आइबीएलएस प्रशासन उनकी मांगें नहीं मानता है तो 24 जून को कैंडल मार्च और 27 मार्च को पूर्ण हड़ताल की जाएगी।

कर्मचारियों के मुताबिक आइबीएसएल प्रशासन अपने कर्मचारियों के साथ खराब से खराब व्यवहार करता है। एक कर्मचारी ने बताया कि एक नर्स को एक बार अचानक अपने बच्चे की तबीयत खराब होने की सूचना मिली तो वह भाग कर घर जाने की बजाय इमरजंसी में छुट्टी लेने की प्रक्रिया पूरी करने में लग गई, क्योंकि वह किए बिना जाने पर नौकरी से हाथ धोना पड़ता। लेकिन छुट्टी लेने की प्रक्रिया में इतना समय लगा कि वह जब तक घर पहुंची उसके बच्चे ने दम तोड़ दिया।

वहीं, केरल की मूल निवासी एक नर्स जो कि गर्भवती थी, उनको समय से छुट्टी नहीं मिली। उनके साथियों ने बताया कि गर्भवती होने के बाद भी उसको कठीन ड्यूटी और नाइट ड्यूटी भी लगाई जाती थी। कर्मचारियों का आरोप है कि अधिक काम के दबाव व छुट्टी मिलने में देरी का नतीजा यह रहा कि वे जब अपने घर (केरल) जा रही थीं तो रास्ते में ही उनको प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और ट्रेन में बच्चे का जन्म हो जाने का खतरा पैदा हो गया। किसी तरह से रेलवे की मदद से अांध्र प्रदेश में उतारकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब जाकर बच्चे व मां का जीवन बचा। एक अन्य नर्स जेना जोसेफ को भी बार-बार मेमो पकड़ा दिया गया। जेना ने कहा कि उनके उत्पीड़न की लंबी दास्तान है। उनको निकालने की कई कोशिशें हुर्इं, ठेके का नवीनीक रण नहीं हो रहा था।

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