हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में एक 18 साल के छात्र पर तेंदुए ने हमला कर दिया। हमले से घबराने के बजाय छात्र ने बिना किसी हथियार के भी अपना बचाव किया और पत्थरों से जानवर के जबड़े तोड़कर उसे मार डाला। इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) के दूसरे साल के इस छात्र को सोमवार को तुरंत अर्की अस्पताल ले जाया गया और इलाज के बाद उसी दिन छुट्टी दे दी गई।

दूध लेने के लिए खेतों से गुजर रहा था

वन अधिकारियों ने उसे तुरंत राहत के तौर पर और उसकी बहादुरी को देखते हुए 5,000 रुपये दिए। यह घटना सोमवार सुबह करीब 7 बजे हुई, जब प्रवेश शर्मा अर्की के सरली गांव में दूध लेने के लिए खेतों से गुजर रहा था। उस भयानक घटना के बारे में बताते हुए प्रवेश ने कहा कि हमला उसके घर से कुछ ही मीटर की दूरी पर हुआ। उसने तेंदुए के जबड़े पकड़ लिए और पूरी कोशिश की कि जानवर उसकी गर्दन न पकड़ पाए।

उसने बताया कि 10 मिनट से ज्यादा चली इस लड़ाई के दौरान वह लगातार मदद के लिए चिल्लाता रहा और आखिर में उसने पत्थरों से तेंदुए के जबड़े और पंजे तोड़ दिए। उसके हाथों, कंधों, पैरों, बांहों और चेहरे पर कई चोटें आईं। उसे अर्की अस्पताल ले जाया गया और इलाज के बाद उसी दिन छुट्टी दे दी गई।

यह इस इलाके में तेंदुए का पहला हमला नहीं था। 6 मार्च को एक बाइक सवार पर हमला हुआ था, जिसके बाद गांव वालों ने वन अधिकारियों से शिकायत की थी और उनसे जाल वाले पिंजरे लगाने को कहा था। दिसंबर 2025 में, मंडी जिले के बल्ह इलाके के चंड्याल, बध्याल और मालवाना गांवों में तेंदुए के हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और नौ अन्य घायल हो गए थे। उस तेंदुए को गांव वालों ने मार डाला था।

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इसी तरह के एक मामले में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक मां अपने बच्चे को मौत के मुंह से वापस वे आई। बच्चा जिसे तेंदुआ अपने मजबूत जबड़ों में दबोच कर भाग रहा था को बचाने के लिए मां आगे आई। महिला ने साहस दिखाकर तेंदुए से लोहा लिया। परिणामस्वरूप जंगली जानवार बच्चे को लहूलुहान स्थिति में छोड़कर भागने को विवश हो गया। पूरी खबर पढ़ें…

कानून क्या कहता है?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारतीय कानून तेंदुए जैसे संरक्षित जानवरों की हत्या को गंभीर अपराध मानता है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति की जान पर बन आए और आत्मरक्षा में ऐसा कदम उठाना पड़े, तो कानून में इसके लिए सीमित छूट भी दी गई है। हालांकि हर मामले की जांच जरूरी होती है।

जांच के दौरान अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि क्या तेंदुए ने वास्तव में हमला किया था, क्या व्यक्ति के पास बचने का कोई दूसरा रास्ता था और क्या घटना अचानक हुई थी। यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि व्यक्ति ने सचमुच अपनी जान बचाने के लिए यह कदम उठाया, तो आमतौर पर उस पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती।

वहीं अगर जांच में यह सामने आता है कि तेंदुए को जानबूझकर मारा गया या यह शिकार का मामला था, तो संबंधित व्यक्ति पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में जेल की सजा के साथ-साथ भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।