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हिंदी पर अमित शाह की सफाई के बाद DMK चीफ स्टालिन ने स्थगित किया प्रदर्शन, AIDMK बोली- ‘मुंह काला’ करा लिया

Hindi Language Controversy: अमित शाह ने कहा कि उन्होंने देश में कहीं भी हिंदी थोपने की बात कभी नहीं की है। उनके इस बयान का हवाला देते हुए डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा कि हमने 20 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया है।

Author चेन्नई | Updated: September 19, 2019 7:40 AM
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह। फोटो: इंडियन एक्सप्रेस/अनिल शर्मा

हिंदी भाषा के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के स्पष्टीकरण के बाद द्रमुक (DMK) ने जीत का दावा करते हुए इस मुद्दे पर 20 सितंबर को पार्टी का प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन स्थगित कर दिया है। शाह ने कहा कि उन्होंने देश में कहीं भी हिंदी थोपने की बात कभी नहीं की है। उनके इस बयान का हवाला देते हुए द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा कि 20 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन अस्थाई रूप से स्थगित कर दिये हैं। इस बीच द्रमुक द्वारा प्रदर्शन स्थगित करने का जिक्र करते हुए अन्नाद्रमुक के प्रवक्ता आर एम बाबू मुरुगावेल ने पीटीआई-भाषा से कहा कहा कि उन्होंने ‘‘अपना मुंह काला’’ करा लिया है।

द्रमुक अध्यक्ष का बयान: उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अमित शाह ने कहा है कि उनके विचारों को ‘‘गलत तरीके से समझा गया।’’ स्टालिन ने पार्टी द्वारा आंदोलन की घोषणा करने के दो दिनों बाद यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘हम पार्टी के प्रदर्शन की घोषणा के बाद उनके (शाह) स्पष्टीकरण को द्रमुक के लिए बड़ी जीत मानते हैं।’’ हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हिंदी थोपी जाती है तो द्रमुक हर समय इसका विरोध करेगी।

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अमित शाह का बयान: हिंदी पर अपने बयान से उठे विवाद को शांत करने का प्रयास करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने बुधवार को रांची में एक कार्यक्रम में कहा कि उन्होंने देश में कहीं भी हिंदी थोपने की बात कभी नहीं की बल्कि दूसरी भाषा के तौर पर इसके इस्तेमाल की वकालत की।शाह ने कहा कि वह लगातार क्षेत्रीय भाषाओं को मजबूत करने की वकालत कर रहे हैं।

अन्नाद्रमुक का बयान: इस बीच, सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक (AIDMK) ने कहा कि उसने शाह के बयान को कभी गलत नहीं समझा और उसने द्रमुक पर इसकी गलत व्याख्या करने और राजनीतिक लाभ के लिए इसका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। अन्नाद्रमुक के प्रवक्ता आर एम बाबू मुरुगावेल ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘भाषा एक नस्ल, संस्कृति और परंपरा की पहचान है। हम हिंदी थोपना या किसी भी भाषा को थोपना कभी स्वीकार नहीं करेंगे। हमने कभी गृह मंत्री शाह के विचारों को गलत नहीं समझा।’’ द्रमुक द्वारा प्रदर्शन स्थगित करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने ‘‘अपना मुंह काला’’ करा लिया है।

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