Himachal News: वो शख्स जो हीरो बना, वहीं विलेन भी साबित हो सकता है और हिमाचल प्रदेश के परवेश शर्मा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। आत्मरक्षा के तहत अकेले एक तेंदुएं को मारने वाले परवेश शर्मा को हिमाचल प्रदेश के वन विभाग ने हीरो बताते हुए 5000 रुपये का इनाम दिया। वहीं 24 घंटे के अंदर ही परवेश पर वन्यजीव की हत्या के मामले में केस दर्ज किया गया है।

दरअसल,यह पूरी घटना हिमाचल के सोलन के सरली गांव की है। यहां अपनी दिनचर्या के अनुसार, आईटीआई का द्वितीय वर्ष का छात्र परवेश शर्मा दूध लेने के लिए अपने घर से निकला। अचानक, झाड़ियों में छिपा एक तेंदुआ पीछे से उस पर झपटा और उसकी गर्दन पर वार करने लगा। अचानक हुए हमले से घबराकर परवेश ने पलटवार किया।

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तेंदुए से हुआ था युवक का मुकाबला

तेंदुए ने अगले 10-12 मिनट परवेश के चेहरे और शरीर पर अपने पंजे गड़ाता रहा और अपने दांत गड़ाने की कोशिश करता रहा। इसके चलते परवेश ने उस मादा तेंदुए का गला घोंटने का प्रयास किया। परवेश ने तेंदुए के जबड़े पकड़ लिए और पास पड़े एक पत्थर को उठाकर उसकी गर्दन, सिर और पंजों पर बार-बार वार किया। परवेश ने लाठी से भी उस पर वार किए। परवेश के लगातार हमले के बाद तेंदुआ हार गया। उसकी मदद के लिए चिल्लाने की आवाज सुनकर उसके पिता मौके पर पहुंचे और परवेश को इलाज के लिए पास के सरकारी अस्पताल ले गए।

जब लोगों को ये बात पता चली कि 18 वर्षीय युवक ने जंगली जानवर को मार दिया, तो आस-पास के लोग उससे मिलने आने लगे, क्योंकि ये निश्चित तौर पर एक अकल्पनीय घटना है। वन विभाग ने यह भी स्वीकार किया कि वन्यजीव की मृत्यु आत्मरक्षा में हुई थी और परवेश को 5,000 रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की। यह शोहरत दो दिन भी नहीं टिक पाई।

वन्यजीव कानून के तहत दर्ज हुआ केस

11 मार्च को परिवार को एक और झटका लगा। वन अधिकारी हीरा लाल की शिकायत के आधार पर परवेश पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत पशु हत्या का मामला दर्ज किया गया। गुरुवार को परवेश और उनके पिता बालक राम को बयान दर्ज कराने के लिए अर्की पुलिस स्टेशन में तलब किया गया था।

परवेश शर्मा के पिता बालक राम ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब उनके बेटे ने मदद के लिए पुकारा, तो वह भी लाठी लेकर उसकी मदद के लिए दौड़े। उन्होंने कहा, “जब तक मैं पहुंचा, तेंदुआ मर चुका था। मेरे बेटे ने जो कुछ भी किया, वह आत्मरक्षा में किया। मुझे समझ नहीं आता कि एफआईआर दर्ज करने की क्या जरूरत थी, जबकि वन विभाग ने पहले ही घटना को स्वीकार कर लिया था और मेरे घायल बेटे को 5,000 रुपये का मुआवजा भी दे दिया था।”

पुलिस ने युवक और उसके पिता से की पूछताछ

उन्होंने आगे बताया कि पुलिस स्टेशन में मौजूद वन अधिकारियों ने कहा कि वे केवल औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं लेकिन मुझे लगता है कि वे हमें फिर से बुलाएंगे। परवेश ने बताया कि आम तौर पर डरे हुए लोग जिस तरह भागते हैं, उसने पहले भागने की कोशिश की। लेकिन जब तेंदुए ने मुझ पर हमला किया, तो मुझे खुद को बचाना पड़ा। मैंने उसे उसके जबड़े से पकड़ा और ज़मीन पर पटक दिया। मैंने आत्मरक्षा में पत्थरों और लाठियों का इस्तेमाल किया।

अर्की संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) राज कुमार ने पुष्टि की कि विभाग ने प्रक्रिया के अनुसार एफआईआर दर्ज कर ली है। उन्होंने कहा, “हमने परवेश शर्मा के खिलाफ घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज की है। आत्मरक्षा में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई लाठी घटनास्थल से बरामद कर ली गई है और पुलिस जांच कर रही है।”

प्रोटोकॉल का हो रहा पालन

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेंदुए के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। विभाग का कहना है कि जानवर की मौत लाठियों से वार किए जाने के कारण हुई है, लेकिन सटीक कारण फोरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। अर्की रेंज अधिकारी (वन्यजीव) अशोक कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि जानवर की उम्र मुश्किल से डेढ़ साल थी।

उन्होंने कहा कि हालांकि हम मानते हैं कि जानवर को आत्मरक्षा में मारा गया, लेकिन हम केवल प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। जब भी मानव-वन्यजीव मुठभेड़ में किसी जानवर की मृत्यु होती है, तो हमें प्रोटोकॉल का पालन करना होता है, जिसमें एफआईआर दर्ज करना और पोस्टमार्टम कराना शामिल है। तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-1 में संरक्षित जानवर है। उन्होंने आगे कहा कि इसका परवेश पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अधिकारियों ने किया कानून का उल्लेख

कानून की आगे व्याख्या करते हुए, डीएफओ गुरहर्ष सिंह ने कहा कि यद्यपि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में धारा 11 (2) सहित कुछ प्रावधान ‘आत्मरक्षा’ से संबंधित हैं, लेकिन मुख्यतः ये विशेष नामित वन्यजीव, पर्यावरण न्यायालय हैं जो यह तय करते हैं कि कृत्य आत्मरक्षा में किया गया था या दुर्भावना से। हालांकि अधिनियम की धारा 11 के खंड 2 में लिखा है कि सद्भावना से किसी जंगली जानवर को अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की रक्षा में मारना या घायल करना अपराध नहीं होगा।

परवेश के पिता बालक राम ने बताया कि पहले इस इलाके में तेंदुए के दिखने की एक-दो ही घटनाएं दर्ज होती थीं, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पास का बिउली जंगल पहाड़ी की चोटी पर है और हमारा गांव सरली निचले इलाके में है। पिछले एक हफ्ते में एक तेंदुए ने दो लोगों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की और हमारे गांव से दो-तीन आवारा कुत्ते उठा ले गया।

यह इस इलाके में तेंदुए के हमले की पहली घटना नहीं थी। 6 मार्च को एक बाइक सवार पर हमला हुआ था, जिसके बाद ग्रामीणों ने वन अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई और उनसे पिंजरे लगाने का अनुरोध किया। इसके पहले दिसंबर 2025 में, मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र के चंद्याल, बध्याल और मालवाना गांवों में तेंदुए के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए। ग्रामीणों ने तेंदुए को मार डाला था।

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