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दिल्ली सरकार ने दिए थे दो शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेश, हाई कोर्ट ने लगाई रोक

सिसोदिया के इस निर्देश के बाद तीन जनवरी को दिल्ली के उच्च शिक्षा निदेशक अग्रवाल ने विश्वविद्यालय को पत्र लिख आदेश पर 10 दिनों के अंदर अनुपालन रिपोर्ट उपमुख्यमंत्री दफ्तर को भेजने के लिए कहा।

Author January 14, 2019 2:13 AM
इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय

गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आइपीयू) से संबद्ध एक कॉलेज में सात दिसंबर को आयोजित बीए (एलएलबी) के तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछे गए कथित ‘सांप्रदायिक’ प्रश्न के मद्देनजर दिल्ली सरकार की ओर से दो शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेश पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। दिल्ली सरकार के उच्च शिक्षा निदेशक जेपी अग्रवाल के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय ने दो शिक्षकों की बर्खास्तगी का आदेश दिया था। अग्रवाल के मुताबिक इस संबंध में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के निर्देश पर उच्च शिक्षा सचिव ने सांप्रदायिक प्रश्न मामले की जांच की थी।

यह जांच रिपोर्ट सिसोदिया के सामने रखी गई और उन्होंने (सिसोदिया ने) 31 दिसंबर, 2018 को आदेश जारी किया कि यह गंभीर मामला है। इसमें भारतीय संविधान की मूल भावना का उल्लंघन किया गया है, उसे देखते हुए सिर्फ प्रेस बयान जारी करने या दोषी व्यक्ति को कुछ सेमेस्टर तक प्रश्नपत्र बनाने से प्रतिबंधित करने से कुछ नहीं होने वाला है। इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए। इतनी बड़ी चूक के बाद उसे छिपाने की कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सिसोदिया के इस निर्देश के बाद तीन जनवरी को दिल्ली के उच्च शिक्षा निदेशक अग्रवाल ने विश्वविद्यालय को पत्र लिख आदेश पर 10 दिनों के अंदर अनुपालन रिपोर्ट उपमुख्यमंत्री दफ्तर को भेजने के लिए कहा। विश्वविद्यालय सूत्रों के मुताबिक इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय ने दोनों शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया। दोनों शिक्षक पिछले गुरुवार को इस मामले को लेकर हाई कोर्ट पहुंचे थे, जहां अदालत ने उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगा दी। प्रश्न से संबंधित मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर माफी मांगी थी और कहा था कि ‘उस प्रश्न से किसी व्यक्ति, समुदाय या समाज के किसी भी सदस्य की भावना को ठेस पहुंची हो तो हमें बिना शर्त उनसे मांफी मांगते हैं’। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस प्रश्न को पूरी तरह से रेकॉर्ड से हटा दिया था। उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा था कि भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। आइपी विश्वविद्यालय धर्मनिरपेक्षता, विविधता और बहुसंस्कृतिवाद में विश्वास करता है।

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