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किडनी गैंग का सरगना गिरफ्तार, 10 डॉक्टरों से होगी पूछताछ

किडनी व्यापार का भंडाफोड़ होने के चार दिन बाद मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए मामले में मुख्य सरगना टी राजकुमार राव को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया।

Author नई दिल्ली | June 8, 2016 03:00 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

किडनी व्यापार का भंडाफोड़ होने के चार दिन बाद मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए मामले में मुख्य सरगना टी राजकुमार राव को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया। उसे ट्रांजिट रिमांड पर बुधवार को दिल्ली लाया जाएगा। इससे पहले मंगलवार दिन में इसमें शामिल दो महिलाओं सहित तीन को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने कहा कि इस मामले में 10 डाक्टरों से पूछताछ की जाएगी। मंगलवार को चारों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब कुल नौ लोग गिरफ्त में आ गए हैं।

दक्षिण-पूर्व क्षेत्र के संयुक्त आयुक्त आर पी उपाध्याय ने बताया कि मंगलवार देर शाम करीब 40 साल के राव को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे नेपाल, श्रीलंका और इंडोनेशिया में इसी तरह के गिरोहों से जुड़ा माना जाता है। उसे कोलकाता के एक अदालत में पेश किया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जाएगा।

जलंधर, कोयंबटूर और हैदराबाद में इसी तरह के गिरोह चलाने के लिए जांच के घेरे में आए राव की पहचान रैकेट में बिचौलिये से पूछताछ के बाद हुई और उसकी तलाश में कई राज्यों में पुलिस दल भेजने के बाद गिरफ्तारी के रूप में सफलता मिली। पुलिस ने कहा कि मामले में 10 डॉक्टरों से पूछताछ की जा सकती है।

अधिकारी ने कहा कि अपोलो अस्पताल में प्रतिरोपण सर्जरी के लिए आंतरिक आकलन समिति में शामिल सभी दस डॉक्टरों से पूछताछ की जाएगी। समिति में अस्पताल में काम करने वाले वरिष्ठ डॉक्टर, स्वतंत्र डॉक्टर और एक सरकारी डॉक्टर शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक एसआइटी को गिरोह से जुड़े राजधानी के एक वरिष्ठ नेफ्रोलाजिस्ट के नाम की भी जानकारी मिली है। संदेह है कि किडनी प्रतिरोपण की व्यवस्था गिरोह से जुड़े लोगों ने की, जबकि किडनी प्रतिरोपण अपोलो अस्पताल के चिकित्सक ने किया। हालांकि अभी तक नेफ्रोलाजिस्ट की मंशा साबित करने का कोई साक्ष्य हाथ नहीं लगा है।

इससे पहले मंगलवार दिन में पुलिस ने एक विवाहित जोड़े के साथ ही एक महिला को भी गिरफ्तार किया। सभी की पहचान रैकेट से जुड़े किडनी डोनरों के तौर पर की गयी है। गिरफ्तार लोगों की पहचान कानपुर के रहने वाले पति-पत्नी उमेश और नीलू साथ ही पिछले हफ्ते गिरफ्तार पांच आरोपियों में से एक की पत्नी ममता उर्फ मौमिता के तौर पर की गयी है।

पुलिस पूछताछ के दौरान उमेश और नीलू ने पुलिस से कहा कि वे लोग किडनी रैकेट के तहत एक विशेष गिरोह के लिए काम करते थे। बताया जा रहा है कि गिरोह के सदस्यों ने तीनों डोनरों को किडनी देने के लिए साढ़े चार-चार लाख रुपए दिए थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी किडनी बेची क्योंकि उन्हें अपने नाबालिग बेटे के पैर की सर्जरी के लिए पैसे की तत्काल जरूरत थी। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आयी कि तीनों ने दूसरे नाम से किडनी डोनेट किया था। उमेश ने अप्रैल में जबकि ममता और नीलू ने मई में किडनी डोनेट किया था। हांलाकि पुलिस अभी नामों पर अपनी मुहर नहीं लगा रही है।

जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि जब उन्हें अपनी किडनी बेचे जाने की वास्तविक कीमत पता चली तो उन्होंने खुद को ठगा महसूस किया। तीसरी आरोपी ममता ने दरअसल पुलिस को किडनी रैकेट तक पहुंचाया।

जिस दिन इस मामले का भंडाफोड़ हुआ था, उस दिन ममता को अपने पति देवाशीष मौलिक के साथ तीखी नोंकझोंक करते देखा गया था। जब पुलिस मामले में फोन आने के बाद वहां पहुंची तो वह पूरा मामला सुनकर हक्की बक्की रह गयी। ममता ने देवाशीष पर अपनी किडनी बेचे जाने के बाद मिली राशि को लेकर ठगे जाने का आरोप लगाया। अधिकारी के अनुसार जांच के दौरान पता चला कि देवाशीष ने पहले खुद की किडनी देने की पेशकश की थी लेकिन शारीरिक रूप से योग्य नहीं पाए जाने के बाद उसने अपनी पत्नी को ऐसा करने के लिए मना लिया।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस की तीन विशेष टीम सोमवार को देर रात कोलकाता और बिहार के लिए रवाना हुई है। टीम के सदस्य इस दौरान कोलकाता और बिहार के कुछ शहरों में उन मरीज और डोनरों की तलाश करेंगे जिन्होंने इस गिरोह के सदस्यों से संपर्क कर किडनी प्रत्यारोपण कराया था। इसके अलावा कई अन्य राज्यों में भी पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं और जल्द ही कुछ और गिरफ्तारी होनी तय है।

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