हरियाणा के 504 करोड़ रुपए के बहुचर्चित बैंक घोटालों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) मंगलवार को जांच की सबसे अहम कड़ी तक पहुंच गई। सीबीआइ ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के तत्कालीन सदस्य सचिव एवं आइएएस अधिकारी प्रदीप कुमार गिरफ्तार कर लिया। आइएएस प्रदीप कुमार मंगलवार को ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। इस घोटाले में सीबीआइ ने दो बैंक अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया है।

सीबीआइ का आरोप है कि प्रदीप कुमार की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 169 करोड़ रुपए के सरकारी धन को इधर-उधर करने में सीधी भूमिका सामने आई है। यह पूरे 504 करोड़ के घोटाले में किसी एक सरकारी विभाग को हुआ सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी अब प्रदीप कुमार से पूरे वित्तीय नेटवर्क, निर्णय प्रक्रिया और धन के अंतिम लाभार्थियों के बारे में पूछताछ करेगी। जांच के दौरान उन्हें सरकारी गवाह बनाए जाने की संभावना पर भी चर्चा है। हालांकि इस पर सीबीआइ की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सीबीआइ के अनुसार, प्रदीप कुमार सदस्य सचिव रहते हुए बोर्ड के निवेश और सावधि जमा (एफडी) से जुड़े सभी निर्णय स्वयं देख रहे थे। जांच में सामने आया कि बोर्ड की राशि निर्धारित सीमा से कहीं अधिक आइडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा में भेजी गई। एफडी बनाने के नाम पर पहले एक अलग बैंक खाते में पैसा भेजा गया, लेकिन विभाग उस खाते के खुलने से संबंधित कोई स्वीकृति या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा सका।

हरियाणा सरकार को लगभग 169 करोड़ रुपए का नुकसान

जिस खाते में सरकारी धन भेजा गया, उसमें कोई एफडी बनाई ही नहीं गई। इसके बजाय उसी खाते से फर्जी ‘डेबिट ट्रांजेक्शन’ कर राशि निकाल ली गई, जिससे हरियाणा सरकार को लगभग 169 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

सीबीआइ का कहना है कि प्रदीप कुमार काफी समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद वे पूछताछ में शामिल नहीं हुए। इसके बाद एजेंसी ने उनकी लोकेशन ट्रेस कर मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।

यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक सीबीआइ इस मामले में हरियाणा के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल, तत्कालीन वित्त विभाग के अधिकारी आरके सिंह, हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आइएफएस अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव, कई बैंक अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

मंगलवार को ही एजेंसी ने आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन ‘एरिया हेड’ शमीम डार और एयू स्माल फाइनेंस बैंक मोहाली के तत्कालीन शाखा प्रबंधक चरणजीत सिंह रंधावा को भी गिरफ्तार किया।

सीबीआइ के अनुसार, हरियाणा सरकार के आठ विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपए फर्जी अथवा अस्तित्वहीन सावधि जमा, फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन और फर्जी कंपनियों के जरिए इधर-उधर किए गए। यह मामला राज्य सरकार के अनुरोध पर हरियाणा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से सीबीआइ को सौंपा गया था।

अब तक एजेंसी 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इनमें छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन लोकसेवक, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और क्रेस्ट से जुड़े समान प्रकृति के मामलों में भी आरोपपत्र दाखिल की जा चुकी है।

सीबीआइ का आरोप है कि प्रदीप कुमार की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 169 करोड़ रुपए के सरकारी धन को इधर-उधर करने में सीधी भूमिका सामने आई है। यह पूरे 504 करोड़ के घोटाले में किसी एक सरकारी विभाग को हुआ सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान माना जा रहा है।

इस घोटाले में सीबीआइ ने दो बैंक अधिकारियों – आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन ‘क्षेत्रीय प्रमुख’ शमीम डार और एयू स्माल फाइनेंस बैंक मोहाली के तत्कालीन शाखा प्रबंधक चरणजीत सिंह रंधावा – को भी गिरफ्तार किया।

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भरत भूषण तिवारी मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका दायर करने वाले वकील से कहा कि वो हाई कोर्ट जा सकते हैं। 28 साल के भरत भूषण तिवारी की 17 जून 2026 को कथित तौर पर पुलिस द्वारा एनकाउंटर कर दिया गया था। इस मामले से जुड़ी इस याचिका में एनकाउंंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन करने की मांग की गई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक