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असम के नए CM होंगे हेमंत बिस्व सरमा, कांग्रेस में चूके थे तो थामा था BJP का दामन, तब से नॉर्थ ईस्ट में खिला रहे हैं कमल

भाजपा नेता हिमंत बिस्व सरमा पांचवीं बार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से थे सीएम पद के प्रबल दावेदार।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र गुवाहाटी | Updated: May 9, 2021 2:09 PM
असम में विधायक दल ने हेमंत बिस्व सरमा को चुनाव नेता। (फोटो- ट्विटर/Himanta Biswa Sarma)

असम में विधानसभा चुनाव में भाजपा को लगातार दूसरी बार जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले हेमंत बिस्व सरमा राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। भाजपा विधायक दल की रविवार को हुई बैठक में उन्हें नेता चुना गया। बताया गया है कि संसदीय बोर्ड ने असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के ऊपर उनका नाम चुना था।

बता दें कि सर्वानंद सोनोवाल ने भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले ही राज्यपाल जगदीश मुखी को रविवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बाद से ही सरमा को उनका पद सौंपे जाने की अटकलें लग रही थीं। हालांकि, परंपरा के अनुसार राज्यपाल ने अगली सरकार के गठन तक सोनोवाल से पद पर बने रहने को कहा। बताया गया है कि सरमा आज शाम 4 बजे के आसपास राज्यपाल से मिलकर सरकार गठन का दावा पेश करेंगे।

कांग्रेस में नहीं मिली तवज्जो, तो भाजपा में आए, अब बने सीएम: हेमंत बिस्व सरमा ने छात्र राजनीति की शुरुआत असम स्टूडेंट्स यूनियन से की। बाद में उन्होंने 1991 में कांग्रेस में अहम पद सौंपा गया और उनकी राजनीतिक एंट्री हुई। सरमा का सुनहरा दौर 2001 में तरुण गोगोई के सीएम बनने के बाद शुरू हुआ। 2002 में वे सरकार में मंत्री भी बने। हालांकि, तरुण गोगोई के बाद उनके बेटे गौरव गोगोई के बढ़ते प्रभाव से सरमा की नाराजगी साफ होने लगी।

असम में 2011 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में सरमा सबसे मजबूत बनकर उभरे थे। इसके बावजूद कांग्रेस से उन्हें तवज्जो नहीं मिली। जबकि गौरव गोगोई पार्टी के उभरते नेता बन गए। इसके बाद कांग्रेस में कई कोशिशों के बाद भी जब पार्टी में उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो 2015 में उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा का साथ थाम लिया। इसके बाद 2016 में उन्होंने भाजपा को जबरदस्त जीत दिलाई और पार्टी में अहम पद हासिल कर लिया। हालांकि, तब भाजपा ने उनकी जगह केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को असम भेजने का फैसला किया था।

गृह मंत्री शाह और पार्टी अध्यक्ष नड्डा ने कराई थी आमने-सामने बैठक: एक दिन पहले ही सोनोवाल और हिमंत बिस्व सरमा ने पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की थी। नड्डा के निवास पर असम के दोनों नेताओं, पार्टी अध्यक्ष, शाह और भाजपा महासचिव (संगठन) बी एल संतोष के बीच तीन दौर की बैठकें हुई। ये बैठकें चार घंटे से अधिक समय तक चलीं।

भाजपा ने नहीं किया था सीएम चेहरे का ऐलान: भाजपा ने असम में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी। उसने 2016 विधानसभा चुनाव में सोनोवाल को इस पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया था और चुनाव जीता था। इसी के साथ पूर्वोत्तर में भगवा दल की पहली सरकार गठित हुई थी।

हालांकि, इस बार पार्टी कहती रही कि वह चुनाव के बाद फैसला करेगी कि असम का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। भाजपा ने 126 सदस्यीय असम विधानसभा में 60 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि उसकी गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद से 9 और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल ने 6 सीटें जीतीं।

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