Delhi News: तीनों गेट बंद थे। हर गेट पर दो गार्ड तैनात थे। कुछ सौ मीटर दूर एक पुलिस वैन खड़ी थी। लेकिन इन सब बातों का कोई असर नहीं हुआ। 24 सितंबर की रात 10:30 बजे, तीन लोग हौज खास में डीडीए के पार्क के एक स्टील गेट पर पहुंचे, जो रात 8 बजे से ही बंद था। वे कुछ ही सेकंड में गेट फांदकर अंदर चले गए और तेजी से दौड़ते हुए अंधेरे में गायब हो गए।
वे लगभग 100 मीटर ही दौड़ पाए थे कि दो गार्डों ने उनमें से एक को रोक लिया। गार्डों में से एक, गुड्डू ने पूछा, “आप पार्क में कैसे आए? आप कौन हैं?” घुंघराले बालों और दुबले-पतले शरीर वाले उन आदमियों में से एक ने जवाब दिया, “हम बलजीत के दोस्त हैं। हम उससे मिलने आए हैं।”
मामूली बातचीत के बाद जब वे लोग चले जाते हैं, तो गार्ड तुरंत पार्क के कर्मचारी बलजीत को बुलाते हैं। वह उन्हें पहचानने से साफ इनकार कर देता है। गुड्डू अपने साथियों को बुलाता है और वे उनका पीछा करते हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं होता। गुड्डू की आवाज में बेबसी झलकती है। वह पिछले पांच सालों से पार्क में रात की शिफ्ट में काम कर रहा है। उसने कहा, “यह हर रात होता है। अगर अब कुछ हुआ तो सारा दोष हम पर आ जाएगा। वे किसी कोने में छिपकर गांजा पिएंगे और फिर चले जाएंगे।”
हमारे पास पूरे पार्क की रखवाली के लिए सिर्फ एक लाठी- गुड्डू
गुड्डू ने कहा, “हमारे पास पूरे पार्क की रखवाली के लिए सिर्फ एक लाठी है। अगर वे चाकू निकाल लें तो हम क्या करेंगे।” 149 एकड़ में फैले इस पार्क में लगभग हर 50 से 100 मीटर पर स्ट्रीट लैंप लगे हैं। गार्डों का कहना है कि पिछले एक साल में पार्क में गश्त बढ़ा दी गई है। इसका कारण यह है कि पिछले साल पार्क के अंदर एक लड़के का शव पेड़ से लटका हुआ मिला था। लेकिन घने पेड़ों और झाड़ियों के कारण कुछ कोने अंधेरे भी हैं। गार्डों का कहना है कि पार्कों के आसपास रात में गश्त करना हाल ही में जरूरी हो गया है, जब दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में तीन लोगों ने एक 17 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था।
आसपास एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं- गार्ड
फिर भी, सुरक्षा में एक बड़ी खामी बनी हुई है। रोशनी की व्यवस्था होने के बावजूद, पार्क में आने वाले लोग शिकायत करते हैं कि संदिग्ध गतिविधियों या अवैध गतिविधियों को पकड़ने के लिए आसपास सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। गार्ड ने चिंता जाहिर करते हुए कहा, “पार्क में ज्यादातर छात्र आते हैं, जिनमें स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। वे असुरक्षित हैं। अगर पार्क के अंदर उनके साथ कुछ हो जाता है, तो किसे पता चलेगा? आसपास एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं है।”
श्रद्धा वालकर की हत्या की खबर सुर्खियों में आने के बाद पार्क में रोशनी की व्यवस्था की गई थी। सालों बाद भी यहां न तो कोई सुरक्षाकर्मी हैं और न ही सीसीटीवी कैमरे और पार्क में आने वाले लोगों का कहना है कि रात में इसे सुरक्षित बनाने के लिए कुछ खास कदम नहीं उठाए गए हैं।
दक्षिण दिल्ली में इग्नू के पास एक झील के चारों ओर बना मैदानगढ़ी वन पार्क, जंगली कीकरों के बीच से होकर गुजरने वाले एक अंधेरे, कच्चे रास्ते से पहुंचा जा सकता है। पार्क के अंदर अच्छी रोशनी रहती है।
