कैसे दिन पलटे

कभी ऐसा वक्त था जब दिल्ली के आसपास के राज्यों के लोग राष्ट्रीय राजधानी में आकर अपने वाहनों की टंकी फुल करवाते थे।

कभी ऐसा वक्त था जब दिल्ली के आसपास के राज्यों के लोग राष्ट्रीय राजधानी में आकर अपने वाहनों की टंकी फुल करवाते थे। कारण था, अन्य राज्यों की तुलना में दिल्ली में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होना। लेकिन अब दिन पलट गए हैं। र्इंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण पूरे देश में लोग कराह रहे हैं। ऐसे में दो-तीन रुपए का अंतर भी लोगों को काफी राहत दे रहा है। पिछले दिनों जब पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत सौ का आंकड़ा पार कर गया तो उत्तर प्रदेश में कुछ छूट देकर लोगों को राहत देने की कोशिश की गई। अब दिल्ली की तुलना में यूपी में पेट्रोल करीब साढ़े 8 रुपए सस्ता है। ऐसे में दिल्ली के नंबर वाली गाड़ियां आजकल यूपी के पेट्रोल पंपों पर खड़ी नजर आ रही हैं।

घर न घाट

महापर्व छठ पर नेताओं की सियासत व्रतियों पर भारी पड़ी। दिल्ली के एक जनप्रतिनिधि ने वोट और सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा काम किया कि पूर्वांचलवासियों को उल्टे पांव भागना पड़ा। उनकी हठ पर पुलिस की लठ चली। दिल्ली आपदा प्रबंधन समिति (डीडीएमए) की मनाही व उपराज्यपाल की हिदायत के बावजूद उन्होंने आइटीओ स्थित यमुना घाट पर न केवल छठ पूजा कराने का एलान कर दिया बल्कि लोगों को सार्वजनिक तौर पर बुला भी लिया। भीड़ उमड़नी शुरू हुई। अब पुलिस की बारी थी। पुलिस ने लाठियां और डंडे चलाकर लोगों को चलता किया। अब व्रती न घर के रहे न घाट के! आनन-फानन में कुछ लोग जहां-तहां भगवान सूर्य को नमस्कार करते दिखे। कई लोगों को तो यह भी नसीब नहीं हो सका क्योंकि तब तक देर हो चुकी थी ।

आश्वासन का आसरा

औद्योगिक महानगर नोएडा के किसानों की प्राधिकरण अधिकारियों के साथ चल रही हक की लड़ाई दो महीने से जारी है। शुरूआत में तो किसानों में खूब रौद्र रूप दिखाया और अपनी बात मनवाने की कोशिश की, लेकिन अब यह कमजोर होता दिख रहा है। एक तो किसानों के खिलाफ उल्टे मामले दर्ज कर दिए गए हैं जिससे किसानों में भी अब संकोच दिख रहा है। किसान अभी तक जहां-जहां गए उन्हें आश्वासन ही मिला। लेकिन अब किसानों को इसका ही सहारा है। यूपी में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और आचार संहिता लागू होने वाली है। ऐसे में किसान अगर कुछ दिनों में अपनी मांग नहीं मनवा पाते तो चुनाव के बाद ही उन्हें समय मिलेगा। आचार संहिता में सख्ती के बाद तो उनका आंदोलन भी फीका हो जाएगा। ऐसे में किसान नेता सांसद और विधायक के आवास के चक्कर लगा रहे हैं। जानें कहां बात बन जाए।
जनता का साक्षात्कार

केंद्र और दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने को लड़ रही एक पार्टी इन दिनों एक खास तरह का अभियान चला रही है। इसमें पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लोगों के बीच में जाकर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं। कई बार पार्टी के प्रदेश मुखिया आम जन का साक्षात्कार करने लगते हैं। वह लोगों की समस्याएं कम पूछते हैं लेकिन सत्ता पर काबिज पार्टियों ने वादे पूरे किए कि नहीं यह जरूर याद दिला देते हैं। प्रश्न पूछने के चक्कर में एक बार तो वे अपने जमाने की यादों में चले गए और पूछ बैठे कि उनके समय में जिन योजनाओं का लाभ मिलता था वह लाभ मिल रहा है या नहीं। इस पर एक ने जवाब दिया कि यह तो आप अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं से ही पूछें क्योंकि उनको आपके जमाने में ज्यादा लाभ मिला। हालांकि नेता जी घबराए नहीं और महंगाई पर सवाल पूछ डाला तो जवाब मिला कि महंगाई तो हर सरकार में बढ़ रही है। इसके बाद नेता जी अपनी यात्रा पर आगे निकल गए।
-बेदिल

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