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राजस्थान: खनिज घूसकांड के आरोपी निलंबित आइएएस को जमानत मिली

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस घूस कांड में खान विभाग के प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी के साथ ही अतिरिक्त निदेशक पुष्कर राज आमेटा, इंजीनियर पंकज गहलोत और दलाल संजय सेठी को भी गिरफ्तार किया था।

राजस्थान उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

राजस्थान के सबसे बड़े घूसकांड के मुख्य आरोपी निलंबित आइएएस अफसर अशोक सिंघवी समेत अन्य आरोपियों को भी हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। सिंघवी इस मामले में सात महीने से जेल में बंद हैं। इन सभी आरोपियों को ढाई करोड़ रुपए की रिश्वत के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पिछले साल 16 सितंबर को गिरफ्तार किया था।

राज्य की नौकरशाही समेत सत्ताधारी भाजपा को हिला देने वाले घूसकांड के आरोपियों को गुरुवार को राजस्थान हाई कोर्ट से राहत मिल गई। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस घूस कांड में खान विभाग के प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी के साथ ही अतिरिक्त निदेशक पुष्कर राज आमेटा, इंजीनियर पंकज गहलोत और दलाल संजय सेठी को भी गिरफ्तार किया था। इन सभी को गुरुवार को हाईकोर्ट की जज निर्मलजीत कौर की अदालत से जमानत दे दी गई। इस मामले के दो अन्य आरोपियों शेर खान और धीरेंद्र सिंह को हाई कोर्ट से पहले ही जमानत मिल गई थी। इनमें से शेर खान का निधन हो गया है।

जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने कहा कि इस मामले की जांच पूरी हो गई है। वकीलों का कहना था कि आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है। ब्यूरो के वकील अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने जमानत का विरोध किया और कहा कि आरोपियों से अभी और पूछताछ की जानी है। अदालत ने इस दलील को नहीं माना और आरोपियों को जमानत देने का फैसला दिया।

खान विभाग के उदयपुर निदेशालय में रिश्वतखोरी के खुले खेल का खुलासा ब्यूरो ने बड़े ही गोपनीय तरीके से किया था। इस मामले में ब्यूरो को पक्के सबूत मिले थे कि घूस की रकम आइएएस अफसर और विभाग के प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी तक जाती है। इस लेन देन में खान मालिकों के साथ ही कई बिचौलिए भी शामिल हैं। ब्यूरो ने पिछले साल 16 सितंबर को उदयपुर में घूस का लेन देन करते हुए खान इंजीनियरों के साथ ही दलालों को दबोच लिया। उनसे पूछताछ के आधार पर ही उसी दिन देर रात आइएएस सिंघवी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। घूसकांड के आरोपियों ने जबरदस्त नेटवर्क बना रखा था और प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी रिश्वत के जरिये खानों का आवंटन करवाते थे। इन सभी के फोन सर्विलांस पर रख कर ब्यूरो ने पूरी निगरानी रख धरपकड़ की थी।

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