मथुरा के वृंदावन में स्थित प्रेमानंद महाराज का केली कुंज आश्रम विवादों से घिरता जा रहा है। हाल ही में उनके एक शिष्य दीपक पटेल (रसिक दुलारी शरण) की मौत से उठा विवाद थमा नहीं था कि अब हाथरस के एक परिवार ने प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, हाथरस के बारामई खेड़ा गांव का एक परिवार शुक्रवार से केली कुंज आश्रम के बाहर धरने पर बैठ गया। परिजनों का आरोप है कि उनका 16 साल का बेटा अनुज चौधरी पिछले 3 महीने से लापता है। परिजनों का आरोप है कि वह आखिरी बाहर दीक्षा लेने आश्रम ही गया था।
आश्रम वालों ने नहीं की कोई बात- लापता बच्चे का पिता
लड़के के पिता का आरोप है कि उनका बेटा 3 महीने पहले केलीकुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने आया था और उसके बाद से ही वह घर नहीं लौटा और जब इस बारे में आश्रम वालों से बात की गई तो किसी ने बात करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई और इसीलिए अब यह परिवार अपने बेटे को खोजने की मांग के साथ आश्रम के बाहर धरने पर बैठ गया।
‘महाराज-जी के दर्शन का बोलकर घर से निकला था’
लापता अनुज चौधरी के पिता राजबीर ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा है, “मेरे बेटे ने तीन महीने पहले प्रेमानंद महाराज से ‘दीक्षा’ ली थी। पांच दिन बाद वह घर से यह कहकर निकला कि वह महाराज-जी के दर्शन करने जा रहा है और उसके बाद से वह वापस नहीं आया। हम तीन महीने से उसे ढूंढ रहे हैं, लेकिन अभी तक उसका कुछ पता नहीं चला है।”
‘मेरे साथ आए पुलिसवालों को भी शिष्यों ने फटकारा’
राजबीर ने आगे कहा, “इस बारे में किसी ने हमें कोई जानकारी नहीं दी है और न ही हमसे ठीक से बात की है। मैं तीन महीने से गेट के बाहर सो रहा हूं, सुनवाई की उम्मीद में, लेकिन किसी ने मेरी नहीं सुनी। आखिरकार मैंने धरना देने का फैसला किया क्योंकि मुझे लगा कि यही एकमात्र रास्ता बचा है। मैं महाराज-जी से बात नहीं कर पाया हूं। उनके शिष्य मुझसे बात करने से मना कर रहे हैं। उन्होंने मेरे साथ आए पुलिस अधिकारियों को भी डांटा-फटकारा है।”
‘घर से कंठी-माला और तीन किताबें लेकर निकला था’
पीड़ित ने पुलिस में भी इसकी शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस में दर्ज शिकायत के आधार पर परिवार हाथरस के बारामई खेड़ा गांव का रहने वाला है। इस परिवार से राजवीर सिंह (बच्चे के पिता) अपनी पत्नी, मां, भाई और चार बेटियों के साथ केलीकुंज आश्रम के बाहर धरने पर बैठ गए। पिता का कहना है कि दीक्षा लेने के बाद वह पांच दिन तक घर पर रहा था। इसके बाद उसने कहा कि वह महाराज जी के दर्शन करने जा रहा है। वह प्रेमानंद महाराज की दी हुई कंठी-माला और तीन किताबें लेकर घर से निकला था। इसके बाद तीन महीने बीत गए, लेकिन आज तक वह घर नहीं आया।
चार बहनों में इकलौता भाई था अनुज
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राजवीर सिंह ने बताया है कि उनका बेटा अनुज चार बहनों पर इकलौत भाई है। वह पढ़ाई करता था और इस साल इंटर में था। उसकी उम्र करीब 16-17 साल है। राजवीर ने कहा है, “मुझे मेरा बेटा वापस दे दो। हम यहां से चले जाएंगे।”
इस पूरे मामले पर पुलिस का क्या कहना है?
परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अनुज ने 26 जून को आश्रम में दीक्षा ली थी, लेकिन उसके बाद यहां रहने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, सीओ वृंदावन संदीप सिंह ने बताया कि अनुज चौधरी की दीक्षा आश्रम में 26 जून 2026 को हुई थी। उसके बाद आश्रम के किसी कुंज में रहने की बात सामने नहीं आई है। उसके बाद 5 जुलाई को परिवार ने सादाबाद थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उसमें बताया गया था कि बच्चा कोचिंग जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन वापस नहीं आया।
आश्रम की ओर से क्या कहा गया?
परिवार के आरोपों के बाद आश्रम की ओर से भी एक सेवादार ने इन आरोपों का जवाब दिया। आश्रम का कहना है कि अनुज चौधरी की फोटो सेवादारों के ग्रुप में भेजी गई है। गुरु पूर्णिमा के दौरान हजारों शिष्य आश्रम आए थे। उस समय भी अनुज को लेकर जानकारी जुटाई गई, लेकिन उसका पता नहीं चला। आश्रम प्रबंधन परिवार की हर संभव मदद करने के लिए तैयार है।
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