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मां और भगवान का विकल्प है गाय- सुनवाई करते हुए बोले हैदराबाद हाईकोर्ट के जज

हैदराबाद हाईकोर्ट के जज ने कहा कि गाय देश की पवित्र संपदा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

हैदराबाद हाईकोर्ट के जज ने शुक्रवार (10 जून) को कहा कि गाय देश की पवित्र संपदा है। इतना ही नहीं उन्होंने गाय को मां और भगवान का ‘विकल्प’ तक बता दिया। यह बयान हैदराबाद हाईकोर्ट के जज बी शिव शंकर राव ने दिया। शिवशंकर ने सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर का जिक्र करते हुए कहा कि बकरीद के मौके पर मुस्लिम धर्म के लोगों को सेहतमंद गाय को काटने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। जज ने उन डॉक्टरों को आंध्रप्रदेश गौहत्या एक्ट 1977 के अंतर्गत लाने की मांग भी की जो कि धोखे से सेहतमंद गाय को अनफिट करार देकर सर्टिफिकेट देकर कह देते हैं कि वे दूध नहीं दे सकती। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उन गायों को काटने की इजाजत है जो कि बूढ़ी हो गई हैं और दूध नहीं देतीं।

दरअसल रामावथ हनुमा नाम के एक शख्स की 63 गाय और दो बैल जब्त किए गए थे। जिनको छुड़ाने की याचिका लेकर वह हाईकोर्ट पहुंचा था। वहां शिवशंकर ने हनुमा की दलील यह कहकर ठुकरा दी कि वह ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल नहीं देना चाहते। हाईकोर्ट आने से पहले वह ट्रायल कोर्ट भी गया था लेकिन वहां उसकी याचिका ठुकरा दी गई थी।

हनुमा पर आरोप है कि वह अपने कुछ साथियों के साथ पास के किसानों से उन गायों और बैलों को लेकर आया था ताकि बकरीद पर उनको काट सके। वहीं अपनी सफाई में हनुमा ने कहा कि वह उन पशुओं को वहां चराने के लिए लाया था

शिवशंकर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जिस शख्स पर गायों को हत्या के लिए लेकर जाने का आरोप हो क्या उस शख्स के पास उनको लेकर जाने का अधिकार है ? यह सवाल पूछा जाना चाहिए और गाय के राष्ट्रीय महत्व जो कि मां और भगवान का विकल्प हैं उसके लिए इसका जवाब मिलना चाहिए।

जज ने बाबर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने गौहत्या पर पाबंदी लगाई थी। जज ने कहा कि बाबर ने अपने बेटे हूमायूं को भी ऐसा ही करने को कहा था। जज ने कहा कि अकबर, जहांगीर और अहमद शाह ने भी गौहत्या पर पाबंदी रखी थी।

जज ने जानवर के साथ होने वाली क्रूरता को रोकने वाले अधिनियम, 1960 के सेक्शन 11 और 26 में बदलाव की भी बात कही। जज ने कहा कि उसके तहत सजा को बढ़ाकर पांच साल कर देना चाहिए।

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