दादर के स्वामीनारायण मंदिर के पास आम तौर पर टैक्सियों की चहल-पहल रहती थी लेकिन गुरुवार को ऐसा नहीं था। आरटीओ अधिकारियों ने सड़क के किनारे ही ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों का मराठी भाषा से जुड़ा टेस्ट लेना शुरू कर दिया।
आरटीओ के अधिकारियों ने ऑटो और टैक्सी चलाने वालों से रोजमर्रा के काम से जुड़ी बातें- जैसे जहां लोगों को जाना है उसके बारे में, किराया, सफर में लगने वाला वक्त, यूपीआई से भुगतान और रास्ते के बारे में मराठी भाषा में पूछा।
पहले दिन पूरे महाराष्ट्र में 8,217 ड्राइवरों की परीक्षा ली गई, जिनमें से 1,268 को मराठी भाषा की जरूरी जानकारी न होने पर नोटिस जारी किया गया।
इनमें मुंबई महानगर क्षेत्र में 3,995 ड्राइवरों की मराठी भाषा की जानकारी को लेकर जांच की गई और 604 को नोटिस जारी किया गया।
ऐसा क्यों किया गया?
महाराष्ट्र के परिवहन विभाग ने कहा था कि ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी भाषा का थोड़ा ज्ञान होना जरूरी है। इसकी जांच के लिए मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र में फ्लाइंग स्क्वॉड को तैनात किया गया है।
एक आरटीओ अधिकारी ने कहा, “यह प्रक्रिया बहुत आसान है। हमारे पास 15 से 16 सवालों की लिस्ट है। इन सवालों के आधार पर हम जांच कर रहे हैं कि ड्राइवर को मराठी भाषा आती है या नहीं। अगर वह जवाब नहीं दे पाता है तो हम उसे नोटिस जारी कर रहे हैं।”
आरटीओ के अधिकारियों ने कहा कि इस टेस्ट का मकसद इस बात की जांच करना नहीं है कि ड्राइवर को बहुत अच्छी मराठी आती है या नहीं। इसका मकसद यह पता लगाना है कि क्या ड्राइवर सवारी से बातचीत करते वक्त जरूरी मराठी समझ सकता है और उसका जवाब दे सकता है।
एक अधिकारी ने कहा कि हम ड्राइवर से मराठी भाषा में पूरी तरह दक्ष होने की अपेक्षा नहीं करते।
…मैं टेस्ट पास कर लूंगा
टैक्सी चालक अरविंद मौर्य मराठी भाषा सीखने की क्लास में तो शामिल हुए थे लेकिन फिर भी उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया। अरविंद मौर्य कहते हैं, “मैंने क्लास अटेंड की लेकिन मेरे अंदर मराठी भाषा बोलने के लिए जरूरी आत्मविश्वास नहीं है। अब मैं यूट्यूब पर क्लास लेकर इस भाषा को सीखूंगा। एक महीने बाद फिर से टेस्ट होगा और मुझे भरोसा है कि मैं टेस्ट पास कर लूंगा।”
एक अन्य ड्राइवर इकबाल अहमद कहते हैं कि वह अपने काम में व्यस्त थे और इस वजह से मराठी भाषा सीखने वाली क्लास अटेंड नहीं कर पाए। उन्होंने कहा, “हम सभी ड्राइवर बहुत बिजी रहते हैं। इस वजह से मैं क्लास में शामिल नहीं हो सका लेकिन अब मुझे नोटिस मिला है और मैं मराठी भाषा को सीखूंगा।”
आरटीओ के अधिकारियों के साथ हुई बहस
जब यह टेस्ट लिया जा रहा था तो एक टैक्सी चालक की आरटीओ के अधिकारियों के साथ बहस हुई। ड्राइवर का कहना था कि उसे मराठी आती है लेकिन यह टेस्ट क्यों लिया जा रहा है। उसने आरटीओ के अधिकारियों से कहा कि वह भाषा के मुद्दे में राजनीति को ला रहे हैं और इस तरह का टेस्ट लिया जाना क्यों जरूरी है?
ड्राइवरों को सिखाई गई मराठी
महाराष्ट्र की सरकार ने 1 मई से 105 दिन का ट्रेनिंग और मूल्यांकन कार्यक्रम शुरू किया था। यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के 59 आरटीओ, सब आरटीओ और लैंग्वेज ट्रेंनिंग सेंटर में चलाया गया था। कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के 4,500 से ज्यादा शिक्षकों ने ड्राइवरों को सामान्य बातचीत वाली मराठी सिखाई।
ट्रेनिंग के दौरान ड्राइवरों को यात्रियों से हर दिन होने वाली बातचीत के बारे में बताया गया।
मुंबई में लगभग 1.25 लाख ड्राइवरों ने इस ट्रेनिंग में हिस्सा लिया, इसमें 7,750 ड्राइवर मूल्यांकन में फेल हो गए और अब उन्हें फिर से टेस्ट देना होगा। जिन ड्राइवर को नोटिस दिया गया है उन्हें मराठी सीखने के लिए एक महीने का वक्त दिया गया है।
एक महीने बाद उन्हें यह दिखाना होगा कि उन्होंने मराठी भाषा सीख ली है। आरटीओ के अधिकारियों ने बताया कि अगर वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उनका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए सस्पेंड किया जा सकता है और अगर आगे भी वे नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनके ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित रखा जा सकता है।
परिवहन मंत्री ने क्या कहा?
महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक का कहना है कि पूरे राज्य भर में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को कितनी मराठी आती है, इस बात की जांच जारी रहेगी। मंत्री का कहना है कि सरकार का मकसद किसी की रोजी-रोटी को छीनना नहीं है बल्कि हम यह चाहते हैं कि ड्राइवर आम लोगों से मराठी भाषा में थोड़ा बहुत बातचीत कर सकें।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि ऐसे ड्राइवर जिन्हें मराठी नहीं आती, उन्हें मराठी भाषा सीखने के लिए एक महीने का वक्त देंगे, अगर वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो उनका बैज तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि अगर कोई मराठी सीखने से लगातार इनकार करता है तो उसका बैज और ड्राइविंग लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
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