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हिंदी दिवस: अमित शाह के बयान पर भड़के DMK चीफ स्टालिन, कहा- ‘ये India है Hindia नहीं’

Hindi Divas 2019: हिंदी दिवस पर हिंदी को बढ़ावा देने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर बवाल खड़ा हो गया है। दक्षिण के नेताओं ने इसका कड़ा विरोध करते हुए बयान की निंदा की। विपक्षियों के साथ-साथ भाजपा की सहयोगी दलों ने भी नाराजगी जताई।

Author चेन्नई | Updated: September 15, 2019 3:29 PM
अमित शाह (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

Hindi Diwas Amit Shah: हिंदी दिवस पर हिंदी को बढ़ावा दिए जाने के केंद्रीय गृह अमित शाह के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। दक्षिणी राज्यों की कई पार्टियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। तमिलनाडु में राजनीतिक दलों ने पार्टी लाइन से हटकर एकजुटता दिखाते हुए इस आह्वान का कड़ा विरोध किया। नेताओं ने कहा कि वे इसे कतई स्वीकार नहीं करेंगे।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के अवसर पर शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में यह बयान दिया था। भाजपा के सहयोगी पीएमके ने भी शाह के विचारों की आलोचना की। पीएमके अध्यक्ष एस रामदास ने ट्वीट कर कहा, “हिंदी कभी भी वैश्विक क्षेत्र में भारत की पहचान नहीं बन सकती। अमित शाह गलत हैं क्योंकि इसमें विभाजन का बीज है,”

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सत्ता और विपक्ष आया एक साथ : इस मुद्दे पर सत्ताधारी एआईएडीएमके और विपक्षी डीएमके एकसाथ दिखे। तमिल विकास और संस्कृति मंत्री मफोई के पांडीराजन ने कहा कि केंद्र इस समय हिंदी थोप नहीं सकता है। शिक्षा मंत्री केए सेनगोट्टैयन ने दावा किया कि राज्य को दो भाषा सूत्र (मातृभाषा तमिल और अंग्रेजी) के शिक्षण के लिए तैयार किया गया है, जिसे अन्ना द्रविड़ मंच और पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई के दिनों से लागू किया गया है। मत्स्य पालन मंत्री के जयकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री एडप्पाडी के पलानीस्वामी पहले ही पीएम और गृह मंत्री को स्पष्ट रूप से बता चुके हैं कि तमिलनाडु केवल दो भाषा फार्मूले का पालन करेगा।

गैर हिंदी राज्यों को एकजुट करेगा डीएमके : डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक अन्य भाषा थोपने पर अमित शाह को चेतावनी दी और उनसे हिंदी पर अपने बयान को वापस लेने की मांग की। उन्होंने मीडिया को बताया, “यह इंडिया है हिंडिया नहीं”। डीएमके  उन राज्यों को एकजुट करेगा जो हिंदी को बढ़ावा देने से अपने वैध अधिकारों को खो सकते हैं। एमडीएमके के महासचिव वाइको ने कहा कि गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी लागू करने से देश में नफरत फैलेगी और केवल हिंदी भाषी राज्य ही रह पाएंगे। विडुथालाई चिरुथाईगल काची (VCK) के अध्यक्ष और सांसद थाल थिरुमावालवन ने कहा, “यह हिंदू प्रमुखतावाद की भाजपा की नीति का हिस्सा है, जो न केवल अल्पसंख्यकों के लिए बल्कि धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र और बहुलतावाद के लिए गंभीर खतरा है।”

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