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सपा-बसपा गठबंधन से निपटने पर झड़ापिया बोले- क्या आप इतिहास भूल गए? मेरा काम पार्टी को सिर्फ सफलता दिलाना

अमित शाह ने पिछले हफ्ते ही बीजेपी यूपी की कमान गुजरात के पूर्व मंत्री गोर्धन झड़ापिया को सौंपी। प्रदेश में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सपा-बसपा गठबंधन की होगी। इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने झड़ापिया से सवाल पूछा तो जवाब मिला, ‘‘क्या आप इतिहास भूल गए? मेरा काम पार्टी को सिर्फ सफलता दिलाना है।’’

Author December 31, 2018 9:14 AM
पूर्व में गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के साथ गोवर्धन झडापिया। (एक्सप्रेस फोटो)

गुजरात में 2002 के दौरान हुए दंगों के बाद उन्हें साइडलाइन कर दिया गया था। हालात ऐसे भी बने कि उन्होंने नरेंद्र मोदी का साथ छोड़ा और 2007 में अपनी पार्टी तक बनाई। बात गुजरात के पूर्व मंत्री गोर्धन झड़ापिया की हो रही है, जिन्हें अमित शाह ने पिछले हफ्ते ही बीजेपी यूपी की कमान सौंपी। प्रदेश में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सपा-बसपा गठबंधन की होगी। इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने झड़ापिया से सवाल पूछा तो जवाब मिला, ‘‘क्या आप इतिहास भूल गए? मेरा काम पार्टी को सिर्फ सफलता दिलाना है।’’

सवाल : यूपी में बीजेपी के लिए आपको वही जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो 2014 लोकसभा चुनाव में अमित शाह के पास थी। पार्टी ने उस वक्त यूपी की 80 में से 71 सीटें जीती थीं। आप इसे कैसे देखते हैं?

यहां कई लोगों की एक टीम है, जिसमें हम सब साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैं अपनी तुलना अमित भाई (शाह) से नहीं कर सकता। वे नॉर्थ ईस्ट समेत पूरे देश में पार्टी का विस्तार करने में सफल रहे हैं। मैंने अमित भाई के संगठनात्मक कौशल से अपनी तुलना कभी नहीं की। हम साथ काम कर रहे हैं और हर कोई सफलता हासिल करना चाहता है। अमित भाई अपनी योग्यता साबित कर चुके हैं, जबकि हमें यह करना बाकी है।

सवाल : आपका बैकग्राउंड देखते हुए बीजेपी का चुनाव जिज्ञासा जगाता है। आप क्या कहना चाहेंगे?
आप इसे भूल जाएं। वे दिन बीत चुके हैं। उतार-चढ़ाव हर किसी की जिंदगी में आते हैं।

सवाल : उत्तर प्रदेश को लेकर आपकी क्या योजना है? आप यहां प्रायॉरिटी किसे देंगे?
जब मैं यूपी जाऊंगा तो मुझे योजना का पता लगेगा। हालांकि, सबसे पहले मैं दिल्ली जाऊंगा। पहले किसी भी पॉलिटिकल असाइनमेंट के लिए मैं यूपी नहीं गया। हालांकि, मैं वहां कई सामाजिक और व्यक्तिगत कार्यक्रमों में शामिल जरूर हुआ हूं। जब मैं बीजेपी महासचिव था तो कई कार्यकर्ताओं के गांवों में गया था। उस वक्त मैं उनके घर गया था और शादियों में भी शामिल हुआ था। गुजरात और यूपी के लोगों में काफी ज्यादा आपसी जुड़ाव है।

सवाल : क्या 1990 के दशक में आप राम मंदिर आंदोलन से जुड़े थे?
नहीं। सभी जानते हैं कि 1990 के दशक से पहले मैं विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा हुआ था। वहां कुछ भी छिपाने के लिए नहीं होता। उस वक्त मैं परिषद में सचिव पद पर था। इसके बाद मैं बीजेपी में शामिल हुआ, जहां मैंने गुजरात के पूर्व मंत्री और पार्टी की अहमदाबाद यूनिट में महासचिव अशोक भट्ट के साथ काम किया। उस वक्त मैं विधायक था। मेरा अधिकतर समय संगठन में ही बीता।

सवाल : 2002 के दौरान आप गुजरात में राज्य मंत्री थे। क्या यह आपका सर्वोच्च पद था?
मेरे लिए संगठन में मिला पद सर्वोच्च है। संगठन की वजह से ही मंत्री पद मिलता है।

सवाल : आपको क्या लगता है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने आपको यूपी की जिम्मेदारी सौंपी है?
मैं नहीं जानता। यह उनका मुझ पर विश्वास है और कुछ नहीं।

सवाल : आपको क्या लगता है कि देश में एक बार फिर राम मंदिर बनाने को लेकर माहौल बन रहा है? खासतौर पर यूपी में?
नहीं। मुझ पर बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में विश्वास कीजिए। इसके अलावा कुछ भी नहीं।

सवाल : क्या लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर आंदोलन को गति देंगे?
देखिए, यह मेरा काम नहीं है। मैं पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं और मेरा काम पार्टी के लिए सफलता हासिल करना है।

सवाल : क्या लोकसभा चुनाव के लिए आपको गुजरात में रुकना पसंद है?
हम सैनिक हैं और सैनिकों के पास कोई चॉइस नहीं होती। मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं और जहां मुझे तैनात किया जाएगा, मैं वहां काम करूंगा। इसमें मेरा व्यक्तिगत कुछ भी नहीं है।

 

सवाल : यह भी कहा जा रहा है कि आपको गुजरात से बाहर रखने के लिए यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है?
मैं इस पर विश्वास नहीं करता हूं। आपको क्या जिम्मेदारी दी गई है, वह महत्वपूर्ण है। मैं इसे स्वीकार करता हूं। संगठन मेरे अभिभावक की तरह है और मैं इसकी रक्षा करूंगा।

सवाल : आप उन वर्षों के बारे में क्या कहेंगे, जब आप बीजेपी से ही लड़े? 2002 के दंगों पर बनी SIT के समक्ष दिए बयान पर आपकी क्या राय है?
मैं पुरानी बातों को भूल चुका हूं और उन्हें याद भी नहीं करना चाहता। मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता। जब तक मैं जीवित हूं, मुझे पार्टी के लिए काम करने दीजिए। ऐसे कई लोग हैं, जो पार्टी के प्रति वफादार हैं और इस काम को करने के इच्छुक होंगे। पीएम नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और शीर्ष नेतृत्व ने लोगों को इस काम के लिए चुना है। यह हमारे के लिए एक मौका और चुनौती दोनों हैं।

सवाल : यूपी में अल्पसंख्यक खुद को महफूज महसूस नहीं कर रहे हैं?
आप जानते हैं कि तीन तलाक बिल लोकसभा में पास हो चुका है। यह अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण कानून है। इससे उनका आत्मसम्मान बढ़ेगा और उनका जीवन भी सुरक्षित होगा। अब कोई भी उनके परिवार से दूर नहीं कर पाएगा। अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए किया गया यह एक महत्वपूर्ण कार्य है।

सवाल : यूपी में आपकी मौजूदगी अल्पसंख्यकों की नाराजगी को कैसे कम करेगी?
हम समावेशी हैं। हम किसी भी जाति या समुदाय से भेदभाव नहीं करते हैं। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा कहते हैं, ‘‘सबका साथ, सबका विकास।’’

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