हिमाचल हाई कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे आरोपी को जमानत दी, जिस पर कथित तौर पर 16 साल की नाबालिग से शादी करने और उससे एक बच्चा पैदा करने का आरोप था। अदालत ने यह टिप्पणी की कि अगर आरोपी को हिरासत में रखा जाता है तो नाबालिग मां को बच्चे को अकेले पालना पड़ेगा, जिससे परिवार में दिक्कतें आएंगी और बच्चे को मानसिक आघात पहुंचेगा।
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने जमानत देते हुए कहा, ‘इस अदालत को ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता कि जमानत मांगने वाले व्यक्ति को मुकदमे के दौरान अनिश्चितकाल तक जेल में रखा जाए। क्योंकि ऐसा होने पर, सबसे ज्यादा तकलीफ पीड़ित (लड़की) को ही होगी, जिसे नाबालिग बच्चे को अकेले ही पालना पड़ेगा। वह प्यार की वजह से उस व्यक्ति के साथ है।’
बता दें कि पुलिस ने 15 जनवरी 2026 को एक अस्पताल से मिली जानकारी के आधार पर उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। अस्पताल ने बताया था कि एक नाबालिग लड़की को बच्चे के जन्म के लिए वहां लाया गया है। पुलिस ने नाबालिग से शादी करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया था। हाई कोर्ट में आरोपी व्यक्ति ने जमानत याचिका लगाई। हाई कोर्ट ने पाया कि लड़की, जो अभी भी नाबालिग है, ने पहले ही याचिकाकर्ता से शादी कर ली थी।
अदालत ने कहा कि लड़की के बयान से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि उसके साथ उसकी मर्जी के बिना कोई यौन उत्पीड़न हुआ हो। बल्कि, वह अपनी मर्जी से और प्यार की वजह से ही याचिकाकर्ता के साथ रहने आई थी। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जब लड़की ने साफ तौर पर यह बात मान ली है कि उसने याचिकाकर्ता से शादी की है और उनकी शादी से एक बच्चा भी पैदा हुआ है, तो अभियोजन पक्ष का मुकदमा अपने आप ही कमजोर पड़ जाएगा।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी बाल तस्करी की ‘मंडी’ बन गई है। अदालत ने रेलवे और पुलिस को उस जनहित याचिका पर जवाब देने को कहा, जिसमें रेलवे स्टेशनों और आसपास के क्षेत्रों में बाल तस्करी की घटनाओं पर चिंता जताई गई है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर रेलवे, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को नोटिस जारी किया। पूरी खबर पढ़ें…
