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राहुल गांधी की रैली: कांग्रेस पर 75 लाख रुपये का बकाया, रिकवरी कर सकती है हिमाचल सरकार

7 अक्टूबर, 2017 को हिमाचल के मंडी में पड्डल मैदान पर राहुल गांधी की रैली हुई थी। इस रैली में विभिन्न चुनावी हलकों से रैली स्थल पर लोगों को लाने के लिए एचआरटीसी की बसें लगायी गईं थी। इन बसों का किराया अभी तक बकाया है।

Author Published on: March 17, 2018 1:41 PM
राहुल गांधी की पिछले साल हिमाचल में हुई रैली के दौरान एचआरटीसी की बसें लगायी गई थी, जिसक खर्च 75 लाख रुपए अभी तक बकाया है और कांग्रेस पार्टी ने इसकी अदाएगी नहीं की है। (image source-PTI)

कांग्रेस पार्टी पर हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) का 75 लाख रुपए बकाया है, जिसकी रिकवरी के लिए जल्द ही कांग्रेस को नोटिस भेजा जा सकता है। दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पिछले साल हिमाचल में हुई रैली के दौरान एचआरटीसी की बसें लगायी गई थी, जिसका खर्च 75 लाख रुपए अभी तक बकाया है और कांग्रेस पार्टी ने इसकी अदाएगी नहीं की है। अब इस मामले की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची है, जिसके बाद बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ने इसका खुलासा किया है। गौरतलब है कि हिमाचल पथ परिवहन निगम पहले ही 1000 करोड़ रुपए के भारी घाटे से गुजर रहा है।

बता दें कि 7 अक्टूबर, 2017 को हिमाचल के मंडी में पड्डल मैदान पर राहुल गांधी की रैली हुई थी। इस रैली में विभिन्न चुनावी हलकों से रैली स्थल पर लोगों को लाने के लिए एचआरटीसी की बसें लगायी गईं थी। इन बसों का किराया अभी तक बकाया है। उल्लेखनीय है कि इस रैली में कांग्रेस की अंदरुनी लड़ाई के बीच वीरभद्र सिंह को सीएम प्रत्याशी घोषित किया था। यही वजह रही कि वीरभद्र सिंह के खेमे ने इस रैली के लिए बहुत जोर लगाया और बड़ी संख्या में लोगों को रैली स्थल पर जुटाया था। इस रैली की सफलता के बाद कांग्रेस राज्य में अपनी जीत के दावे कर रही थी। लेकिन चुनाव परिणाम इसके उलट आया और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। मंडी में हुई रैली के बाद चुनाव होकर भाजपा की सरकार भी बन चुकी है, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक एचआरटीसी के 75 लाख रुपए नहीं चुकाए हैं।

जब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह बात सदन में उठायी तो कांग्रेस ने इसका विरोध किया। कांग्रेस का कहना है कि पीएम मोदी की सभी रैलियों में भाजपा के झंडे लगे होते हैं, लेकिन सरकार इन रैलियों का खर्च उठाती है। बहरहाल एचआरटीसी जल्द ही कांग्रेस को रिकवरी का नोटिस भेज सकती है, जिसके लिए राज्य सरकार से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। वहीं राज्य की भाजपा सरकार फिलहाल सभी आला अधिकारियों से इस मामले पर चर्चा कर रही है और चर्चा के बाद ही इसे एचआरटीसी को आगे भेजा जाएगा।

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