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वीरभद्र के लिए मुश्किलों भरा रहा बीता साल

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए यह साल काफी परेशानियों भरा रहा जब केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ मामले दर्ज करने के बाद ऐसे समय में उनके परिसरों पर छापेमारी की जब उनके घर में उनकी बेटी की शादी का समारोह चल रहा था.
Author शिमला | December 31, 2015 23:39 pm
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह। (फाइल फोटो)

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए यह साल काफी परेशानियों भरा रहा जब केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ मामले दर्ज करने के बाद ऐसे समय में उनके परिसरों पर छापेमारी की जब उनके घर में उनकी बेटी की शादी का समारोह चल रहा था। मुख्यमंत्री को आक्रामक अंदाज में उन्हें घेरने वाली भाजपा से भी निपटने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। राज्य में इस साल कई हादसे हुए और उच्च न्यायालय व राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जनहित में कई फैसले पारित किए जिन पर प्रभावित लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई।

भाजपा का ‘वीरभद्र हटाओ, हिमाचल बचाओ’ अभियान चलाए जाने के बीच ही सीबीआइ ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के लिए मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया और उनके परिसरों पर छापे मारे। प्रवर्तन निदेशालय ने भी आगे बढ़ते हुए उनके खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया। साल भर वीरभद्र सिंह अदालतों में खुद को बचाने के लिए जहां कानूनी लड़ाई लड़ते रहे तो वहीं राजनीतिक मोर्चे पर उन्हें भाजपा से दो-दो हाथ करने पड़े। हालांकि, उन्होंने अकेले अपने दम पर दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ी और डटे रहकर 25 दिसंबर को अपनी सरकार के तीन साल पूरे किए।

उन्होंने भाजपा के हमलों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटों की कथित संपत्तियों की जांच के लिए सतर्कता और भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो के विशेष जांच दल का गठन किया। राज्य में करीब छह बड़े हादसों में 100 से अधिक लोग मारे गए। शिमला-कालका टॉय ट्रेन के परवानू के पास पटरी से उतर जाने के कारण दो ब्रिटिश महिला पर्यटकों की मौत भी सुर्खियों में रही।

इस साल एनजीटी के रोहतांग दर्रे में वाणिज्यिक गतिविधियों पर लगाई गई रोक भी काफी समय तक चर्चाओं में रही जहां डीजल और पेट्रोल की गाड़ियों की संख्या को सीमित कर दिया गया और साथ ही शिमला में पूर्ण खामोशी क्षेत्र बनाए जाने का सुझाव दिया गया। एनजीटी ने राजधानी में कुछ चुनिंदा सड़कों पर प्रदूषण फैलाने पर वाहनों पर 500 रुपए का जुर्माना लगाने का भी सुझाव दिया।

एनजीटी ने रोहतांग, सोलांग और मढ़ी में घुड़सवारी, स्नो बाइकिंग, पैराग्लाइडिंग, टायर ट्यूब गेम और स्नो स्कूटर जैसी गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों पर सख्त रुख अपनाया और सरकार को ऐसे सभी कब्जों को हटवाने का निर्देश दिया।

लंदन में अदालत में लड़ी गई जॉर्ज क्रास की कानूनी लड़ाई भी इस साल समाप्त हुई और इस पदक को बिलासपुर की ब्रह्मा देवी को सौंप दिया गया जिनके पति नायक कृपा राम को मरणोपरांत इस सम्मान से नवाजा गया था। इस साल वीरभद्र मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार भी हुआ जिसमें बंजार से कांग्रेस विधायक करण सिंह को सरकार में शामिल किया गया।

दिसंबर 2014 में कुल्लू में सुल्तानपुर मंदिर से भगवान रघुनाथजी की प्राचीन प्रतिमाओं की चोरी का मामला भी सुर्खियों में रहा। हालांकि, पुलिस ने इसे जल्द ही सुलझा लिया लेकिन मुख्यमंत्री के सराहन स्थित पुश्तैनी मकान शांति कुंज में चोरी की घटना से सरकार को शर्मसार होना पड़ा। हालांकि बाद में चोर को पकड़ लिया गया और चोरी किया गया सारा सामान भी उससे बरामद कर लिया गया।

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