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केदारनाथ घाटी में नरकंकाल मिलने से हड़कंप, गढ़वाल आइजी के नेतृत्व में गठित जांच टीम गई

16 जून, 2013 को केदारनाथ में भीषण प्राकृतिक आपदा के चलते सैकड़ों मारे गए थे और हजारों लोग लापता हो गए थे।
2013 में केदारनाथ में आई भीषण त्रासदी की तस्वीर।

उत्तराखंड के केदारघाटी क्षेत्र में 2013 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा में मारे गए लोगों के कंकालों का मिलने का सिलसिला अभी तक नहीं थमा है। केदारघाटी में ट्रैकिंग करने गए स्थानीय लोगों ने गुरुवार को यहां पर कई क्षेत्रों में लोगों के कंकाल देखे। इसकी सूचना इन लोगों ने रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन को दी। लोगों के कंकाल मिलने की सूचना से पूरे उत्तराखंड में हड़कंप मच गया।  मुख्यमंत्री हरीश रावत को जब केदारघाटी में लोगों के कंकाल मिलने की सूचना मिली तो पूरी सरकार में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आनन-फानन में अपने सरकारी घर बीजापुर गेस्ट हाउस में पुलिस और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के आलाधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और केदारघाटी में मिले नर कंकालों के बारे में समीक्षा की।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गढ़वाल मंडल के पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल की अगुआई में 20 सदस्यीय खोजी टीम का गठन किया जो शुक्रवार को केदारघाटी पहुंच कर नरकंकालों की खोज का काम करेगी। मुख्यमंत्री ने नरकंकालों के डीएनए टेस्ट करवा कर इनके अंतिम संस्कार सरकारी खर्चे पर करने के निर्देश दिए हैं। गढ़वाल मंडल के पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल ने जनसत्ता को बताया कि मॉन्टेनियर्स एंड ट्रेकेर एसोसिएशन (माटा) के सदस्यों ने नरकंकाल दिखने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम तक एसडीआरएफ और माटा के सदस्यों का दल त्रिजुगीनारायण पहुंच जाएगा। केदारघाटी के त्रिजुगीनारायण तथा अन्य क्षेत्रों में नर कंकाल मिलने की सूचना प्रशासन को मिली है। स्थानीय लोगों ने दो से पांच तक नरकंकाल मिलने की सूचना दी है।

उन्होंने बताया कि राज्य आपदा रिजर्व पुलिस बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय पुलिस की 20 सदस्यीय संयुक्तजांच टीम केदारघाटी में जाकर नरकंकालों की खोज करेगी। और मिलने वाले नरकंकालों की डीएनए जांच कराई जाएगी। और उनका अंतिम संस्कार यह टीम करेगी।
मालूम हो कि 16 जून, 2013 को केदारनाथ में भीषण प्राकृतिक आपदा के चलते सैकड़ों मारे गए थे और हजारों लोग लापता हो गए थे। कुछ महीने तक राज्य सरकार ने गायब हुए लोगों की खोज का काम किया। परंतु बाद में राज्य सरकार ने यह काम बंद कर दिया। अब नरकंकालों के फिर से मिलने से राज्य सरकार की आपदा नीति पर कई सवालिया निशान लग गए हैं।

 

 

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