पार्क में मौजूद इकलौती महिला, एक अधेड़ उम्र की महिला, इसकी वजह बताती है। 2022 के वालकर मामले के बाद झील के चारों ओर तटबंध बनाया गया और रोशनी लगाई गई। वालकर मामले में वालकर की कथित तौर पर उसके लिव-इन पार्टनर ने हत्या कर दी थी, जिस पर उसके शरीर के अंगों को जंगल में ठिकाने लगाने का आरोप है।
लेकिन रोशनी से असल सुरक्षा नहीं मिली है। पार्क में आने वाले लोगों का कहना है कि कुछ ही मीटर दूर स्थित पुलिस चौकी भी परेशानी को रोकने में नाकाम रहती है। 26 सितंबर को रात करीब 9 बजे, नेब सराय के रहने वाले 25 साल के शिवांक कई महीनों बाद टहलने के लिए पार्क लौटे। पार्क में पहुंचते ही उन्होंने देखा कि कुछ लोग अंधेरे वाले हिस्से में ड्रग्स ले रहे थे। वह पास की पुलिस चौकी गए और अधिकारियों से दखल देने को कहा।
बेंचों पर शराबी बैठे रहते हैं- शिवांश
उन्होंने कहा, “वहां एक बेंच पर कुछ लोग बैठे थे और मैंने पुलिस से उन्हें वहां से हटाने के लिए कहा।” पार्क के बगल में घोड़ों का अस्तबल चलाने वाले विशाल ने कहा कि उन्हें इस तरह के दृश्यों की आदत हो गई है। उन्होंने कहा, “यहां कोई सुरक्षाकर्मी नहीं है। मैं रात में आने वाले कपल को चेतावनी देता हूं कि वे ज्यादा देर तक न रुकें। वहां बेंचों पर शराबी बैठे रहते हैं।”
सुरक्षा की चिंताएं सिर्फ पार्क तक ही सीमित नहीं हैं। पार्क के गेट तक जाने वाली सड़क पर, मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति ने फोन छीनने की घटनाओं के बारे में चेतावनी दी। उसने कहा, “इस रास्ते पर मत जाइए। यह सुरक्षित नहीं है। दूसरा रास्ता लीजिए।” निरंजन नाम के एक मजदूर ने बताया, “मेरा फोन यहीं छीना गया था। वह मुझे कभी वापस नहीं मिला।” निरंजन इस इलाके में दस साल से ज्यादा समय से रह रहे हैं।
बिना गार्ड और कैमरे वाला पार्क
कोई गार्ड नहीं। कोई कैमरा नहीं। बस किशोर, फोन और अंधेरा। रात के करीब 9 बजे, साकेत में मैक्स हॉस्पिटल के पास मौजूद ईदगाह हौज रानी पार्क में कोई गार्ड नजर नहीं आता, जबकि कम उम्र के बच्चे देर शाम तक पार्क का इस्तेमाल करते रहते हैं।
गुरुवार की रात, स्कूल के आठ स्टूडेंट्स का एक ग्रुप पांच लड़के और तीन लड़कियां कम रोशनी वाले एक कोने में जमा होकर अपने फोन पर पबजी के गेम में डूबे हुए थे। आस-पास निगरानी करने वाला कोई नहीं था, इसलिए कम उम्र के बच्चे बेझिझक एक-दूसरे को सिगरेट पास कर रहे थे और अंधेरे में धुआं फैल रहा था। पार्क में कुछ ही स्ट्रीट लैंप जल रहे थे और इसके इकलौते एंट्री गेट पर कोई सीसीटीवी कैमरा या गार्ड नहीं था।
वहां सिर्फ एक कैमरा दिख रहा था जो पास की प्रेस एन्क्लेव कॉलोनी की एक बिल्डिंग पर लगा था। ऐसा लग रहा था कि वह कैमरा सिर्फ पार्क के सबसे दूर वाले कोने को कवर कर रहा था, जिससे पार्क का ज्यादातर हिस्सा उसकी नजर से बाहर था। 17 साल का एक लड़का कहता है, “हम सालों से यहां आ रहे हैं। हम दोस्तों के साथ आते हैं, इसलिए मेरे लिए यह सुरक्षित है। लेकिन मैंने यहां कभी कोई पुलिस या गार्ड नहीं देखा।”
गेट पर गार्ड, आगे अंधेरा
शहर के दूसरी तरफ, दिल्ली यूनिवर्सिटी का नॉर्थ कैंपस है। यहां पर हंसराज, रामजस और हिंदू जैसे कॉलेज हैं। गार्ड नरेंद्र ने बताया कि बड़े से बोंटा पार्क के सातों गेट शाम 7 बजे तक बंद कर दिए जाते हैं। हर एंट्री पॉइंट पर एक गार्ड तैनात होता है और गेट के सीसीटीवी फुटेज एक कामचलाऊ कमरे में चार स्क्रीन पर दिखाई देते हैं, जो गार्ड स्टेशन का भी काम करता है। लेकिन पार्क के अंदर कोई कैमरा नहीं लगा है।
