ताज़ा खबर
 

बड़े भाई की मौत के बाद की थी राजनीति में एक्सीडेंटल एंट्री, मुख्यमंत्री रहते हार गए चुनाव, जानें हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर

हेमंत सोरेन की राजनीति में एंट्री साल 2009 में हुई। इसके कुछ माह बाद ही वह राज्यसभा सांसद बन गए।

Hemant Soren, jharkhand cmझारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो-PTI)

पूर्व पीएम राजीव गांधी की जिस तरीके से राजनीति में एक्सीडेंटल एंट्री हुई थी। झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन का सफर भी राजनीति में कुछ ऐसा ही अप्रत्याशित रहा है। दरअसल बड़े भाई दुर्गा सोरेन की असमय हुई मौत और पिता शिबू सोरेन के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए हेमंत राजनीति को लेकर गंभीर हुए और फिलहाल राज्य के सीएम हैं। 10 अगस्त 1975 को जन्मे हेमंत सोरेन इंजीनियरिंग ड्रॉप आउट हैं।

हेमंत सोरेन की राजनीति में एंट्री साल 2009 में हुई। इसके कुछ माह बाद ही वह राज्यसभा सांसद बन गए। हालांकि जनवरी 2010 तक ही वह राज्यसभा सांसद रहे और इसके बाद वह इस्तीफा देकर झारखंड में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टी सीएम बन गए। इस सरकार में जेएमएम सहयोगी पार्टी थी। हालांकि दो साल बाद 2012 में ही भाजपा और जेएमएम के रिश्तों में दरार आ गई और आखिरकार जनवरी 2013 में अर्जुन मुंडा की सरकार गिर गई। सरकार गिरने के बाद झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

इस दौरान ही हेमंत सोरेन का राजनीति में असल कद दिखाई दिया, जब उन्होंने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से बातचीत शुरू कर दी। हालांकि कांग्रेस तैयार नहीं हुई और झारखंड में राष्ट्रपति शासन लग गया। जिस पर हेमंत सोरेन की उनकी पार्टी के भीतर भी खूब आलोचना हुई। लेकिन हेमंत से इस आलोचना से डिगे नहीं और राज्य की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशों में जुटे रहे।

इसका फायदा भी मिला और 6 माह बाद ही हेमंत सोरेन ने कांग्रेस और राजद के समर्थन से सत्ता में वापसी कर ली और जुलाई 2013 को हेमंत सोरेन पहली बार झारखंड के सीएम चुने गए। करीब डेढ़ साल तक उनकी सरकार सत्ता में रही।

साल 2014 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर चली और इसके चलते भाजपा की एक बार फिर सत्ता में वापसी हुई। हालांकि इस दौरान हेमंत सोरेन विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर सरकार को घेरते रहे। इसके साथ ही जनता के बीच भी अपनी पकड़ बनाते रहे। उनकी इन्हीं कोशिशों का असर रहा कि साल 2019 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर हेमंत सोरेन का जादू चला और उनकी पार्टी ने कांग्रेस और राजद के साथ मिलकर पूर्ण बहुमत हासिल किया।

उल्लेखनीय है कि 2013 में सीएम बनने के बाद जब हेमंत सोरेन 2014 का विधानसभा चुनाव दो सीटों दुमका और बरहेट से लड़े लेकिन हेमंत सोरेन दुमका सीट बचा नहीं पाए और चुनाव हार गए। हालांकि बरहेट से वह जीतने में सफल रहे।

शिबु सोरेन के बाद झामुमो की गद्दी संभालने वाले हेमंत सोरेन को पार्टी में काफी विरोध का सामना भी करना पड़ा लेकिन हेमंत विरोध के बावजूद मजबूत होकर उभरे। बता दें कि झामुमो के तीन बड़े नेता स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू और साइमन मरांडी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। हालांकि जब झामुमो ने सत्ता में वापसी की तो स्टीफन मरांडी और साइमन मरांडी अब वापस पार्टी में लौट आए हैं।

2019 के विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने फिर से दुमका और बरहेट से चुनाव लड़ा और इस बार दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहे। हेमंत की पत्नी कल्पना एक गृहणी हैं और उनके दो बच्चे हैं।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 मित्रों के लिए क्या-क्या करती आ रही भाजपा सरकार- नरेंद्र मोदी पर राहुल गांधी का एक और वार
2 बिहार में संक्रमितों की संख्या 82,741 पहुंची, रिकवरी रेट 65.43 प्रतिशत
3 जैसे हमारे लोगों की लाश नहीं देते, वैसे हमने भी फौजी को मारकर दफना डाला- कश्मीर में आतंकी ने जारी किया ऑडियो, भाजपा नेताओं को चुन-चुन कर मार रहे
ये पढ़ा क्या?
X