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हरियाणा: कर्ज में डूबे 15 लाख काश्तकारों ने किया आंदोलन शुरू

एक तरफ जहां पंजाब में किसान आत्महत्या व किसान आंदोलन बड़ा मुद्दा बन चुका है वहीं हरियाणा में भी किसानों ने कर्ज माफी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है।

Author चंडीगढ़ | June 14, 2017 02:10 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।(EXpress Photo)

एक तरफ जहां पंजाब में किसान आत्महत्या व किसान आंदोलन बड़ा मुद्दा बन चुका है वहीं हरियाणा में भी किसानों ने कर्ज माफी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेश में 15 लाख से अधिक किसान ऐसे हैं जिन पर करीब 36 हजार करोड़ का कर्ज है।  दूसरे मुद्दों पर अलग-अलग सुर अपनाने वाले हरियाणा के विरोधी दल कांग्रेस तथा इनेलो किसानों के मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं। सरकार अभी किसानों की मांगों तथा कर्ज को लेकर गंभीर नहीं है। सरकार ने अभी तक इस मामले को लेकर एक भी बैठक नहीं की है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र की सरकारों द्वारा किसानों की कर्ज माफी की घोषणाओं के बाद हरियाणा में भी किसान कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं। विभिन्न किसान संगठनों के मुताबिक प्रदेश के करीब 16.5 लाख किसानों में से 15 लाख ऐसे हैं, जो सहकारी बैंकों के साथ-साथ प्राइवेट बैंकों और निजी साहूकारों के कर्जदार हैं। सहकारी व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने उनके पोस्टर तक लगाने शुरू कर दिए। इसके बावजूद सरकार चुप है। मध्य प्रदेश की घटना के बाद केंद्र सरकार ने किसानों की कर्ज माफी पर निर्णय के लिए राज्य सरकारों को अधिकृत कर दिया है। पड़ोसी राज्य पंजाब द्वारा किसानों की कर्ज माफी के लिए बाकायदा कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह कमेटी अगले सप्ताह अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दे सकती है।

हरियाणा की पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों के करीब 27 हजार करोड़ के कर्ज माफ किए गए थे। इतनी बड़ी कर्जमाफी के बाद किसान फिर से 36 हजार करोड़ के कर्जदार हो गए। अब इन किसानों के हक में हुड्डा और चौटाला अपने-अपने ढंग से लड़ाई लड़ रहे हैं।  सरकारी सूत्र बताते हैं कि हरियाणा के सहकारी बैंकों के 31.25 लाख सदस्यों में से 13 लाख सक्रिय सदस्य फसली कार्यों के लिए कर्ज लेते हैं। बैंकें हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपए के फसली कर्जे उपलब्ध कराते हैं। नाबार्ड 50 फीसदी तक, यानी 5000 करोड़ रुपए की राशि चार फीसद ब्याज दर पर, कर्ज उपलब्ध कराता है। बाकी 5000 करोड़ रुपए इन बैंकों से साढ़े छह फीसद की ब्याज दर पर बाजार से लेने पड़ते हैं। किसानों को फसली ऋण सात फीसद ब्याज दर पर दिया जाता है, लेकिन सरकार की घोषणा के मुताबिक टाइम पर लोन चुकाने वाले किसानों का ब्याज माफ कर दिया जाता है।भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढुनी के अनुसार प्रदेश में किसानों की हालत बेहद दयनीय है। सरकार किसानों की समस्याओं पर गंभीर नहीं है। सरकार की अनदेखी के चलते आज किसान आंदोलन के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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हरियाणा में किसानों की वर्तमान स्थिति
हरियाणा में किसानों की संख्या तकरीबन 16.05 लाख
कर्जदार किसान लगभग 15 लाख
बैैंक व आढ़तियों के कर्जदार किसान करीब नौ लाख
नौ साल में कर्ज बढ़ा 400 फीसद
बैैंकों के पास गिरवी जमीनें 75 फीसद
सहकारी बैैंकों के कर्जदार किसान 13 लाख
सहकारी बैैंकों का कर्ज अनुमानित चार हजार करोड़
सहकारी बैैंकों के डिफाल्टर किसान साढ़े छह लाख
बड़े डिफाल्टर 550 (10 लाख से ज्यादा के बकायादार)
बड़े डिफाल्टरों का कर्ज करीब 350 करोड़
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स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर हो चुकी है फजीहत
हरियाणा के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चे के राष्टÑीय अध्यक्ष के पद पर कार्य किया है। पूर्व में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाने की राष्टÑव्यापी लड़ाई की शुरूआत धनखड़ ने हरियाणा से ही की थी। इसके बाद पूरे देश में भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए यूपीए के खिलाफ अभियान चलाया था। सत्ता में आने के बाद धनखड़ ने इस रिपोर्ट को लागू करने के मामले में सबसे पहले पल्ला झाड़ा। अब हाल ही में भाजपा के हरियाणा प्रभारी डॉ.अनिल जैन भी इस मुद्दे से पल्ला झाड़ चुके हैं।
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साल भर में 50 किसानों की मौत का दावा
किसानों की मौत का मुद्दा पंजाब ही नहीं हरियाणा के लिए भी बड़ा मामला है। हालांकि प्रदेश सरकार इस तरह की घटनाओं को अधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं करती है। अगर किसान संगठनों के दावे का यकीन किया जाए तो हरियाणा में पिछले एक वर्ष के दौरान 50 से अधिक किसान अकाल मौत का शिकार हुए हैं। भाकियू नेताओं का दावा है कि फसलों के कम दाम और कर्ज नहीं उतार पाने की मजबूरी में इन किसानों की जान गई है।

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