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33 साल की सेवा में 70 बार हुआ ट्रांसफर, आखिरी 6 महीने की सैलरी पाए बिना रिटायर हुआ ये IAS अधिकारी

हरियाणा में अक्टूबर 2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई तो उन्हें गुडगांव डिवीजन का कमिश्नर बनाया गया। लेकिन उन्हें मात्र 38 दिनों के बाद इस पद से हटा दिया गया और उनका तबादला कर दिया गया। उस वक्त सरकार ने उन्हें हटाने की कोई वजह नहीं बताई थी। लेकिन तबादले के पहले 'निजी पार्टियों द्वारा जमीन के संदिग्ध डील और सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जे' की रिपोर्ट सरकार को भेज चुके थे।

Pradeep Kasni, ias Pradeep Kasni, Pradeep Kasni retirement, Pradeep Kasni service, Pradeep Kasni IAS officer, Pradeep Kasni profile, Haryana ias, Punjab ias, Hindi news, news in Hindi, Jnasattaप्रदीप कासनी (Express Photo by Kamleshwar Singh)

हरियाणा के IAS अधिकारी प्रदीप कासनी रिटायर हो गये हैं। उनका रिटायरमेंट इस बात में खास है कि 33 साल की सेवा अवधि में उनका 70 बार तबादला हुआ। प्रदीस कासनी पिछले 6 महीने से लुप्तप्राय हरियाणा लैंड यूज बोर्ड में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी हैं। अगस्त 2017 में इस पद पर उनकी पोस्टिंग हुई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रदीप कासनी सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल गये थे। पिछले 6 महीने की नौकरी के लिए उन्हें सैलरी भी नहीं मिली थी। इस मामले की सुनवाई अभी हाईकोर्ट में हो रही है। हरियाणा आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने प्रदीप कासनी को चाय पार्टी के लिए बुलाया है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए प्रदीप कासनी ने कहा है कि एसोसिएशन असली मुद्दे और चुनौतियों को दरकिनार कर गया। उन्होंने कहा, “चाय के एक कप के साथ जिम्मेदारियों को दरकिनार करने की कोशिश की गई है, एसोसिएशन कैडर से जुड़े मुद्दों और गवर्नेंस और मिस गवर्नेंस के मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।”

बता दें कि कासनी ने 1984 में हरियाणा सिविल सर्विस ज्वाइन किया था। बाद में उनकी पदोन्नति आईएएस में हो गई थी, उन्हें 1997 बैच मिला। हरियाणा प्रशासनिक सुधार विभाग के बतौर सचिव उन्होंने 2014 में राज्य के सूचना सचिवों और सेवा का अधिकार सचिव की नियुक्ति पर सवाल खड़े किये थे। उन्होंने पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठाये थे। हरियाणा में अक्टूबर 2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई तो उन्हें गुडगांव डिवीजन का कमिश्नर बनाया गया। लेकिन उन्हें मात्र 38 दिनों के बाद इस पद से हटा दिया गया और उनका तबादला कर दिया गया। उस वक्त सरकार ने उन्हें हटाने की कोई वजह नहीं बताई थी। लेकिन तबादले के पहले ‘निजी पार्टियों द्वारा जमीन के संदिग्ध डील और सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जे’ की रिपोर्ट सरकार को भेज चुके थे।

दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर कथित हमले पर प्रदीप कासनी का कहना है कि ये को भावनात्मक मुद्दा नहीं है, और जब पीड़ित अधिकारी ने इस मामले में केस दर्ज कर दिया है तो आईएस एसोसिएशन को इस मामले को तूल देने की कोई जरूरत नहीं है।

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