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गृह मंत्रालय ने कहा- चार महीने में मारे गए 76 नक्सली, 665 गिरफ्तार

जानकारी के मुताबिक हाल के दिनों में सुरक्षा बलों को वामपंथी उग्रवाद से निपटने में खासी कामयाबी मिली है और इस साल माओवादी हिंसा में 30 प्रतिशत की कमी आयी है।

Author नई दिल्ली | Updated: June 9, 2016 5:12 AM
maoism in india, maoist, maoist killed, maoist arrested, maoist surrendered, police reform, jansatta article, jansatta editorial, jansatta news, national news in hindi, world news in hindi, international news in hindi, political news in hindi, jansattaनक्‍सलियों द्वारा फायरिंग। (Representative Image)

इस वर्ष के पहले चार महीनों के दौरान वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में 76 नक्सली मारे गए, जबकि 665 को सुरक्षाकर्मियों ने गिरफ्तार किया है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने उक्त जानकारी दी है। जानकारी के मुताबिक हाल के दिनों में सुरक्षा बलों को वामपंथी उग्रवाद से निपटने में खासी कामयाबी मिली है और इस साल माओवादी हिंसा में 30 प्रतिशत की कमी आयी है।

अधिकारियों ने बताया कि इस साल जनवरी से अपै्रल के बीच कुल 76 माओवादी मारे गए जबकि पिछले साल की समान अवधि में 15 उग्रवादी मारे गए थे। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि 2016 के पहले चार महीनों में 665 माओवादी गिरफ्तार किए गए और 639 ने आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं 2015 की समान अवधि में 435 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया था और 134 ने आत्मसमर्पण किया था।

वर्ष 2015 में, उग्रवादी हिंसा की 1088 घटनाओं में 226 लोगों की मौत हुई थी। इन 226 लोगों में से 168 आम नागरिक और 58 सुरक्षाकर्मी थे। पिछले साल 89 माओवादी मारे गए थे और 1668 गिरफ्तार किए गए, वहीं 570 कैडरों ने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

अधिकारी ने कहा कि हिंसा में कमी की कई वजहें हैं, जिनमें वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बलों की अधिक मौजूदगी, कैडरों और नेताओं की मौत, गिरफ्तारियां, आत्मसमर्पण और पलायन, प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं की बेहतर निगरानी और माओवादी कैडरों में उग्रवाद से थकान आदि शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि दस राज्यों के 106 जिले विभिन्न स्तर पर माओवाद से प्रभावित हैं जबकि सात राज्यों के 35 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
संसद की एक स्थायी समिति की हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार सात राज्यों के 35 जिलों के उग्रवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित रहना चिंता का विषय है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। इसमें कहा गया है कि भाकपा माओवादी अब भी देश के विभिन्न वामपंथी उग्रवादी संगठनों में सबसे ज्यादा ताकतवर बना हुआ है और वामपंथी उग्रवादी हिंसा की घटनाओं में मरने वालों में से 80 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार है।

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