इस साल हिम आवरण में कमी की वजह से हुए भूस्खलन

हिमाचल प्रदेश में इस साल भूस्खलन की लगातार हो रही विध्वंसक घटनाओं में दिल दहलाने वाले दृश्यों ने देश-दुनिया के भूविज्ञानियों को चिंता में डाल रखा है।

सांकेतिक फोटो।

ओमप्रकाश ठाकुर


हिमाचल प्रदेश में इस साल भूस्खलन की लगातार हो रही विध्वंसक घटनाओं में दिल दहलाने वाले दृश्यों ने देश-दुनिया के भूविज्ञानियों को चिंता में डाल रखा है। लेकिन अब एक नए अध्ययन में यह नया तथ्य सामने आया है कि प्रदेश में 2019-20 के मुकाबले इस साल 2020-21 में कुल हिम आवरण में 18.5 फीसद की कमी आई है। यह सब जलवायु परिवर्तन की वजह से माना जा रहा है। 2020 के अक्तूबर से 2021 के मई तक के किए गए अध्ययन में यह सामने आया है कि इस दौरान में चिनाब बेसिन में हिम आवरण में 9 फीसद, ब्यास बेसिन में 19 फीसद, रावी और सतलुज दोनों बेसिन में 23 फीसद हिमआवरण घटा है। यह अंतर 2019 के अक्तूबर से 2020 के मई महीने की तुलना में है।

राज्य के जलवायु बदलाव केंद्र और इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद की ओर से किए गए इस अध्ययन के बाद हाल के दिनों में जारी रपट में कहा गया है कि सर्दियों में प्रदेश का एक तिहाई हिस्सा हिम आवरण से ढका रहता है व प्रदेश की मुख्य बड़ी नदियां चिनाब, ब्यास, पार्वती, बास्पा, स्पिति, रावी, सतलुज और दूसरी छोटी नदियां सर्दी की ऋतु में पढ़ने वाली बर्फ पर निर्भर रहती हैं।
बेसिन वार पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 2020-21 में इससे पिछले साल के मुकाबले अक्तूबर महीने में हिम आवरण कम पाया गया। चिनाब बेसिन में यह 51 फीसद, ब्यास में 64, रावी में 77 और सतलुज बेसिन में यह आवरण 2019-20 के मकाबले में कम पाया गया।

इसी तरह नवंबर महीने में यह चिनाब में 31 फीसद, ब्यास में 6, रावी में 52 और सतलुज में 21 फीसद कम पाया गया। जबकि दिसंबर महीने में जब सर्दी उच्च स्तर पर होती है तब भी सभी नदी बेसिनों में हिम आवरण में कमी देखी गई। दिसंबर महीने में चिनाब में 2 फीसद, ब्यास में 9 फीसद, रावी में 18 फीसद और सतलुज में 2019-20 के मुकाबले 24 फीसद कम हिमआवरण पाया गया है। इसी तरह मई तक बाकी महीनों में इसी तरह की स्थिति रही है।

अध्ययन में कहा गया है कि सर्दियों के शुरुआती महीनों यानी अक्तूबर-नवंबर 2020 हो या दिसंबर से फरवरी 2021 के महीनों को प्रदेश में इससे पिछले साल के मुकाबले हिम आवरण घटा है। अध्ययन में कहा गया है कि 2019-20 में अक्तूबर 2019 से मई, 2020 तक सतलुज बेसिन में 11 हजार 823 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हिम आवरण था जो 2020-21 में इसी अवधि में घट कर 9 हजार 45 वर्ग किलोमीटर रह गया। इसी तरह रावी बेसिन में भी 2019 -20 में 2108 किलो वर्ग मीटर हिमआवरण था, जो 2020-21 में घटकर 1619 किलोवर्ग मीटर रह गया। जबकि ब्यास बेसिन 2457 किलोवर्ग मीटर से घट कर 2002 किलोवर्ग मीटर तक घट गया और चिनाब बेसिन 7154 वर्ग किलोमीटर से घट कर 6515 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है। इस तरह सभी नदी बेसिनों पर हिम आवरण इससे पिछले साल की तुलना में घटता गया है।

जलवायु परिवर्तन का असर

2019-20 में अक्तूबर, 2019 से मई, 2020 तक सतलुज बेसिन में 11 हजार 823 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हिम आवरण था जो 2020-21 में इसी अवधि में घटकर 9 हजार 45 वर्ग किलोमीटर रह गया। इसी तरह रावी बेसिन में भी 2019-20 में 2,108 किलो वर्ग मीटर हिम आवरण था, जो 2020-21 में घटकर 1,619 वर्ग किलोमीटर रह गया।

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