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मत पधारो म्हारे देस: जलसंकट की घड़ी में सैलानियों की अगुवाई को तैयार नहीं शिमला

होटल वालों ने कमरों की बुकिंग बंद कर दी है, जिनकी बुकिंग पहले से थी, उन्हें रद्द कर पैसे लौटाए जा रहे हैं।

Author शिमला, 30 मई। | May 31, 2018 6:03 AM
पानी की किल्लत के मारे सैलानियों ने शिमला के बजाय दूसरे पर्यटन स्थलों का रुख कर लिया है। होटल वालों ने बुकिंग बंद कर दी है। जिन्होंने पहले की बुकिंग की थी, उनको भी रद्द कर दिया है।

ओमप्रकाश ठाकुर
देश भर के सैलानियों की पसंदीदा सैरगाह शिमला इस समय भीषण जलसंकट में है। इसका असर स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर तो पड़ा ही है, पर्यटन और इस पर निर्भर सारे कारोबार पटरी से उतर गए हैं। विडंबना यह है कि राज्य सरकार और पर्यटन के इंतजामकार सैलानियों को बुलावा देने के बजाय, गुजारिश कर रहे हैं कि वे इस सीजन में इस नगरी में न पधारें। पिछले दो दिन से हाई कोर्ट की फटकार के बाद सरकार हरकत में आई है। पर यह अभूतपूर्व जलसंकट जस का तस है। पिछले कुछ दिनों से पानी की किल्लत के मारे सैलानियों ने शिमला के बजाय दूसरे पर्यटन स्थलों का रुख कर लिया है। होटल वालों ने बुकिंग बंद कर दी है। जिन्होंने पहले की बुकिंग की थी, उनको भी रद्द कर दिया है। सैलानियों से कहा जा रहा है कि वे राजधानी नहीं आएं। टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंदर कुमार सेठ ने बुधवार को कहा कि सैलानियों को परेशान नहीं किया जा सकता। उन्हें न आने के लिए कहा जा रहा है।

गौरतलब है कि सर्दियों से लेकर अब तक कम बारिश और जल-वितरण के कुप्रबंधन के कारण यह संकट और भी गहरा गया है। इस बार सर्दियों में 72 फीसद तक कम बारिश हुई थी। इसकी वजह से जलस्रोतों में पानी कम हो गया। लेकिन जो पानी शहर को मिला भी, उसका वितरण भी सही तरीके से नहीं हो पाया। निगमायुक्त रोहित जमवाल ने कहा कि शहर के लिए आज भी 18.5 एमएलडी पानी ही मिला। इसके अलावा 27 टैंकर भी पानी के वितरण के लिए लगाए गए हैं। पानी के आबंटन को लेकर नगर निगम ने शहर को तीन अंचलों में विभाजित कर दिया है ताकि पानी का समान वितरण किया जाए। लेकिन जिस अंचल में पानी की आपूर्ति की बारी है वहां भी पानी सही तरीके से नहीं मिल रहा है। जबकि टैंकरों से आबंटित हो रहा पानी भी ज्यादा साफ नहीं है।

डेढ़ सप्ताह से चल रहे जलसंकट के कारण शिमला की आमदो-रफ्त गड़बड़ा गई है। नाराज लोग, नेतागण सड़कों पर उतर गए है। छह से आठ दिनों के बाद घरों में पानी की आपूर्ति की जा रही है। लोगों ने बुधवार को टालैंड के पास चक्काजाम कर दिया। नगर निगम की बुधवार को मासिक बैठक थी। बैठक में कांग्रेस और माकपा पार्षदों ने पानी के संकट का मसला उठाया व उप महापौर व किसी भी अधिकारी को बोलने नहीं दिया। आखिर भाजपाशासित नगर निगम में भाजपा पार्षदों और अधिकारियों को सदन से बाहर निकलना पड़ा। सदन की बैठक स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी पार्षदों का गुस्सा था कि शहर अब तक के सबसे गंभीर जलसंकट से गुजर रहा है और महापौर कुसुम सदरेट चीन के दौरे पर हैं। पार्षद शैली शर्मा ने कहा कि वितरण में कोताही बरती गई। उधर, प्रदेश उच्च न्यायालय ने कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश समेत सभी न्यायाधीशों, मंत्रियों, नौकरशाहों, पुलिस अधिकारियों को टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति करने पर पाबंदी लगा दी है। अदालत ने कहा कि जैसे आम लोगों को पानी की आपूर्ति हो रही है, वैसे ही उन्हें भी हो। वीवीआइपी को टैंकर से पानी की आपूर्ति नहीं होगी।

आज भी उच्च न्यायालय में निगमायुक्त को तलब किया हुआ था। निगमायुक्त ने पूरी स्थिति अदालत के समक्ष स्पष्ट की। भयंकर जलसंकट को देखते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पिछले तीन दिन से रोजाना समीक्षा बैठक ले रहे हैं। उन्होंने बुधवार शाम छह बजे जल संकट को लेकर समीक्षा की और जरूरी निर्देश दिए। उधर, निदेशक पर्यटन सुदेश मोकटा ने कहा कि पानी संकट का पर्यटन पर असर तो पड़ा है, लेकिन इतना ज्यादा नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग स्थिति का आकलन कर रहा है। बहरहाल, जल संकट कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मकालीन उत्सव को स्थगित कर दिया।

  • पानी की किल्लत के मारे सैलानियों ने शिमला के बजाय दूसरे पर्यटन स्थलों का रुख कर लिया है। होटल वालों ने बुकिंग बंद कर दी है। जिन्होंने पहले की बुकिंग की थी, उनको भी रद्द कर दिया है।
  • हिमाचल हाई कोर्ट ने कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश समेत सभी न्यायाधीशों, मंत्रियों, नौकरशाहों, पुलिस अधिकारियों को टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति करने पर पाबंदी लगा दी है। अदालत ने कहा कि जैसे आम लोगों को पानी की आपूर्ति हो रही है, वैसे ही उन्हें भी हो। वीवीआइपी को टैंकर से पानी की आपूर्ति नहीं होगी।

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