बिहार के भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दलों के साथ सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने इस घटना पर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता अश्विनी चौबे का कहना है कि यह सीधा-सीधा मर्डर है। हालांकि, राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी का कहना है कि उन्हें सम्राट चौधरी पर भरोसा नहीं है।
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे एसपी पर भरोसा नहीं है। मुठभेड़ का आदेश उन्होंने ही दिया था। डीएम ने एसपी को आदेश दिया और फिर यह घटना घटी।”
उन्होंने कहा कि मुझे न्याय चाहिए। न्याय के लिए लिए हम हाई कोर्ट और यहां तक की दिल्ली भी जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह अभी तक की जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
आशा देवी ने आगे कहा कि मुझे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भरोसा नहीं है। मामले की जांच सीबीआई से होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनके दूसरे बेटे चंदन तिवारी को धमकाया गया, एसपी उसे एक कोने में ले गए और मीडिया से बात न करने को कहा। अगर ऐसा वह करता है को उसे भी भरत की तरह मार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसपी का तबादला होना चाहिए।
इस मामले की जांच का नेतृत्व कर रहे पटना हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा शुक्रवार को भरत तिवारी के घर पहुंचे। इस दौरान सिन्हा ने तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और माता आशा देवी से मुलाकात की और उनके बयान दर्ज किए।
भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, मां ने जस्टिस सिन्हा को बताया कि भरत भूषण तिवारी अपना हथियार फेंकने के बाद पुलिस के साथ जाने के लिए तैयार थे। तिवारी की मां ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके बेटे को पकड़कर एक गड्ढे में फेंक दिया और घटनास्थल पर मौजूद एसडीपीओ के आदेश पर उसे पांच गोलियां मारीं। माता-पिता के बयान दर्ज करने के बाद जस्टिस सिन्हा और उनकी टीम ने जिस जगह पर यह घटना हुई, उसका दौरा किया।
17 जून को क्या हुआ था?
भरत को 17 जून की सुबह पुलिस ने गोली मार दी थी और उसी शाम पटना के अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद स्थानीय लोग नाराज हो गए और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने लगे। लोगों का विरोध बढ़ता देख राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए और एक सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर (एसडीपोओ), एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले में न्यायिक आयोग जांच कर रहा है। पटना हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा इस जांच आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।
