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अब हिमाचल में सार्वजनिक स्थान पर नमाज पर विवाद, दक्षिणपंथी संगठनों ने पढ़ी हनुमान चालीसा!

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक भूमि पर स्थानीय मुस्लिम वर्ग के साथ ही पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल के अन्य हिस्सों से भी मुस्लिम लोग पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है।

विवाद को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। (express pic/representational image)

हिमाचल प्रदेश के ऊना में नगर पंचायत की सार्वजनिक जमीन पर मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा नमाज पढ़ने को लेकर विवाद हो गया है। दरअसल शुक्रवार को विभिन्न हिंदू संगठनों के लोगों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर नमाज वाली जगह पर हनुमान चालीसा का पाठ किया। राहत की बात ये रही कि पुलिस और स्थानीय नेताओं द्वारा मुस्लिम समुदाय से विवादित स्थल पर नमाज अदा नहीं करने की अपील की, जिसे मुस्लिम समुदाय द्वारा मान लिया गया। इससे स्थिति संभल गई। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

क्या है विवादः खबर के अनुसार, ऊना में टाहलीवाल नगर पंचायत की सार्वजनिक भूमि है, जिस पर मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज अदा की जाती है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक भूमि पर स्थानीय मुस्लिम वर्ग के साथ ही पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल के अन्य हिस्सों से भी मुस्लिम लोग पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है। ग्रामीओं का कहना है कि उन्होंने इस बारे में प्रशासन और पंचायत से भी शिकायत की थी, लेकिन किसी ने भी उनकी शिकायत पर गौर नहीं किया। जिसके बाद उन्हें खुद ही विरोध में उतरना पड़ा। हिंदू संगठनों के नेताओं का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय द्वारा नगर पंचायत की भूमि पर जबरन कब्जा कर नमाज पढ़ी जा रही है और रास्ता रोका जा रहा है। हिंदू संगठनों के नेताओं ने कहा कि हिमाचल को मेरठ, कैराना या बंगाल नहीं बनने दिया जाएगा।

हिंदू संगठनों के नेताओं ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर टाहलीवाल बाजार से लेकर विवादित स्थल तक रोष रैली निकाली। भीड़ ने इस दौरान जय श्री राम, वीर बजरंगी, वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाए। गुस्साई भीड़ ने विवादित स्थल पर मुस्लिम समुदाय द्वारा लगाया गया टैंट भी उखाड़ दिया। इसके बाद मौके पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय का कहना है कि वह साल 1984 से ही विवादित भूमि पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। साल 1986 में विभाग की खामियों के चलते इस भूमि को नगर पंचायत के अधीन कर दिया गया, जिसे ठीक कराने के लिए राजस्व विभाग धर्मशाला में केस डाला गया है। मुस्लिम समुदाय का कहना है कि जो भी कोर्ट का फैसला होगा वह मान्य होगा।

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