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भाजपा के प्रचार से कांग्रेस सकते में प्रधानमंत्री समेत कई बड़े नेताओं ने की रैलियां, जबकि वीरभद्र सिंह अकेले ही डटे हैं मैदान में

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी कई जगह पर भाजपा के लिए वोट मांग चुकी हैं। इसके अलावा भाजपा की ओर से कई स्टार प्रचारक मैदान में डटे हुए हैं।
Author मंडी | November 6, 2017 05:37 am
धर्मशाला में चुनावी रैली को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo: PTI/11_4_2017)

भारतीय जनता पार्टी के सुनियोजित व अंधाधुंध प्रचार ने मंडी जिले में कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है। भाजपा की ओर से हर विधानसभा क्षेत्र में वरिष्ठ नेता प्रचार के लिए आ चुके हैं। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 नवंबर को कांगड़ा के शाहपुर व मंडी के सुंदरनगर में और 5 नवंबर को अब तक की सबसे ज्यादा एक दिन में तीन रैलियां ऊना, पालमपुर व कुल्लू में आकर चुनाव प्रचार की लय को हवा में बदलने का प्रयास किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मंडी जिले के सराज के अलावा कांगड़ा व हमीरपुर समेत कई जगहों पर रैलियां कर गए हैं जबकि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जिले में चार रैलियां करके माहौल भाजपा के पक्ष में करने की कोशिश की। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी कई जगह पर भाजपा के लिए वोट मांग चुकी हैं। इसके अलावा भाजपा की ओर से कई स्टार प्रचारक मैदान में डटे हुए हैं। मुख्यमंत्री पद के मनोनीत उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी जिले के सदर व सरकाघाट में रैलियां कर चुके हैं। भाजपा के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन मुस्लिम बहुल इलाकों में जनसभाएं कर चुके हैं।

जहां भाजपा के इन बड़े नेताओं की हर जगह से मांग आ रही है, इनके बल पर उमीदवार अपनी नैया पार लगाना चाहते हैं वहीं कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं को कांग्रेस उम्मीदवार बुलाना ही नहीं चाह रहे हैं। अभी तक केंद्र से कई नेता आकर जिले में डेरा डाले हुए हैं मगर वह जनसभाएं करने की हिमत नहीं जुटा रहे हैं। ले देकर राज्यसभा में विपक्ष के नेता एवं वरिष्ठ कांग्रेसी आनंद शर्मा ने सुंदरनगर व प्रदेश के कुछ अन्य जगहों पर चुनावी सभाएं कीं मगर उन्हें सुनने भीड़ एकत्रित नहीं हो पाई जो उल्टा कांग्रेसी उमीदवारों के लिए मायूसी का कारण बनी। कई नेता तो महज प्रेस वार्ताएं करके ही खानापूरी कर रहे हैं।
कांग्रेस में बस वीरभद्र सिंह की ही मांग है मगर इतने कम समय में हर जगह जा पाना उनके वश में भी नहीं है। यहां तक कि स्टार प्रचारकों की सूची में जो कांग्रेस के नेता हैं वह यदि स्वयं उम्मीदवार हैं तो वह न केवल अपने ही गृह विधानसभा क्षेत्रों में फंस गए हैं बल्कि वे भी चाह रहे हंै कि वीरभद्र सिंह उनके क्षेत्र में आकर एक आध जनसभा कर जाएं।

वीरभद्र सिंह मंडी सदर में दो सभाएं कर चुके हैं जबकि कौल सिंह के इलाके में भी एक चुनावी सभा उन्होंने की है। इसके अलावा वह सरकाघाट, सराज में भी सभाएं कर चुके हैं। अन्य क्षेत्रों में भी वीरभद्र सिंह जा रहे हैं और दिन में चार से पांच सभाएं करके माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद भी वह अकेले होने के कारण भाजपा के ताबड़तोड़ प्रचार की काट नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस चुनाव प्रचार के मामले में बैकफुट पर आ गई है। कांग्रेस को अब राहुल गांधी की रैलियों की ही आस है कि शायद प्रचार के अंतिम दो दिनों में कोई जादू चल सके और भाजपा के पक्ष में जो बयार महसूस की जा रही है उसे कुछ कांग्रेस की ओर मोड़ा जा सके। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का सारा ध्यान गुजरात के चुनावों पर है और उन्होंने हिमाचल को अपने हाल पर छोड़ दिया है। अब दो रैलियां उनकी कितनी काट भाजपा के प्रचार की कर पाती है यह देखने वाली बात होगी।पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री पद के लिए मनोनीत करने के बाद हमीरपुर, मंडी, उना व बिलासपुर में तो भाजपा में जैसे नई जान आ गई है और कार्यकर्ताओं को मनोबल बढ़ गया है। अब जबकि चुनाव प्रचार का समय घंटों के हिसाब से ही बाकी रह गया है तो ताबड़तोड़ प्रचार जनता का रुख किसी भी तरफ मोड़ सकता है।

 

 

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