उन्होंने कहा, “गेट बंद होने के बाद भी, यूनिवर्सिटी के छात्र कभी-कभी दीवार फांदकर अंदर आ जाते हैं और रात 1 बजे तक वहीं रहते हैं।” हालांकि, हाल के दिनों में रात के समय पार्क में शांति रहने लगी है। नरेंद्र ने कहा, “अब कम छात्र अंदर आते हैं, खासकर लड़कियां।” आस्था कुंज में हुई दुष्कर्म की घटना ने इलाके में बेचैनी पैदा कर दी है।
नरेंद्र ने कहा, “आस्था कुंज की घटना हर जगह चर्चा में है। हमने गश्त भी बढ़ा दी है। अगर मुझे गेट के पास कोई छात्र दिखता है, तो मैं उन्हें चेतावनी देता हूं कि मैं पुलिस को बुला लूंगा।” बात करते-करते, तीन लड़के बाइक से पार्क से गुजरे, जोर-जोर से शोर मचाने की उनकी आवाज पूरे मैदान में गूंज रही थी।
नॉर्थ कैंपस के आस-पास के पार्कों में अकेले जाना बंद कर दिया-अरण्य राठौर
कुछ छात्रों के लिए, यह बेचैनी बोंटा पार्क से कहीं ज्यादा है। पंजाबी बाग के श्यामा प्रसाद कॉलेज में बीएड की छात्रा अरण्य राठौर ने बताया कि उन्होंने नॉर्थ कैंपस के आस-पास के पार्कों में अकेले जाना बंद कर दिया है। राठौर ‘दिशा फाउंडेशन’ के साथ काम करती हैं और अक्सर यूनिवर्सिटी के पास विजय नगर इलाके से गुजरती हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि दोस्तों के ग्रुप के साथ होने के अलावा, वे पार्कों में जाने से बचने लगी हैं।
उन्होंने कहा, “मैं दिशा फाउंडेशन के साथ काम करती हूं, इसलिए नॉर्थ कैंपस के पास विजय नगर इलाके में मेरा आना-जाना लगा रहता है। लेकिन अब मैंने दोस्तों के ग्रुप के साथ होने के अलावा इन पार्कों में जाना बंद कर दिया है। ज्यादातर पार्कों में रोशनी की कमी है।”
हालांकि, चिंताएं सिर्फ खराब रोशनी और देर रात तक पार्क में आने-जाने तक ही सीमित नहीं हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिस्ट्री डिपार्टमेंट की मास्टर स्टूडेंट दीपा ने नॉर्थ कैंपस के पास एक पार्क में दिन-दहाड़े हुई एक घटना के बारे में बताया। उन्होंने आरोप लगाया, “ज्यादातर पार्कों में लाइट ठीक नहीं है। हकीकत पार्क में दो स्टूडेंट्स के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था। यहां छेड़छाड़ आम बात है।” उन्होंने बताया कि वे दोपहर करीब 3 या 4 बजे लगभग 20-25 महिलाओं के ग्रुप के साथ पार्क गई थीं। तब भी, एक आदमी उनके पास आया और टिप्पणी करने लगा।
ये चिंताएं उन सार्वजनिक पार्कों और खुली जगहों तक भी फैली हुई हैं जो उन आवासीय आवासों के आसपास स्थित हैं जहां कई महिलाएं रहती हैं। नॉर्थ कैंपस के मिरांडा हाउस कॉलेज की एक छात्रा ने कहा, “मैं मुखर्जी नगर इलाके में रहती हूं। यहां स्ट्रीट लाइट हैं और कभी-कभी पीसीआर वैन भी दिखती हैं। लेकिन फिर भी यहां कई ऐसी जगहें हैं जहां अंधेरा रहता है। इतनी भीड़-भाड़ वाली जगह पर भी कुछ रास्तों से गुजरना बहुत असुरक्षित लगता है।”
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दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग बच्ची के साथ हुई शर्मनाक घटना के बाद दिल्ली पुलिस एक्शन मोड में है। पुलिस ने राजधानी के प्रमुख पार्कों और हरित क्षेत्रों का जमीनी स्तर पर सुरक्षा ऑडिट किया है। इस ऑडिट में पाया गया कि दिल्ली के कई बड़े और लोकप्रिय पार्कों में सीसीटीवी कैमरों की भारी कमी है, लाइटें खराब हैं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
