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घूसखोरी में गिरफ्तार आइएएस निलंबित

दिल्ली की एक अदालत ने 2.2 लाख रुपए की रिश्वत कथित रूप से स्वीकार करने के मामले में गिरफ्तार आइएएस अधिकारी संजय प्रताप सिंह और उनके निजी सहायक रमेश कुमार को एक दिन की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) की हिरासत में भेज दिया..

Author नई दिल्ली | December 10, 2015 12:35 AM
घुसखोरी में गिरफ्तार आइएएस अधिकारी संजय प्रताप सिंह। (फाइल फोटो)

दिल्ली की एक अदालत ने 2.2 लाख रुपए की रिश्वत कथित रूप से स्वीकार करने के मामले में गिरफ्तार आइएएस अधिकारी संजय प्रताप सिंह और उनके निजी सहायक रमेश कुमार को एक दिन की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) की हिरासत में भेज दिया। 1984 बैच के एजीएमयूटी काडर के अधिकारी सिंह और उनके निजी सहायक रमेश कुमार को विशेष सीबीआइ जज अंजू बजाज चंदना के सामने पेश किया गया। सीबीआइ ने दोनों आरोपियों की सात दिन की पुलिस हिरासत मांगते हुए कहा कि अन्य लोगों के इस मामले से जुड़े होने के बारे में पता लगाने के लिए उनसे पूछताछ की जानी है।

इस बीच अनूसुचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात रहे सिंह को दिल्ली सरकार ने निलंबित कर दिया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार कर रहे किसी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। शिकायतकर्ता के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में संपर्क किए जाने के बाद एससी, एसटी और अल्पसंख्यक विभाग के प्रधान सचिव सिंह और उनके निजी सहायक को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया है।

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दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, सरकार ने एजीएमयूटी काडर के 1984 बैच के आइएएस अधिकारी संजय प्रताप सिंह को निलंबित कर उनकी सेवा गृह मंत्रालय को सौंपते हुए कहा कि हमें अब सिंह की सेवा नहीं चाहिए। इससे पहले बुधवार को खचाखच भरी अदालत में एजंसी ने कहा कि उनके घर और दफ्तर पर छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों से उनका सामना कराया जाना है। एजंसी ने कहा कि पुलिस हिरासत के दौरान सिंह के बैंक लाकरों की भी जांच की जाएगी। छानबीन के दौरान जब्त संपत्ति कागजात के संबंध में भी पूछताछ की जानी है।

जांच अधिकारी ने अदालत से कहा कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से 2.2 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की और सिंह ने निर्देश दिया कि धन उनके निजी सहायक को दिया जाए। सीबीआइ का आरोप है कि 2.2 लाख रुपए में से सिंह के निजी सहायक को 20 हजार रुपए मिले। हालांकि आरोपियों की ओर से पेश वकील ने सीबीआइ के पुलिस हिरासत के अनुरोध का विरोध किया। कहा कि एजंसी ने कथित आपत्तिजनक दस्तावेज पहले ही हासिल कर लिए हैं और हिरासत में पूछताछ की अब कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आरोपी जांच में सहयोग कर रहे हैं। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि कथित रिश्वत की राशि जब्त की जा चुकी है।

सुनवाई के दौरान, अदालत ने सीबीआइ से कहा कि सात दिन की पुलिस हिरासत मांगना न्यायोचित नहीं है। इन परिस्थितियों में दोनों आरोपियों को एक दिन की सीबीआइ हिरासत में भेजा जाता है। दोनों आरोपियों को 10 दिसंबर को अदालत में पेश किया जाए। सीबीआइ के मुताबिक, सिंह ने लंबित बिलों को मंजूर करने के लिए सुरक्षा गार्डों की व्यवस्था करने वाली एक फर्म के मालिक से 2.2 लाख रुपए की रिश्वत कथित रूप से मांगी थी। शिकायतकर्ता की ओर से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय से गुहार लगाने के बाद मंगलवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय से संपर्क किया था। इसके बाद ही दोनों आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने ही इस अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए शिकायतकर्ता को निर्देशित किया था। फिर उसने एसपी सिंह को सीबीआइ के हाथों गिरफ्तार करा दिया।

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