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यूपी: हिंदू युवा वाहिनी ने मंदिर में कव्वाली रोकी, समिति ने कहा- बीच में ही खत्‍म कर देंगे मेला

पिछले 70 सालों से इस मेले में कव्वाली का आयोजन भी कराया जा रहा है। इस बार के मेले में भी कव्वाली का आयोजन प्रस्तावित है। लेकिन इस साल हिंदू युवा वाहिनी ने कव्वाली को सूफी परंपरा बताते हुए इसके आयोजन का विरोध शुरु कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में मंदिर परिसर में कव्वाली को लेकर विवाद हो गया है। दरअसल हिंदू युवा वाहिनी दनकौर के द्रोण मंदिर में होने वाली कव्वाली के विरोध में उतर आयी है, जिसके बाद इसे लेकर हिंदू युवा वाहिनी और मंदिर समिति आमने-सामने आ गए हैं। बता दें कि कव्वाली को आमतौर पर सूफी परंपरा माना जाता है और यह परंपरा तेरहवीं सदी में ईरान और अफगानिस्तान से भारत आयी थी। हिंदू युवा वाहिनी का विरोध भी कव्वाली के सूफी परंपरा होने के चलते बताया जा रहा है। खबर के अनुसार, दनकौर के द्रोण मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्स्व के अवसर पर पिछले 95 सालों से मेले का आयोजन किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि पिछले 70 सालों से इस मेले में कव्वाली का आयोजन भी कराया जा रहा है। इस बार के मेले में भी कव्वाली का आयोजन प्रस्तावित है। लेकिन इस साल हिंदू युवा वाहिनी ने कव्वाली को मुस्लिम परंपरा बताते हुए इसके आयोजन का विरोध शुरु कर दिया है। नवभारत टाइम्स की एक खबर के अनुसार, हिंदू युवा वाहिनी का कहना है कि मंदिर परिसर में कव्वाली का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि इसमें कथित तौर पर अश्लील डांस भी होता है। अब हिंदू युवा वाहिनी के विरोध को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी मेले में कव्वाली के आयोजन पर सोमवार को रोक लगा दी। वहीं प्रशासन द्वारा कव्वाली पर रोक लगाने से मेला समिति नाराज हो गई है।

मेला समिति ने इस रोक के विरोध में पुलिस प्रशासन से शिकायत की है। इसके साथ ही समिति ने सीएम योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भी लिखा है। मेला समिति का आरोप है कि हिंदू युवा वाहिनी कव्वाली के बहाने सांप्रदायिक दंगा कराना चाहती है। इतना ही नहीं मेला समिति ने धमकी दी है कि यदि कव्वाली का आयोजन नहीं हुआ तो मेला बीच में ही खत्म कर दिया जाएगा। पुलिस प्रशासन का इस पूरे मसले पर कहना है कि रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2011 से 2016 तक हर साल इस मेले में कव्वाली का आयोजन हुआ है। इस बार इसके लिए अनुमति नहीं ली गई है।

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