राजा की विरासत पर सबकी नजर

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस के लिए दस जनपथ के बराबर रहा ‘हॉलीलाज’ अब पहले की तरह शक्ति केंद्र रह पाएगा, यह एक बड़ा सवाल बन गया है।

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वीरभद्र सिंह। फाइल फोटो।

ओमप्रकाश ठाकुर

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस के लिए दस जनपथ के बराबर रहा ‘हॉलीलाज’ अब पहले की तरह शक्ति केंद्र रह पाएगा, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। वीरभद्र सिंह के वारिसों के लिए यह चुनौती से कम नहीं है। प्रदेश कांग्रेस ही नहीं नौकरशाही का भी एक बड़ा व ताकतवर तबका हॉलीलाज से ताउम्र जुड़ा रहा है। उनकी वफादारी हमेशा ही वीरभद्र सिंह के साथ रही थी। अब हॉलीलाज को इस बड़े वर्ग को अपने साथ जोड़े रखना चुनौती से कम नहीं होगा।

हालांकि वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत के वारिस उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने पिता के अंतिम संस्कार के दिन यह संकेत जरूर दे दिए थे कि वह उनके दिखाए रास्ते पर ताउम्र चलते रहेंगे। वे अभी युवा हैं और उनके पास ज्यादा अनुभव भी नहीं है। लेकिन अगर वह हॉलीलाज के वफादारों को अपने साथ जोड़े रख सके तो संभवत: हॉलीलाज अभी नहीं तो कुछ सालों बाद एक अलग सत्ताकेंद्र बना रह सकता है। मुख्यमंत्री रहते वीरभद्र सिंह ने अपने वफादारों का इतना तो भला कर ही रखा है कि वे उनके वारिस को शायद ही पीठ दिखा पाएं। हालांकि कड़वा सच यह भी है कि लोग सत्ता के साथ बह जाते हैं।

राहुल गांधी जब वीरभद्र सिंह को श्रद्धाजंलि देने कांग्रेस मुख्यालय आए थे उन्होंने जिस अपनेपन से विक्रमादित्य सिंह के साथ मुलाकात की उससे उन्होंने यह संदेश तो दे ही दिया है कि दस जनपथ से हॉलीलाज को संकट के समय निराश नहीं होना पड़ेगा। यह राहुल गांधी ही थे जिन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों में वीरभद्र सिंह को अलग -अलग चुनावी रैलियों में पार्टी का अगुआ बना दिया था। वीरभद्र सिंह बुजुर्ग हो चुके थे और पार्टी में उनका विरोधी खेमा भी मजबूत हो गया था। बावजूद इसके राहुल गांधी उनका हाथ पकड़ कर मंच पर खड़े दिखते थे। भाजपा की तरह राहुल गांधी ने वीरभद्र सिंह को मार्गदर्शक की मंडली में कभी नहीं रखा। इससे वीरभद्र सिंह व उनकी हॉलीलाज कांग्रेस का जलवा बरकरार रहा। यह दीगर है कि पहले वीरभद्र सिंह आलाकमान से टकराव लेने में कभी गुरेज नहीं करते थे।

अब उनके गुजर जाने के बाद हॉलीलाज कांग्रेस पर भाजपा की नजर है। भाजपा हर राज्य में विरोधी पार्टी में खलबली मचाती रही है। सीबीआइ, ईडी और अन्य एजंसियों को वह आगे करके अपना खेल रचती रहती है। कभी कांग्रेस भी ऐसा ही करती थी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हमेशा से हॉलीलाज के करीबी रहे हैं। उनके निधन से लेकर अंतिम संस्कार तक तीन बार श्रद्धाजंलि देने गए। दिल्ली से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा कुछ अरसा पहले वीरभद्र सिंह से मिलने हॉलीलाज गए थे। हाल ही में वे दिल्ली से प्रदेश के दौरे पर आए व अपना कुल्लू का दौरा छोड़ कर वह बीमार वीरभद्र सिंह का कुशलक्षेम पूछने राजधानी स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल अस्पताल पहुंच गए। वीरभद्र सिंह आइसीयू में थे तो वे उनसे मिल नहीं पाए। लेकिन उनके परिवार से उन्होंने संवाद किया।

तीन दिन बाद वीरभद्र सिंह का निधन हो गया तो नड्डा श्रद्धाजंलि देने दोबारा राजधानी पहुंच गए। यह वीरभद्र सिंह के लिए उनका सम्मान तो था ही, लेकिन यही मौके नजदीकियों को बढ़ाने वाले भी होते हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में तो कहा ही जाने लगा है कि भाजपा की नजर अब हॉलीलाज पर हैं। ऐसे में अब हॉलीलाज को तय करना है कि उसे आगे क्या करना है। हॉलीलाज में विक्रमादित्य सिंह और उनकी मां व पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ही हैं जिन्हें वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को संभालना है। अगर वे इस विरासत को संभाल पाए तो हॉलीलाज का वर्चस्व बना रहेगा। वीरभद्र सिंह के वफादार तबके को हॉलीलाज से उम्मीदें भी बहुत हंै कि अगर इसका रुतबा बरकरार रहा तो इस तबके का भी रुतबा बरकरार रहेगा।

कांग्रेस में प्रतिभा सिंह को मंडी संसदीय हलके के उपचुनाव में उतारने का मन है। या यह समझिए कि उन्हें हॉलीलाज की विरासत को कायम रखने का मौका है। कांग्रेस के पास उनके बेहतर प्रत्याशी अभी है भी नहीं। सहानुभूति की लहर उन्हें लोकसभा पहुंचा दे तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। बस उन्हें भाजपा की खलबली मचाने वाली राजनीति से बचना होगा। विक्रमादित्य सिंह व प्रतिभा सिंह अभी शोक में जरूर हैं लेकिन जमीनी हकीकत से भी वह नावाकिफ नहीं हंै। राजधानी स्थित हॉलीलाज पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का निजी आवास है और जब वे मुख्यमंत्री होते थे तो भी वे शाम को अपने परिवार के साथ इसी में रहते थे। मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओकओवर में वे केवल सरकारी कामकाज निपटाते थे।

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