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हादसों पर तय हो सबकी जिम्मेदारी

कुल्लू हादसे की जांच रिपोर्ट बताती है कि इसके लिए बस को फिटनेस प्रमाणपत्र देने वाले परिवहन अधिकारी जिम्मेदार हैं क्योंकि बस काफी पुरानी थी, बार-बार खराबी इसमें आ रही थी जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।

बढ़ते हादसों के पीछे पूरे सिस्टम का लचरपन साफ झलक रहा है।

बीरबल शर्मा

हिमाचल प्रदेश हादसों का प्रदेश बनता जा रहा है। लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत एक एनजीओ की रिपोर्ट की मानें तो दस सालों में इस देव भूमि हिमाचल में 65766 से अधिक लोग दुर्घटनाओं में घायल और मौत का शिकार हुए हैं। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है। जून 18 को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में औट लूहरी नेशनल हाइवे पर बंजार के दियोट मोड़ पर हुए निजी बस हादसे में 46 लोगों की जानें गईं तो इतने ही घायल हो गए।

कुल्लू हादसे की जांच रिपोर्ट बताती है कि इसके लिए बस को फिटनेस प्रमाणपत्र देने वाले परिवहन अधिकारी जिम्मेदार हैं क्योंकि बस काफी पुरानी थी, बार-बार खराबी इसमें आ रही थी जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। इन बढ़ते हादसों के पीछे पूरे सिस्टम का लचरपन साफ झलक रहा है। लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली, सड़कों की दुर्दशा, पानी की निकासी, खतरनाक जगहों पर क्रैश बैरियर नहीं है जबकि सीधी सपाट सड़कों पर खूब चमकते नजर आते हैं, आधुनिक बीम रेलिंग भी ऐसी ऐसी जगहों पर लगी है जहां पर इसकी जरूरत कम है मगर जहां होनी चाहिए वहां पर नहीं है।

मानवीय भूल की पराकाष्ठा देखें कि मंडी के पराशर में चालक 15 सवारियों से भरी गाड़ी को उतराई में खड़ा करके चला गया और एक बच्चे ने गेयर हिला दिया जिससे गाड़ी ढांक में जा गिरी। शिमला बस दुर्घटना में अवैध पार्किंग से सड़क तंग करके बस को कच्चे डंगे से होकर निकाला तो बस बच्चों सहित नीचे जा पहुंची। चंबा जोत पर चालक बस को लापरवाही से खड़ा करके चला गया तो बस खुद ही खिसकते हुए नीचे जा गिरी।

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