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पश्चिम बंगाल के 79 में से 60 हज़ार बूथ तक पहुंच गई है बीजेपी, बंद कमरे में बोले अमित शाह- सीएम फेस की चिंता किए बिना काम कीजिए

गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें हासिल की हैं। हालांकि, इसके बाद हुए तीन उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने एकतरफा जीत हासिल की है।

West Bengal, BJP, Amit Shahभाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह इसी हफ्ते पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। (फोटो- पार्था पॉल)

भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी है। इसी हफ्ते गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल के आदिवासी बहुल इलाकों का दौरा कर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव अभियान की शुरुआत का इशारा कर दिया था। बताया गया है कि हाल ही में शाह ने बंगाल चुनाव पर एक बैठक में हिस्सा लिया था। इसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं से साफ कर दिया कि वे इस वक्त सिर्फ जमीनी स्तर पर भाजपा की पहुंच बढ़ाने का काम करें और स्थानीय स्तर पर महिलाओं और अलग-अलग समुदाय के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करें। शाह ने साफ किया कि पार्टी को लोगों तक पहुंचने के लिए कार्यक्रम करने चाहिए, वह भी बिना मुख्यमंत्री के चेहरे की चिंता किए।

बता दें कि शाह ने गुरुवार-शुक्रवार को बंगाल दौरे पर आदिवासी इलाकों का दौरा किया था। इसके अलावा उन्होंने मतुआ समुदाय के परिवार के यहां खाना भी खाया था। माना जा रहा है कि इस कदम के जरिए शाह आदिवासी बहुल क्षेत्र के आसपास की सीटों को भाजपा के पक्ष में मोड़ना चाहते हैं। शाह ने इस दौरान कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात भी की थी।

गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें हासिल की हैं। हालांकि, इसके बाद हुए तीन उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने एकतरफा जीत हासिल की है। शाह ने अपने हालिया बयान के जरिए भरोसा जताया है कि भाजा बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 200 पर कब्जा जमाएगी।

भाजपा ने अब तक राज्य में 79 हजार बूथों में से 60 हजार बूथों तक पहुंच बना ली है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने बैठक में बूथ-स्तर की व्यवस्था पर ही और ज्यादा ध्यान केंद्रित करने को कहा। शाह के साथ बैठक में शामिल रहे एक वरिष्ठ नेता कहा, “हमें इस अंतर को खत्म करने के लिए कहा गया। हमें यह भी कहा गया कि बूथ कमेटी इलाके के सामाजिक समीकरणों के आधार पर ही बनाई जानी चाहिए। हमने यह भी देखा है कि कुछ इलाकों में 21 सदस्यों वाली बूथ कमेटी में तीन से चार महिलाएं ही होती थीं। अब हम इसमें और महिलाओं को शामिल करेंगे।”

शाह ने 2017 में हुए उत्तर प्रदेश चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वह चुनाव पार्टी ने बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के जीत लिया था। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लोगों का गुस्सा भाजपा की जीत में अहम साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि तृणमूल के हारने की जमीन पहले ही तैयार हो चुकी है। लोग मौजूदा सरकार की भ्रष्टाचार और अपीजमेंट पॉलिटिक्स से थक चुके हैं।

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