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मेडिकल और विधि कॉलेजों की भी होगी रैंकिंग

बैठक में यह भी फैसला किया गया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडेशन (एनबीए) विधि और स्वास्थ्य मंत्रालयों से जुड़े संबंधित पक्षों को लेकर एक उप समिति का गठन कर सकता है ताकि विधि व मेडिकल संस्थानों की रैकिंग के लिए मानकों को अंतिम रूप दिया जा सके।
Author नई दिल्ली | May 23, 2016 01:33 am
पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी। (फाइल फोटो)

मानव संसाधन विकास मंत्रालय अगले साल से विधि और मेडिकल कॉलेजों की रैकिंग की योजना बना रहा है। ये कॉलेज उच्च शिक्षण संस्थानों की रैकिंग की व्यवस्था के दायरे से बाहर हैं। अब तक विश्वविद्यालयों, प्रबंधन, इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेज ही राष्ट्रीय रैकिंग व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक बीते चार अप्रैल को पहली राष्ट्रीय रैकिंग जारी होने के बाद मिले फीडबैक पर इस महीने की शुरुआत में एक बैठक में समीक्षा की गई। बैठक में सचिव (उच्च शिक्षा) वीएस ओबराय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में ऐसा महसूस हुआ था कि विधि और मेडिकल कॉलेज की श्रेणियां इस बड़े अभ्यास में नदारद थीं।

विचार-विमर्श के बाद यह फैसला किया गया कि विधि संस्थानों के लिए कुछ मानक तय होंगे। जिनकी मांग राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय-नई दिल्ली के कुलपति से की जा सकती है। इसी तरह मेडिकल संस्थानों की रैकिंग के लिए मानक एम्स के निदेशक से मांगे जा सकते हैं। बैठक में यह भी फैसला किया गया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडेशन (एनबीए) विधि और स्वास्थ्य मंत्रालयों से जुड़े संबंधित पक्षों को लेकर एक उप समिति का गठन कर सकता है ताकि विधि व मेडिकल संस्थानों की रैकिंग के लिए मानकों को अंतिम रूप दिया जा सके।

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