Haryana Politics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस की बुराइयों के बारे में चेतावनी देने के कुछ दिनों बाद हरियाणा बीजेपी ने संभावित “कांग्रेसीकरण से खुद को बचाने का प्लान बनाया है। इसके लिए पार्टी में आने वाले नए नेताओं की जांच के लिए राज्य और जिला स्तर पर स्क्रीनिंग समितियों का गठन किया है।
मंगलवार को हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने बीजेपी संसदीय बोर्ड की सदस्य सुधा यादव, राज्य मंत्री कृष्ण बेदी और पूर्व राज्य मंत्रियों कंवर पाल गुर्जर और सुभाष सुधा को मिलाकर एक राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति की घोषणा की। जिला स्तर पर राज्य भाजपा नेतृत्व ने जिला पार्टी अध्यक्ष और जिला प्रभारी सहित तीन या चार सदस्यों वाली इसी तरह की समितियां गठित कीं।
बीजेपी नेता ने क्या कहा?
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी की प्राथमिक चिंता अपने वैचारिक स्वरूप को संरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि भाजपा अपनी पहचान खो दे और कांग्रेस की तरह एकजुट हो जाए।” उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश या राजस्थान के विपरीत, हरियाणा में पार्टी का उदय केवल उसकी संगठनात्मक शक्ति पर आधारित नहीं है।
बीजपी नेता ने कहा कि कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी), जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) और हरियाणा विकास पार्टी के नेताओं ने हमारी प्रगति में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वालों को बाहरी नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सत्ता पूरी तरह से नए लोगों को नहीं सौंपी जा सकती। एक उचित संतुलन की आवश्यकता है।
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पीएम मोदी ने दिया था सबक
20 जनवरी को दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा था कि जो कांग्रेस की बुराइयों से बचेगा वही देश में आगे बढ़ेगा। मोहन लाल बडोली की घोषणा उसी समय हुई जब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। उनके इस कदम को राज्य भाजपा में लगभग एक वर्ष में सबसे महत्वपूर्ण जुड़ावों में से एक माना जा रहा है, इससे पहले फरवरी 2025 में नगर निगम चुनावों से पहले कांग्रेस नेता सरदार त्रिलोचन सिंह भाजपा में शामिल हुए थे।
सतीश पुनिया ने बताई बारीकियां
स्क्रीनिंग पैनल के पीछे के तर्क को समझाते हुए भाजपा के हरियाणा प्रभारी सतीश पूनिया ने कहा कि कुछ लोग अक्सर केवल “निजी राजनीतिक लाभ के लिए पार्टी में प्रवेश करना चाहते हैं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में आपत्ति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि ये स्क्रीनिंग समितियां सभी हितधारकों से चर्चा करेंगी, उम्मीदवारों के इरादे का आकलन करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि नए सदस्य पार्टी को मजबूत करें। इसके बाद ही उनके प्रवेश आवेदन वरिष्ठ नेतृत्व को मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस व्यवस्था से एकरूपता आएगी और बिना जांच-पड़ताल के मनमाने ढंग से सदस्यों को शामिल करने पर रोक लगेगी।
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हालांकि प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कदम को “मामूली” बताकर खारिज कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा जैसे छोटे राज्य में इस तरह की कवायद का कोई खास मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता महत्वपूर्ण है, तो उसे तो हर कोई जानता ही है। क्या भाजपा ने कभी किसी को प्रवेश देने से इनकार किया है? वे कांग्रेस, आईएनएलडी और अन्य सभी दलों के नेताओं का स्वागत कर रहे हैं।
भाजपा में भी कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे बृजेंद्र सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में वापस लौट आए। अक्टूबर 2024 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले, पूर्व लोकसभा सांसद और दलित नेता अशोक तंवर और हरियाणा के पूर्व मंत्री करण देव कंबोज ने भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चरण कंवल साहिब माछीवाड़ा गुरुद्वारा साहिब में टेका माथा
