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हिमाचल : गुड़िया बलात्कार व हत्या मामला: दोषी नीलू चिरानी को ताउम्र कैद

सीबीआइ के लिए यह मामला बेहद पेचीदा व चुनौतीपूर्ण था। मामले में कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं था। अपराध घने जंगल में हुआ था और आरोपी उस इलाके का न होकर बाहर का था। अपराध करने के बाद नीलू लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा था।

Edited By Sanjay Dubey शिमला | June 19, 2021 5:35 AM
शिमला में शुक्रवार को एक अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद मीडिया के सामने मुख्य आरोपी के साथ पुलिस कर्मी (फोटो- पीटीआई)

ओमप्रकाश ठाकुर
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2017 में ऊपरी शिमला में नाबालिग लड़की गुड़िया के साथ बलात्कार व जघन्य हत्या के मामले में दोषी नीलू चिरानी को शुक्रवार को सीबीआइ अदालत ने मृत्युपर्यंत उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

सीबीआइ अदालत के जज राजीव भारद्वाज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषी नीलू अपने जीवनकाल के आखिर तक जेल में रहेगा। फैसला सुनाए जाने के समय नीलू चिरानी अदालत में मौजूद था। इसके बाद पुलिस उसे कंडा जेल ले गई। इस मामले में सीबीआइ अदालत ने नीलू को 28 अप्रैल को दोषी करार दे दिया था। अदालत ने मृतका के शरीर में मिले बाहरी डीएनए का नीलू चिरानी के डीएनए से हुए मिलान को अकाट्य सुबूत माना और नीलू को दोषी करार दिया।

उल्लेखनीय है कि 4 जुलाई 2017 को कोटखाई के हिलाइला में स्कूल से घर जा रही छात्रा गायब हो गई थी। छह जुलाई को स्कूल के पास ही खाई में बेहद बुरी हालत में उसका शव मिला था। इसके बाद इलाके में लोग सड़कों पर उतर आए थे। सीबीआइ ने प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर इस मामले में 22 जुलाई 2017 को स्थानीय पुलिस की ओर से दर्ज मामले को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू कर दी। हालांकि लंबे समय तक सीबीआइ के हाथ कोई सुराग नहीं लगा।

आखिर में मोबाइल फोन के विवरण के आधार पर सीबीआइ ने नीलू पर अपनी जांच केंद्रित की और मौके पर से मिले डीएनए का मिलान नीलू चिरानी के रिश्तेदारों से किया गया। अपराध को अंजाम देने के बाद नीलू मौके से फरार हो गया था व उसने अपना मोबाइल बंद कर दिया था। सीबीआइ ने उसके फोन को लगातर निगरानी में रखा और आखिर में उसे कोटखाई के एक बागवान के घर से गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद मौके से मिले डीएनए का मिलान नीलू से किया। डीएनए मिलान होते ही सीबीआइ ने इस मामले को सुलझा लेने का दावा किया। सीबीआइ की पूरी जांच प्रदेश हाई कोर्ट की निगरानी में हुई।

सीबीआइ के लिए यह मामला बेहद पेचीदा व चुनौतीपूर्ण था। मामले में कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं था। अपराध घने जंगल में हुआ था और आरोपी उस इलाके का न होकर बाहर का था। अपराध करने के बाद नीलू लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा था।

इससे पहले इस मामले में प्रदेश पुलिस ने छह प्रवासी मजदूरों को गिरफ्तार कर इस मामले को सुलझाने का दावा किया था। लेकिन जनता ने पुलिस के दावे को नकार दिया और असल दोषियों को पकड़ने के लिए उग्र आंदोलन चला था। इस बीच पुलिस हिरासत में गिरफ्तार किए गए एक आरोपी सूरज की संदिग्ध मौत हो गई थी।

इसके बाद प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले को सीबीआइ के सुपुर्द कर दिया। सीबीआइ ने स्थानीय पुलिस की ओर से पकड़े गए तमाम आरोपियों को निर्दोष मानते हुए छोड़ दिया था और एक आरोपी सूरज की पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौत के मामले में आइजी समेत नौ पुलिस कर्मियों को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया था। इनमें से एक आरोपी आइजी जहूर हैदर जैदी आज भी जेल में हैं।

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