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बिहार: सख्ती के बाबजूद बिक रही शराब, होली पर सता रहा जहरीली वाइन का डर

लालू प्रसाद के खेमे में तो पूरी मायूसी छाई हुई है। उनके कुनबे में होली फीकी दिख रही है। हालांकि इनके चेहरे पर थोड़ी मुस्कान हम पार्टी के नेता जीतनराम मांझी के महागठबंधन में शामिल होने से देखी जा रही है।

Author भागलपुर | Published on: March 1, 2018 9:04 PM
नीतीश सरकार ने बिहार में शराबबंदी लागू की हुई है।

इस साल होली पर बिहार में दो काम नहीं होगा। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के जेल में बंद होने से कपड़ा-फाड़ होली नहीं होगी। दूसरा कानूनी तौर पर कोई शराब का सेवन नहीं कर सकेगा। यहां पूर्ण शराब बंदी है। लालू प्रसाद के खेमे में तो पूरी मायूसी छाई है। उनके कुनबे में होली फीकी है। इनके चेहरे पर थोड़ी मुस्कान हम पार्टी के नेता जीतनराम मांझी के महागठबंधन में शामिल होने से देखी जा रही है। राजद जिला अध्यक्ष तिरुपति यादव ने उनका स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की है। वहीं, बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी के कांग्रेस छोड़ जद (एकी) में जाने पर एआईसीसी सदस्य प्रवीण कुशवाहा ने कहा है कि पार्टी ने इन्हें निष्काषित करने में देर कर दी। इन्हें पहले ही पार्टी से निकाल बाहर कर देना चाहिए था। मसलन होली पर सियासत गर्म होकर बेरंग सी हो गई है।

लेकिन, इससे भी ज्यादा बिहार में होली के मौके पर जहरीली शराब का डर सताने लगता है। यहां पूर्ण शराब बंदी है। फिर भी यहां जुगाड़ से सब काम होता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाबजूद जुगाड़ गाड़ी सड़कों पर चल रही है। ठीक वैसे ही सरकार के बनाए सख्त कानून के बाबजूद शराब बिक रही है। बेरोजगारों का यह रोजगार बन गया है। होम डिलीवरी हो रही है। होली को लेकर पुलिस महकमा रोजाना बैठकें कर सतर्क रहने की हिदायत दे रहा है। शराब कहीं न कहीं रोजाना पकड़ी भी जा रही है। फिर भी गैरकानूनी तरीके से बिक रही है। 28 फरवरी को राज्य के डीजीपी की कुर्सी से अवकाश ग्रहण करने वाले आईपीएस प्रमोद कुमार ठाकुर ने अपने विदाई भाषण में कहा कि शराब के धंधे में बड़े बदमाश और माफिया के प्रवेश करने से पुलिस के सामने इसे रोकने की बड़ी चुनोती है।

दरअसल भागलपुर के लोगों को 1987 की होली याद आते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। तब जहरीली शराब बैगपाइपर की बोतलों में भरकर बेची गई थी। हरिप्रसाद शर्मा और गुड्डू यादव बताते हैं कि उस साल होली पर शराब बेचने की मनाही थी। इसके बाबजूद लोगों ने बेची और छक कर पी। इससे दो दर्जन से ज्यादा मौतें हुई थी। जो बच गए थे उनके आंखों की रोशनी चली गई थी। इस बार की बात कुछ अलग है। बीते साल 16 अप्रैल से बिहार में पूर्ण शराब बंदी है। फिर भी बीते साल गोपालगंज में जहरीली शराब पीने से कई जानें गईं। कड़े कानून और सख्ती के बाबजूद बिहार के कोने-कोने से शराब बेचने, पीन और पकड़े जाने की खबर रोजाना मिल रही है। गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पत्रकार प्रवीण बागी ने लिखा है कि होली पर बेचने और पीने के लिए करोड़ों रुपए की शराब बिहार पहुंच चुकी है। उनकी जानकारी का क्या श्रोत है यह तो पता नहीं। मगर हालात कुछ ऐसे ही हैं।

असल में बगैर शराब के बिहार के लोग होली मनाने के आदी नहीं हैं। हालांकि सभी ऐसे नहीं हैं मगर जो सेवन करते हैं वे अपना जुगाड़ कर लेते हैं। झारखंड, नेपाल और बंगाल से सड़क रास्ते पेटियों में भर शराब उतर रही है। दूसरे राज्य से आने वाली ट्रेनें मयखाना एक्सप्रेस बन गई हैं। शराब बेचने वाले पकड़े भी जा रहे हैं। पर वे ही पकड़े जा रहे हैं जिन्होंने पुलिस थानों से लाइन नहीं ली है। जिन्होंने लाइन ले ली है, वे बेफिक्र हो तस्करी कर रहे हैं। कई नौजवान बेरोजगारी की वजह से होम डिलीवरी के काम में लगे हुए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को भी इस बात को दोहराया है कि शराब की तस्करी को रोकने पुलिस का अलग तंत्र खड़ा किया जा रहा है। आधुनिक पद्धति तैयार की गई है और ट्रॉयल चल रहा है। कोई बख्शा नहीं जाएगा। भागलपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने होली के दौरान निगरानी रखने पुलिस का मोटरसाइकिल दस्ता भी बनाया है, जो गली-गली घूमेगा।

सूत्रों के हवाले से यहां यह बताना जरूरी है कि बिहार में शराबबंदी के बाद से एक लाख 20 हजार लोगों को केवल शराब बेचने और पीने के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। जो 1975 आपातकाल में हुई गिरफ्तारी से कहीं ज्यादा है। गिरफ्तार किए गए लोगों में ज्यादातर दलित, महादलित और गरीब परिवारों के लोग हैं। इनमें से अबतक केवल 30 जनों को सजा निचली अदालतों से हुई है। खैर जो हो होली अमन चैन से गुजर जाए, सभी की कोशिश यही है। इसी को लेकर सरकार और प्रशासन की सांस अटकी है। वहीं, पहली मार्च को डीजीपी ओहदे पर बैठे आईपीएस कृपास्वरूप द्विवेदी के लिए यह एक चुनोती भी है।

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