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Himachal by-election: गद्दी बनाम गद्दी के खेल में बागियों का अड़ंगा

भाजपा से राकेश चौधरी और कांग्रेसी कूचे से निकल पुनीश पाधा के मैदान के डटने से पहले से ही हलकान दोनों दलों के लिए टिकट कटे नेता परेशानी का सबब बने हुए हैं। जाहिर है, कांगड़ा जिले के धर्मशाला की यह अग्निपरीक्षा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के लिए साख का सवाल भी बन गई है।

Author धर्मशाला | Published on: October 9, 2019 2:08 AM
भाजपा से राकेश चौधरी और कांग्रेसी से पुनीश पाधा

सुभाष मेहरा

Himachal by-election: धर्मशाला हलके की उपचुनावी जंग में बागियों की रुसावाइयां तोड़ने में नाकाम रहे भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों की फि लहाल पार्टी भितरघात ने परेशानियां बढ़ा रखी हैं। भाजपा से राकेश चौधरी और कांग्रेसी कूचे से निकल पुनीश पाधा के मैदान के डटने से पहले से ही हलकान दोनों दलों के लिए टिकट कटे नेता परेशानी का सबब बने हुए हैं। जाहिर है, कांगड़ा जिले के धर्मशाला की यह अग्निपरीक्षा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के लिए साख का सवाल भी बन गई है।

एबीवीपी के जरिए भाजपा में आए विशाल नैहरिया और एनएसयूआइ के जरिए कांग्रेस की ओर से पहली बार चुनावी राजनीति में उतरे विजय इंद्र करण का नाता गद्दी समुदाय से है। जाहिर है, गद्दी बनाम गद्दी के बीच होने जा रहे इस दंगल में राजीव भारद्वाज, संजय शर्मा, उमेश दत्त, राकेश चौधरी, विपिन नैहरिया और राकेश शर्मा जैसी भाजपाई फौज के बीच टिकट ले उड़े विशाल के लिए मुश्किलें अभी बरकरार हैं। वो इसलिए क्योंकि भारद्वाज के अलावा बाकी के रूठे भाजपा नेता समर्थकों संग कोपभवन से बाहर नहीं निकले हैं। जबकि टिकट के मसले पर बेटे शाश्वत कपूर की अनदेखी के बाद अंदरखाने नाराज चल रहे सांसद किशन कपूर गांधी संकल्प यात्रा के लिए हलके से बाहर निकल गए हैं।

इधर महापौर देवेंद्र जग्गी की नाराजगी तोड़ कांग्रेस ने उन्हें एन मौके पर पार्टी के प्रदेश महासचिव के ओहदे पर बिठा कर प्रचार के लिए राजी कर लिया है। मगर पार्टी में निगाहें अभी भी उनके समर्थकों की अंदरूनी कारगुजारी पर टिकी हैं। जग्गी के अलावा पाधा जैसे टिकट तलबगारों के बीच गद्दी प्रत्याशी विजय को जंग में उतारने के कांग्रेसी निर्णय के बाद भाजपा ने नैहरिया के जरिए बिरादरी कार्ड के तौर पर कांग्रेस की जिस तरीके से घेरेबंदी की, उससे बाकी के बाहुल समुदाय के लोग पार्टी से खफ ा हैं। जाहिर है, कांग्रेस के बनिस्बत अंदरूनी फू ट की आवृत्ति ने भाजपा की धुकधुकी बढ़ा रखी है।

इस हलके में अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल 38 हजार गद्दी और गोरखा, 14 हजार गद्दी, आठ हजार ब्राहमण, छह हजार राजपूत और बाकीअन्य समुदाय के लोग हैं। अभी तक धर्मशाला में एक छत्र राज करते आए किशन कपूर की अंदरूनी नाराजगी और दरकिनार किए जा रहे उनके समर्थक भी नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं। जय राम की लाज बचाने को धर्मशाला में डटे मंत्री से लेकर भाजपा के तमाम विधायकों के सामने पहले नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के मोर्चा संभालने के बाद अभी कांग्रेस के मुखिया कुलदीप राठौर ने कमान संभाली है। चंद रोज के बाद जय राम भी यहां डेरा डालने वाले हैं, तब देखना होगा भाजपा बागी कोपभवन से बाहर निकलते हैं या नहीं।

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