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JNU में लहराते तिरंगे के बीच कन्हैया संग गूंजे जयहिंद के साथ आजादी के नारे

दिल्ली सरकार ने जेएनयू विवाद पर अपनी मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट कानूनी टीम को भेज दी है ताकि वह यह बता सके कि इसके आधार पर कोई कार्रवाई की जा सकती है कि नहीं। जांच में जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। सूत्रों ने बताया कि ‘आप’ सरकार ऐसे न्यूज चैनलों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने पर विचार कर रही है जिसने नौ फरवरी को जेएनयू में हुए विवादित कार्यक्रम से जुड़े फर्जी वीडियो चैनल पर दिखाए थे।

Author नई दिल्ली | March 4, 2016 11:08 AM
JNU छात्रसंघ कन्हैया कुमार की फाइल फोटो

तिहाड़ जेल से रिहाई के कुछ घंटे बाद देशद्रोह के आरोप का सामना कर रहे जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार गुरुवार देर रात जेएनयू परिसर पहुंचे। श्रोता अनुमान लगा रहे थे कि कन्हैया सबसे पहले पुलिसिया जुल्म के खिलाफ गुस्सा उतारेंगे। लेकिन कन्हैया ने कुशल नेता की तरह ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात कर सबसे पहले उन पुलिसवालों के हक में आवाज उठाई जिनके साथ उनका इन दिनों सबसे ज्यादा वास्ता पड़ा। उन्होंने दावा किया कि पुलिसवालों को भी पता नहीं था कि लाल सलाम कोई राष्टविरोधी नारा नहीं है और क्रांति को सलाम का उर्दू तर्जुमा इनकलाब जिंदाबाद तो एबीवीपी वाले भी लगाते हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग नहीं चाहते कि गरीब का बेटा जेएनयू में पीचएडी कर सके इसलिए वे इस संस्थान को बंद करने पर तुले हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे मीडिया ट्रायल के शिकार हुए हैं और लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं।

कन्हैया ने जेएनयू वालों के खास अकादमिक अंदाज पर तंज कसते हुए कहा कि वे देश के पिछड़े हुए राज्य बिहार से आते हैं और उन्होंने गरीबी देखी है, पिछड़ापन देखा है, भ्रष्टाचार, सामंतवाद और जातिवाद देखा है और इन्हीं सबसे आजादी की मांग करते हैं। उन्होंने अपने साथियों से अपील की कि इतनी भारी-भरकम भाषा में बात न करें कि देश के लोगों को उनकी बात ही समझ में नहीं आए। सोशल मीडिया पर क्रांति को ‘फारवर्ड’ करने से बात नहीं बनेगी, असली लोगों के बीच जाकर लड़ाई लड़नी होगी। इस बार कन्हैया की आजादी की मांग के बीच ऊंचा तिरंगा भी लहराया जा रहा था। कन्हैया ने कहा कि वे एबीवीपी को शत्रु नहीं मात्र विरोधी की तरह देखते हैं।

कन्हैया के जेएनयू पहुंचते ही पूरे परिसर में जश्न का दौर शुरू हो गया। कन्हैया की एक झलक पाने के लिए छात्र और शिक्षक गंगा ढाबा पर बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने गंगा ढाबा से प्रशासनिक खंड तक एक विजय मार्च भी निकाला। ढोल और डफलियों के साथ कुछ लोग ब्रह्मपुत्र छात्रावास के बाहर भी खड़े थे ताकि कन्हैया के साथ वे मार्च में हिस्सा ले सकें। कन्हैया ब्रह्मपुत्र छात्रावास में ही रहते हैं।
इस बीच, भविष्य के कदम पर फैसला करने के लिए छात्र संघ और जेएनयू शिक्षक संघ की दो अलग-अलग बैठकें भी हुर्इं। मार्च के बाद कन्हैया ने सभा को संबोधित किया और बताया कि उनकी पढ़ाई और लड़ाई दोनों देश के लिए है। कन्हैया ने कहा कि वे मीडिया ट्रायल के शिकार हुए है। उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी कहानी खुद लिखूंगा। इसकी शुरुआत मैंने जेल में ही कर दी है। मैंने कभी भी भारत के खिलाफ कुछ नहीं बोला। मुझे भरोसा है कि सच कायम रहेगा। सही बातें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। मैं लंबी लड़ाई के लिए तैयार हूं। कन्हैया ने कहा, प्रधानमंत्री ने कहा था, सत्यमेव जयते। यह संविधान का शब्द है, इसलिए मैं भी कहता हूं सत्यमेव जयते।

बहरहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि उच्च-स्तरीय समिति ने अब तक अपनी रिपोर्ट उसे नहीं सौंपी है। जेएनयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘पांच सदस्यीय समिति को गुरुवार को 12 बजे तक रिपोर्ट सौंपनी थी। समिति की सिफारिशों पर जेएनयू प्रशासन फैसला करेगा’। इससे पहले, कन्हैया को जब तिहाड़ से रिहा किया जा रहा था तो सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कन्हैया को गुरुवार शाम 6:30 बजे रिहा किया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस के पश्चिम जिला के अधिकारियों की एक टीम ने उन्हें एक खास जगह तक एस्कॉर्ट किया। दक्षिण जिला पुलिस की टीम उन्हें जेएनयू परिसर तक लेकर गई। पुलिस ने जेएनयू परिसर के बाहर भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे।

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