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दिल और डायबिटीज के मरीज तबीयत बिगड़ने पर तोड़ सकते हैं रोजा

डॉ. अली ने कहा कि उन्हें एक या दो खजूर से रोजा खोलना चाहिए जिससे उन्हें जरूरी ऊर्जा, विटामिन और काबोहाईड्रेट आदि मिल जाएगा।
Author नई दिल्ली | June 9, 2016 04:35 am
रमजान में रोजा के दौरान जामा मस्ज़िद की तस्वीर। (फाइल फोटो)

फतेहपुरी शाही मस्जिद के इमाम मौलाना मुफ्ती मुकर्रम अहमद का कहना है कि दिल, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित रोजेदार तबीयत बिगड़ने पर अपना रोजा तोड़ सकते हैं और इस्लाम में उन्हें ऐसा करने की रियायत दी गई है। मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने कहा कि रोजा रखने की वजह से अगर बीमारी बढ़ने का डर हो तो इस्लाम में इससे रियायत दी गई है और ऐसे रोजादार रोजा तोड़ भी सकते हैं। केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद् में शोधकर्ता डॉ. सैयद अहमद खान ने भी बताया कि जो लोग दिल, उच्च रक्तचाप और मधुमेह की बीमारियों से पीड़ित हैं, वे डॉक्टरों से सलाह मशविरा कर के रोजा रख सकते हैं।

मधुमेह के मरीज दो तरह के होते हैं एक इंसुलिन पर निर्भर और दूसरे दवाइयों पर। अगर मधुमेह के मरीजों की शुगर नियंत्रित है और वे सुबह शाम इंसुलिन या दवाइयां लेते हैं तो वह रोजा रख लें और इंसुलीन या दवाइयां सेहरी में (सूरज निकलने से पहले खाया जाने वाला खाना) और इफ्तार (रोजा तोड़ने का समय) में लें। मधुमेह के मरीजों को दोपहर के बाद अपने रक्त में ग्लूकोज की जांच करनी चाहिए। अगर इसका स्तर 100-200 के बीच है तो ठीक है लेकिन 75 या इससे नीचे जाता है तो उन्हें पेरशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में उन्हें अपना रोजा तोड़ देना चाहिए और तुरंत कुछ मीठा खा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्त में ग्लूकोज कम होने से चक्कर आ सकते हैं और चलने में दिक्कत होती है।

रोजा तोड़ने के बाबत इस्लामिक विद्वान और फतेहपुरी शाही मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुकर्रम ने कहा कि रोजा रखने की वजह से अगर बीमारी बढ़ने का डर है तो इस्लाम में इससे रियायत दी गई है और रोजा तोड़ा भी जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘इस्लाम में ऐसी गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी रोजा रखने से रियायत दी गई है जिन्हें डॉक्टरों से रोजा नहीं रखने की सलाह दी हो।

मौलाना मुकर्रम ने कहा कि रोजा रखने से राहत बहुत बूढ़े लोगों और मुसाफिरों को भी दी गई है लेकिन जो रोजा नहीं रख सकते हैं उन्हें इसका कुफवारा गरीबों को देना चाहिए यानी दो किलो 45 ग्राम गेहूं या इसके बराबर के पैसे। केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद् के हकीम डॉक्टर मुबारक अली ने बताया कि मधुमेह के मरीजों को सेहरी और इफ्तार में खाने पीने में परहेज करना चाहिए। उन्हें ऐसी गिजा लेनी चाहिए जो कम चिकनी हो और जल्दी हजम हो जाएं। साथ में जौ और चना जैसी फाइबर से भरपूर चीजें लें और अपनी खुराक में सलाद को भी शामिल करें। मरीजों को इफ्तार के वक्त एकदम से ज्यादा खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उनके शुगर का स्तर बढ़ जाएगा।

डॉ. अली ने कहा कि उन्हें एक या दो खजूर से रोजा खोलना चाहिए जिससे उन्हें जरूरी ऊर्जा, विटामिन और काबोहाईड्रेट आदि मिल जाएगा। मधुमेह के मरीजों को सूखे मेवे जैसे अखरोट, बादाम आदि के शेक लेने चाहिए। रोगियों को कॉल्ड ड्रिंक बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए क्योंकि यह उनके लिए जहर का काम करेगी। उन्हें आम, केला, खरबूजा, तरबूज और अन्य मीठे फलों का सेवन करने से बचना चाहिए। इनकी जगह वे अमरूद, पतीता, आलूबुखारा, अंगूर और जामुन ले सकते हैं। मधुमेह के रोगियों और अन्य रोजेदारों को भी ज्यादा शारीरिक गतिविधियां नहीं करनी चाहिए और दिन में कम से कम एक घंटा जरूर आराम करना चाहिए।

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