दिग्विजय सिंह को क्यों कहा जाने लगा था ‘दिग्गी राजा’, एक इंटरव्यू में खुद बताया था इसका कारण

कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाने वाले दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) को ‘दिग्गी राजा’ या ‘राजा साहब’ के नामों से भी संबोधित किया जाता है।

Digvijay Singh Rajiv Gandhi

Digvijay Singh AKA Diggi Raja: कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाने वाले दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) को ‘दिग्गी राजा’ या ‘राजा साहब’ के नामों से भी संबोधित किया जाता है। राजीनितक बयानबाजी में भी उनके लिए ‘दिग्गी राजा’ नाम का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार वह इस संबोधन से नाराज भी हो जाते हैं तो कुछ मौकों पर उन्हें इस पर मुस्कुराते हुए भी देखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कुछ रैलियों में ‘दिग्गी राजा’ कहकर दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) पर निशाना साधा है। आमतौर पर लोग उनके इस नाम को राघोगढ़ राजघराने से जोड़कर देखते हैं, हालांकि यह तर्क भी गलत नहीं है, इस कनेक्शन के कारण भी उन्हें दिग्गी राजा कहा जाता है लेकिन एक बार खुद दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने अपने ‘दिग्गी राजा’ नाम के पीछे एक रोचक किस्से के बारे में बताया था।

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि अर्जुन सिंह सरकार में, मैं और बालकवि बैरागी मंत्री हुआ करते थे। मशहूर पत्रकार आर के करंजिया भोपाल आए थे। एक रात को करंजिया से मुलाकात हुई तो बालकवि बैरागी भी साथ में मौजूद थे। खाने पर हुई मुलाकात में कई विषयों पर चर्चा होने लगी तो पत्रकार करंजिया ने दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) को टोकते हुए कहा कि आपका नाम काफी बड़ा है, कोई छोटा नाम नहीं है क्या? दिग्विजय सिंह बताते हैं कि इससे पहले मैं कुछ जवाब देता बालकवि बैरागी ने तपाक से कह दिया कि ये तो ‘दिग्गी राजा’ हैं।

दिग्विजय सिंह बताते हैं कि तभी से मेरा नाम ”दिग्गी राजा” पड़ गया। कांग्रेस नेता ने पिछले दिनों इस इंटरव्यू का एक हिस्सा साझा किया था। इसके साथ उन्होंने लिखा था कि मेरे पिता ने मुझे जो संस्कार दिए, उसके अनुसार मैंने अपने आप को कभी राजा नहीं माना। उन्होंने कहा कि बाल कवि बैरागी जी ने मुझे दिग्गी राजा का नाम दिया था, वह अब चले गए। न मैं सामंत हूं और न ही मेरा आचरण सामंती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिग्विजय सिंह की गिनती कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में होती है। वह राजीव गांधी के बेहद करीबी माने जाते थे और उनकी मृत्यु के बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी सिंह पर खासा भरोसा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि सोनिया गांधी को राजनीति में लाने के लिए दिग्विजय सिंह ने राजी किया था। शुरुआती सालों में राहुल गांधी ने राजनीति के दांव पेंच दिग्विजय सिंह से ही सीखे थे।

सिंह ने अपने राजनीतिक सफर के शुरुआती दिनों में ही कांग्रेस का दामन थाम लिया था, जबकि उनके पिता बलभद्र सिंह भारतीय जनसंघ पार्टी से जुड़े हुए थे। 1977 में पहली बार दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) गुना की राघोगढ़ सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1984 में वह राघोगढ़ से लोकसभा सांसद बने थे। बाद में इन्हें कांग्रेस प्रदेश ईकाई का अध्यक्ष भी बना दिया गया। 1993 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस को जीत मिली तो दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) को मुख्यमंत्री बना दिया गया। 5 साल के शासन के बाद दिग्विजय सिंह ने 1998 में भी जीत हासिल की और 2003 तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहे थे।

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